साई सुदर्शन ने रचा इतिहास, टी20 क्रिकेट में सबसे तेज 3,000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बने
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 17 May 2026 5:18 PM
साई सुदर्शन
Sai Sudharsan : केकेआर के ओपनर साई सुदर्शन ने टी-20 क्रिकेट में सबसे तेज 3000 रन बना दिए हैं. सुदर्शन ने यह कमाल महज 78 पारियों में किया है.
Sai Sudharsan : गुजरात टाइटंस के सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन ने टी20 क्रिकेट में एक नया रिकाॅर्ड बनाया है. साई सुदर्शन टी20 फॉर्मेट में सबसे तेज 3,000 रन बनाने वाले क्रिकेटर बन गए हैं. सुदर्शन ने पूर्व ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शॉन मार्श को पीछे छोड़ते हुए यह रिकाॅर्ड अपने नाम किया.
सिर्फ 78 पारियों में ही बनाया रिकाॅर्ड
24 साल के साई सुदर्शन ने महज 78 पारियों में अपने 3000 टी20 रन पूरे किए, जबकि शॉन मार्श ने इसके लिए 85 पारियां ली थीं. फिलहाल सुदर्शन ने अपने 78 मैचों में 43.72 की शानदार औसत और 142.17 के स्ट्राइक रेट से 3,017 रन दर्ज किए हैं. सुदर्शन की इन पारियों में 4 शतक और 21 अर्धशतक शामिल हैं.
चोट भी नहीं रोक सकी रास्ता, जड़ा लगातार चौथा अर्धशतक
मैच के दौरान कार्तिक त्यागी की एक तेज गेंद सुदर्शन की बाईं कोहनी पर लगी, जिसके बाद उन्हें ‘रिटायर्ड हर्ट’ होकर मैदान से बाहर जाना पड़ा. लेकिन इस युवा बल्लेबाज ने हार नहीं मानी. वह दोबारा क्रीज पर लौटे और 248 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए 28 गेंदों में 6 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 53* रनों की नाबाद और जुझारू पारी खेली. यह इस सीजन में उनका लगातार चौथा 50+ का स्कोर है. सुदर्शन ने इस सीजन में 6 अर्धशतक और एक शतक जड़ा है . सुदर्शन फिलहाल 13 मैचों में 554 रन बनाए हैं. इस सीजन में वे ऑरेंज कैप होल्डर भी हैं.
केकेआर ने शानदार खेल दिखाया
केकेआर और जीटी के मैच में गुजरात टाइटंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया. केकेआर ने निर्धारित 20 ओवरों में 2 विकेट खोकर 247 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. गुजरात की टीम इस बड़े टारगेट को पूरा नहीं कर सकी और 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 218 रन ही बना पाई. केकेआर ने मैच को 29 रन से जीत लिया.इस जीत के बावजूद कोलकाता नाइट राइडर्स 11 अंकों के साथ प्वाइंट टेबल में सातवें स्थान पर है. वहीं, हार के बाद भी गुजरात टाइटंस 16 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर मजबूती से टिकी हुई है.
(इनपुट : अरकम अब्दुल मन्नान)
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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