सीमा पात्रा की क्रिमिनल रिवीजन अमान्य, अपील में बदला

Updated at : 26 Jun 2024 1:07 AM (IST)
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सीमा पात्रा की क्रिमिनल रिवीजन अमान्य, अपील में बदला

मामला नौकरानी के साथ क्रूरता करने का

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रांची. झारखंड हाइकोर्ट की जस्टिस अनुभा रावत चाैधरी की अदालत ने भाजपा की निलंबित नेत्री सीमा पात्रा की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर फैसला सुनाया. अदालत ने मामले में दायर क्रिमिनल रिवीजन को अमान्य करार देते हुए उसे अपील में तब्दील कर दिया तथा सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की. अदालत ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट की धारा-14ए के तहत उक्त मामले में अपील याचिका दायर की जानी चाहिए थी. अदालत ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी (याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं) के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद याचिका पर उक्त फैसला सुनाया. इससे पूर्व मामले के सूचक विवेक बास्की की ओर से अधिवक्ता सुभाशीष रसिक सोरेन व अधिवक्ता शोभा लकड़ा ने पैरवी की थी. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सीमा पात्रा ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर कर निचली अदालत द्वारा उनके डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज करने संबंधी आदेश को चुनाैती दी है. मामले को लेकर अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. आरोप है कि सीमा पात्रा ने पीड़िता सुनीता खाखा को कई दिनों तक भूखे-प्यासे एक कमरे में बंद कर रखा था. उसे गंभीर रूप से प्रताड़ित किया था तथा अमानवीय यातना दी थी. प्रताड़ना की सूचना कार्मिक विभाग के अधिकारी विवेक बास्की को मिली थी. उन्होंने उपायुक्त के पास इसकी शिकायत दर्ज करायी. इसके बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने सुनीता खाखा को मुक्त कराया था.

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