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Ranchi News: रांची के 9 अंचल अधिकारियों से उपायुक्त ने मांगा स्पष्टीकरण, जानें क्या है वजह

Updated at : 20 Jun 2024 5:55 PM (IST)
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ranchi dc rahul kumar sinha

रांची के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा.

Ranchi News: रांची के उपायुक्त ने 9 अंचल अधिकारियों को नोटिस देकर 2 दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा है. राजस्व विभाग की समीक्षा के बाद यह आदेश जारी हुआ है.

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Ranchi News: रांची के 9 अंचल अधिकारियों से उपायुक्त ने स्पष्टीकरण मांगा है. जिन अंचल अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उसमें रातू, मांडर, नामकुम, कांके, हेहल, रांची शहर, बड़गाईं, ओरमांझी और अरगोड़ा के सीओ शामिल हैं.

अंचल अधिकारियों से उपायुक्त ने 2 दिन में मांगा स्पष्टीकरण

उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा के कार्यालय ने यह जानकारी दी है. उपायुक्त कार्यालय ने कहा है कि इन सभी अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 2 दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. दाखिल-खारिज समेत कई कार्यों में हो रहे विलंब की वजह से इन अंचलों के अधिकारियों को उपायुक्त ने नोटिस जारी किया है.

अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज समेत ये मामले हैं लंबित

कहा गया है कि रांची जिले के इन अंचलों में राजस्व संबंधी मामलों जैसे दाखिल-खारिज, उत्तराधिकारी दाखिल-खारिज, भूमि का सीमांकन, विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र, अधिग्रहीत भूमि का दाखिल-खारिज, परिशोधन पोर्टल एवं सीपी ग्राम, पीजी पोर्टल की समीक्षा के दौरान देखा गया कि बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. उनसे इसी संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है.

उपायुक्त ने 9 अंचल अधिकारियों को नोटिस में कही ये बात

रांची के उपायुक्त ने उपरोक्त सभी 9 अंचल अधिकारियों से कहा है कि नामांतरण वादों में आपत्तिरहित 30 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या एवं आपत्ति वाले 90 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या बहुत ज्यादा है. सीमांकन वादों में स्वीकृत मामलों की कुल संख्या से अस्वीकृत मामलों की संख्या अधिक है. उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों से कहा है कि नोटिस मिलने के 2 दिन के अंदर स्पष्टीकरण दें.

चंपाई सोरेन ने अधिकारियों के साथ की थी राजस्व विभाग की समीक्षा

बता दें कि मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की पिछले दिनों समीक्षा की थी. इसी दौरान इस बात की जानकारी मिली कि रांची जिले के इन 9 अंचल कार्यालयों में राजस्व संबंधी काम की रफ्तार बहुत कम है. इस पर मुख्यमंत्री ने सवाल किए, तो विभाग के सचिव ने खेद प्रकट किया.

नामांतरण एवं सीमांकन से जुड़े सबसे ज्यादा मामले हैं लंबित

समीक्षा के दौरान पाया गया कि 18 जून 2024 तक नामांतरण एवं सीमांकन से संबंधित सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं. लंबित मामलों की समीक्षा के बाद उन सभी 9 अंचलों के अंचल अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग की गई.

इन अंचलों के सीओ से मांगा गया स्पष्टीकरण

  • अंचल अधिकारी रातू, रांची
  • अंचल अधिकारी मांडर, रांची
  • अंचल अधिकारी नामकुम, रांची
  • अंचल अधिकारी कांके, रांची
  • अंचल अधिकारी हेहल, रांची
  • अंचल अधिकारी शहर, रांची
  • अंचल अधिकारी बड़गाईं, रांची
  • अंचल अधिकारी ओरमांझी, रांची
  • अंचल अधिकारी अरगोड़ा, रांची

सबसे ज्यादा ये मामले हैं लंबित

  • दाखिल-खारिज
  • उत्तराधिकारी दाखिल-खारिज
  • भूमि सीमांकन
  • विभिन्न प्रमाण पत्र
  • अधिग्रहीत भूमि का दाखिल-खारिज
  • परिशोधन पोर्टल एवं सीपी ग्राम
  • पीजी पोर्टल

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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