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रामदयाल मुंडा का सपना अधूरा, 32 जनजातियों का साझा सांस्कृतिक स्थल आज भी उपेक्षित

Updated at : 23 Aug 2025 6:05 AM (IST)
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Ramdayal Munda Birth Anniversary

पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा की जयंती आज.

Ramdayal Munda Birth Anniversary: पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा का सपना आज भी अधूरा है. 32 जनजातियों का साझा सांस्कृतिक स्थल भी उपेक्षित है. रांची के टैगोर हिल पर ओपेन एयर थिएटर का निर्माण पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा का बड़ा सपना था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका.

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Ramdayal Munda Birth Anniversary| रांची, प्रवीण मुंडा : झारखंड की राजधानी रांची के टैगोर हिल पर ओपेन एयर थिएटर का निर्माण पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा का बड़ा सपना था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका. डॉ रामदयाल मुंडा इस स्थल को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहते थे. यह 32 जनजातियों की साझा सांस्कृतिक पहचान का स्थल है. डॉ मुंडा की रिश्तेदार डॉ मीनाक्षी मुंडा कहती हैं, ‘डॉ मुंडा ने अपने निधन से पूर्व खुद ही इसकी रूपरेखा पेंसिल से ड्रॉ की थी. ओपेन एयर थियेटर के किनारे 32 जनजातियों को समर्पित कक्ष बनाना था. बीच में सांस्कृतिक दलों के प्रदर्शन के लिए स्टेज तथा दो से तीन हजार दर्शकों के बैठने की जगह होती.’

2011 में मुंडा के निधन के बाद सारी योजनाएं ठंडे बस्ते में

डॉ मुंडा के राज्यसभा सांसद रहते इसके लिए फंड जारी हुआ और शिलान्यास भी किया गया. वर्ष 2011 में उनके निधन के बाद सारी योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गयीं. डॉ रामदयाल मुंडा के पुत्र गुंजल इकिर मुंडा कहते हैं, ‘यह एक ऐसा स्थल बनना था, जहां पूरे साल कुछ न कुछ सांस्कृतिक गतिविधियां चलती रहतीं. अभी रांची में ऐसी एक भी जगह नहीं है.’

ओपेन एयर थिएटर की जगह रामदायल मुंडा की प्रतिमा

वहीं, दुर्भाग्यवश इस पर आगे कुछ काम नहीं हुआ. ओपेन एयर थिएटर की जगह पर स्व डॉ रामदयाल मुंडा की प्रतिमा है. नृत्य की मुद्रा में आदिवासी स्त्री-पुरुष की मूर्तियां भी हैं. लेकिन रखरखाव के अभाव में वह जगह भी खराब होती जा रही है. मूर्तियों के ईद-गिर्द साफ-सफाई का अभाव है. सीढ़ियां भी खराब होने लगी हैं.

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मिट गयी शिलापट्ट पर लिखी इबारत

शिलापट्ट पर लिखी इबारत तक मिट चुकी है. आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण कर लिया गया है. ओपेन एयर थिएटर के सामने सड़क के पास वाली जमीन पर कबाड़ी का कारोबार चल रहा है. वहां पर खाली बोतलें, प्लास्टिक और अन्य कचरा डंप हैं. यहां डॉ मुंडा का सपन दम तोड़ता नजर आता है.

टीआरएल विभाग शुरू किया, झारखंड आंदोलन को दिशा दी

पद्मश्री स्व डॉ रामदयाल मुंडा शिक्षाविद, भाषाविद, संस्कृति कर्मी, झारखंड आंदोलनकारी और राजनेता थे. उनका जन्म 23 अगस्त 1939 को दिउड़ी (तमाड़) में हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा अमलेसा स्थित लूथरन मिशन स्कूल में हुई. मानवशास्त्र में स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय से भाषा विज्ञान में पीएचडी की.

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अमेरिका में अध्यापन करने के बाद रांची लौटे रामदयाल मुंडा

कुछ वर्ष अमेरिका में ही अध्यापन का कार्य करने के बाद वह वापस रांची आये और पद्मश्री स्व डॉ बीपी केसरी सहित अन्य लोगों के साथ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की शुरुआत की. झारखंड आंदोलन को उन्होंने एक बौद्धिक तथा सांस्कृतिक दिशा दी थी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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