Shibu Soren Passes Away: दिशोम गुरु शिबू सोरेन नहीं रहे, 81 साल की उम्र में हुआ निधन, झारखंड में शोक की लहर

Updated at : 04 Aug 2025 9:53 AM (IST)
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Shibu Soren Passes Away: दिशोम गुरु शिबू सोरेन नहीं रहे, 81 साल की उम्र में हुआ निधन, झारखंड में शोक की लहर
दिशोम गुरु शिबू सोरेन आखिरी बार 15 अप्रैल 2025 को रांची में आयोजित झामुमो के 13वें महाधिवेशन में ह्वील चेयर पर पत्नी रूपी सोरेन के साथ सार्वजनिक मंच पर दिखे थे. फोटो : प्रभात खबर

Shibu Soren latest Death News update: झारखंड आंदोलन के जनक, महाजनों और सूदखोरों के खिलाफ आदिवासियों को जगाने वाले, धनकटनी आंदोलन और आदिवासी समाज को शिक्षित करने का अभियान चलाने वाले झारखंड के सबसे बड़े नायक शिबू सोरेन नहीं रहे. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सुप्रीमो दिशोम गुरु ने आज दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली. झारखंड में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया गया है.

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Shibu Soren Death News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन नहीं रहे. 81 साल की उम्र में आज उनका निधन हो गया. इसकी जानकारी सीएम हेमंत सोरेन ने एक्स पर दी. दिशोम गुरु के निधन के बाद झारखंड में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है. उनके निधन की खबर आते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की पार्टी के झंडे झुका दिये गये.

लंबे समय से किडनी की बीमारी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे गुरुजी को 19 जून 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसी दौरान उनको ब्रेन स्ट्रोक हुआ और उनकी हालत बिगड़ गयी. हालांकि, इलाज के दौरान उनकी स्थिति में सुधार हुआ था. काफी दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्होंने आज अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से झारखंड में शोक की लहर दौड़ गयी है.

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11 जनवरी 2025 को गुरुजी ने परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मनाया था अपना जन्मदिन. फोटो : प्रभात खबर

रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था शिबू सोरेन का जन्म

उनका जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. उनके पिता सोबरन सोरेन (Sobran Soren) शिक्षक थे. महाजनों के द्वारा उनकी हत्या के बाद शिबू सोरेन (Sibhu Soren) पढ़ाई छोड़कर गांव आ गये. आदिवासी समाज को एकजुट करना शुरू किया. 1970 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष शुरू कर दिया.

झारखंड राज्य के लिए 1973 में झामुमो की स्थापना की

दिशोम गुरु ने 4 फरवरी 1973 को बिनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को गति दी. झामुमो और आजसू के आंदोलन के परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन हुआ. गुरुजी को झारखंड आंदोलन का जनक माना जाता है. उनके योगदान को पूरे देश में सम्मान की नजर से देखा जाता है.

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सामाजिक न्याय के प्रणेता Shibu Soren को प्यार और सम्मान से लोग ‘गुरुजी’ बुलाते थे

झामुमो सुप्रीमो को उनके समर्थक प्यार से ‘गुरुजी’ कहते थे. उन्होंने महाजनों और सूदखोरों के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट किया. धनकटनी आंदोलन जैसे अभियानों के जरिये सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी. उनकी सादगी और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें झारखंड की राजनीति में एक विशेष स्थान दिलाया. उनके नेतृत्व में JMM राज्य की सियासत में एक मजबूत ताकत के रूप में उभरी.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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