झारखंड को डायन कुप्रथा मुक्त बनाना गरिमा परियोजना का उद्देश्य, जेंडर मंच के जरिये ग्रामीण होंगे जागरूक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Dec 2021 8:01 PM
jharkhand news: झारखंड से डायन कुप्रथा को खत्म करने के उद्देश्य से दो दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ. इस मौके पर अतिथियों ने डायन कुप्रथा को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया. वहीं, जेंडर मंच के जरिए ग्रामीणों को जागरूक करने और पीड़ितों को पुनर्वास दिलाने की अपील सरकार की.
Jharkhand news: झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा आयोजित डायन कुप्रथा मुक्त झारखंड के निर्माण के लिए आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन कई तकनीकी सेशन का आयोजन हुआ. विभिन्न विभागों के समन्वय, शिक्षा एवं जागरूकता की जरूरत एवं साझा रणनीति को केंद्र में रखकर विभिन्न विशेषज्ञों ने अपनी बातें रखी. कार्यशाला के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् डॉ सुनीता रॉय ने कार्यशाला की अध्यक्षता की.
कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिक्षाविद् व यूजीसी वुमेंस सेंटर की प्रमुख डॉ सुनीता रॉय ने कहा कि महिला सशक्तीकरण एवं शिक्षा के अलख से डायन कुप्रथा खत्म होगा. महिलाओं से समाज में होनेवाले भेदभाव को खत्म करने की जरूरत है. उन्होंने डायन कुप्रथा की पीड़ित महिलाओं को प्रशिक्षित कर सशक्त आजीविका से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया. कहा कि बच्चों को सामाजिक दायित्वों पर प्रशिक्षित कर सामाजिक माहौल बनाने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि सुंदर विकसित समाज के निर्माण के लिए डायन कुप्रथा का उन्मूलन जरूरी है. उन्होंने समाज में लैंगिंक समानता एवं महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया. साथ ही ग्रामीण इलाके से ओझा-गुणी प्रथा को खत्म करने के लिए शिक्षा का अलख जगाते हुए ग्रामीण इलाकों में जागरूकता पर कार्य करना चाहिए. उन्होंने किन्नरों को भी विभिन्न जागरूकता अभियान में जोड़ने की जरूरत पर बल दिया है, ताकि उनकी आजीविका की भी व्यवस्था हो और जागरूकता का कार्य भी हो सके.
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ग्रामीण विकास विभाग के सचिव डॉ मनीष रंजन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि गरिमा परियोजना एक शुरूआत है. हमारा लक्ष्य झारखंड को डायन कुप्रथा मुक्त बनाना है. गरिमा परियोजना के तहत वल्नेबरिलिटी मैंपिंग एवं ग्राम संगठन के प्रशिक्षण के जरिए डायन कुप्रथा उन्मूलन को गति दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि जेंडर मंच बनाने का कार्य किया जायेगा. जिससे डायन कुप्रथा जैसे अंधविश्वास एवं भेदभाव को दूर कर जागरूक करने का काम किया जायेगा.
डॉ मनीष रंजन ने कहा कि सखी मंडल की बहनों द्वारा नुक्कड़ नाटक के जरिए भी प्रभावित गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा एवं डायन कुप्रथा पीड़ितों को सुरक्षा एवं काउंसेलिंग की व्यवस्था भी गरिमा परियोजना के जरिए की जाएगी. कहा कि डायन कुप्रथा की पीड़ित महिलाओं को पुनर्वास पर भी काम किया जाएगा और सशक्त आजीविका से जोड़ा जाएगा. साथ ही उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस कार्यशाला में मिले सुझावों पर रणनीति तैयार कर डायन कुप्रथा मुक्त पंचायत का निर्माण किया जाएगा.
कार्यशाला के तकनीकी सेशन में झालसा के संतोष कुमार ने बताया कि झालसा राज्य में डायन कुप्रथा पीड़ितों को कानूनी मदद करने के लिए लगातार प्रयासरत है. डायन कुप्रथा एक सामाजिक कानूनी समस्या है जिसको हम सबको मिलकर खत्म करना है. झालसा, JSLPS एवं अन्य सरकारी विभाग मिलकर इस कुप्रथा को खत्म कर सकते हैं. हमें हर किसी के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करने की जरूरत है. कहा कि हमें वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की जरूरत है. वहीं, झालसा द्वारा स्कूलों में लीगल साक्षरता क्लब का गठन किया जा रहा है जो डायन कुप्रथा उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ के वाइस चांसलर डॉ केशव राव ने बच्चों को डायन कुप्रथा के बारे में जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इस कुप्रथा के उन्मूलन के लिए सबको मिलकर साझा प्रयास करना चाहिए. सेंटर फॉर लीगल एड प्रोग्राम के तहत डायन कुप्रथा के पीड़ितों को लगातार मदद उपलब्ध करायी जाती है. हम सबको लगातार बिना हिम्मत हारे कार्य करने की जरूरत है, तब ही डायन कुप्रथा मुक्त झारखंड का निर्माण होगा.
CIP डायरेक्टर डॉ बासुदेब प्रसाद ने कहा कि गरिमा परियोजना के तहत CIP मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोचिकित्सीय सहयोग के लिए कार्य करेगा. मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी JSLPS के साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है. पीड़ित महिलाओं को एक नया जीवन देने में मानसिक स्वास्थ्य की पहल की जाएगी. कहा कि मानसिक स्वास्थ्य काउंसेलिंग के लिए CIP के 15 हेल्पलाइन नंबर दिन-रात कार्य कर रहे हैं.
राष्ट्रीय स्तर की वक्ता गोविंद केलकर ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए डायन कुप्रथा के अंतरराष्ट्रीय परिपेक्ष्य को सामने रखा. अफ्रीका, यूरोप, घाना समेत कई देशों का जिक्र करते हुए डॉ केलकर ने डायन कुप्रथा के कारण, निदान एवं उन्मूलन पर अपनी बातें रखी. उन्होंने भेदभाव रहित समाज की जरूरत पर बल दिया एवं शिक्षा एवं व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था पर कार्य करने की जरूरत पर बात की.
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कार्यशाला के समापन समारोह में JSLPS की CEO नैन्सी सहाय ने कहा कि यह कार्यशाला गरिमा परियोजना के क्रियान्वयन एवं राज्य से डायन कुप्रथा के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. सखी मंडल की बहनों के जरिए गांव-गांव तक जागरूकता का कार्य किया जाएगा एवं सभी स्टेकहोल्डर्स की साझा रणनीति पर कार्य करने का प्रयास रहेगा. इस अवसर पर तकनीकी चर्चा को डॉ राकेश रंजन, रेशमा सिंह, मनीषा किरण ने भी संबोधित किया.
Posted By: Samir Ranjan.
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