प्रभात खबर संवाद: नियोजन नीति, 1932 का खतियान व 2024 के चुनाव पर क्या बोले झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन?

Updated at : 03 May 2023 5:27 AM (IST)
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प्रभात खबर संवाद: नियोजन नीति, 1932 का खतियान व 2024 के चुनाव पर क्या बोले झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन?

खेल, पर्यटन व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हफीजुल हसन मंगलवार को प्रभात खबर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे. प्रदेश की राजनीति में नियोजन नीति से लेकर 1932 के खतियान को लेकर सरकार का स्टैंड बताया. 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर मंत्री श्री अंसारी ने बेबाकी से बातें की.

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रांची: खेल, पर्यटन व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हफीजुल हसन मंगलवार को प्रभात खबर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे. मंत्री श्री अंसारी ने प्रदेश में खेल-पर्यटन की दशा-दिशा से लेकर भावी कार्य योजना पर अपनी बातें रखी. प्रदेश की राजनीति में नियोजन नीति से लेकर 1932 के खतियान को लेकर सरकार का स्टैंड बताया. 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर मंत्री श्री अंसारी ने बेबाकी से बातें कीं. वह आने वाले चुनाव में भाजपा की चुनौती देख रहे हैं, लेकिन भरोसा है कि गठबंधन ज्यादा से ज्यादा सीटें लेकर आयेगा. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश.

आपने कभी पिताजी के रहते राजनीति में आने कि सोची थी या विरासत में मिली चीजें निभा रहे हैं ?

मैं जेएसएमडीसी में माइनिंग सर्वेयर की नौकरी करता था. 2005 में सिकनी कोलियरी में तबादला होने के बाद मैंने नौकरी छोड़ दी. तब अब्बा चुनाव हार चुके थे. परिवार की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए मैंने क्रशर का काम शुरू किया. उसी की कमाई से दो बहनों की शादी की. 2009 में अब्बा चुनाव जीते. 2014 में हाजी साहब चुनाव हार गये. 2015 में मैंने पार्टनरशिप में राइस मिल खोली. फिर 2018 में उसी को बेच कर 2019 का चुनाव लड़ा. बूथ मैनेजमेंट से लेकर चुनाव का पूरा काम मैंने ही देखा. अब्बा फिर जीते. साल 2005 से 2019 तक भले ही फ्रंट पर मैं नहीं था, लेकिन पर्दे के पीछे से अब्बा का पूरा मैनेजमेंट मैं ही करता था.

आप पहली बार जीते और मंत्री बन गये. सीधे मंत्री बन जाना कैसा लग रहा है?

मैं राजनीतिक रूप से सक्रिय था. सोरेन परिवार से मेरा रिश्ता पार्टी का नहीं, पारिवारिक है. हेमंत बाबू की शादी में मेरे अब्बा ने गुरुजी की गैर मौजूदगी में बारात का नेतृत्व किया था. अब्बा का गुरुजी से लगाव ऐसा था कि ओपन हार्ट सर्जरी के लिए जाते हुए उन्होंने परिजनों को छोड़ कर चुन्ना सिंह को बुला कर चुनाव लड़ रहे गुरुजी की मदद करने को कहा था. अब्बा के इंतकाल के बाद हेमंत बाबू ठेकेदारी छोड़ कर राजनीति में आने की बात कहते थे. पार्टी की तरफ से हाजी साहब को दिया गया सम्मान और हेमंत बाबू के विश्वास का ऋण ताउम्र गुरुजी के परिवार के साथ रह कर चुकाऊंगा.

खेल मंत्री बनने के बाद आपको इस विभाग में क्या कमियां नजर आयीं और उनको दूर करने के लिए क्या कर रहे हैं ?

हमने 40 खिलाड़ियों को नौकरी दी. चार जगहों पर एस्ट्रोटर्फ बना रहे हैं. अभी एक से पांच जून तक रोलर स्केटिंग भी कराने जा रहे हैं. सहाय योजना के तहत नक्सल प्रभावित जिलों में अलग से युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. पंचायत से राज्य स्तर तक मुख्यमंत्री आमंत्रण कप फुटबॉल कराया जा रहा है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. खिलाड़ियों को मिलनेवाली सम्मान राशि पांच करोड़ रुपये तक बढ़ायी गयी है. राज्य सरकार गांवों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों तक मदद पहुंचा रही है.

संताल में कांग्रेस के इरफान अंसारी जैसे नेता समय-समय पर आपका विरोध करते रहे हैं, इनसे कैसे निपटेंगे ?

इरफान मेरी पार्टी के हैं नहीं. उनको लगता है कि वह भी मंत्री बने. लेकिन, कांग्रेस कोटा में वह शामिल नहीं है. जातीय समीकरण में भी वह फिट नहीं हैं. अंसारी समाज से मैं और शेख समाज से आलमगीर साहब आते हैं. यह उनको अखर रहा है. वह बोलते फिरते हैं कि चप्पल घिस जाने पर भी वह विधायक ही हैं, और मैं बिना विधायक बने ही मंत्री बन गया. इसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं गुरुजी का. हेमंत बाबू का. अगर इरफान अपने आलाकमान को प्रभावित कर सकते हैं, तो वह भी मंत्री जरूर बनेंगे.

दूसरे राज्यों में खिलाड़ियों को सरकारी सुविधा समय पर मिल जाती है, लेकिन झारखंड के खिलाड़ियों को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, इस बारे में आपका क्या कहना है ?

सही बात है. सरकारी प्रक्रिया में समय लगता ही है. दिव्यांग क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीतने वाला खिलाड़ी सुजीत मुंडा भी हमारे पास आया था, लेकिन कई मामलों में सरकार भी मजबूर है. क्रिकेट सरकार के खेलों में शामिल नहीं है. क्रिकेट को सरकार फंड नहीं देती है. इधर, ज्यादातर बच्चे आज क्रिकेट ही खेल रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में फुटबॉल और हॉकी जैसे खेल केवल आदिवासी बच्चे ही खेल रहे हैं. सरकार दूसरे खेलों पर ध्यान दे रही है. एथलीट कैंप लगाया जा रहा है. प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निश्चित रूप से मदद की जा रही है.

झामुमो के अंदर आप जैसे युवा और नये नेताओं को कितनी तरजीह मिल रही है?

झामुमो में काम करनेवाले को तरजीह मिलती है. फोकसबाजी झामुमो में नहीं चलती है. पांच हजार वोटों से रांची विधानसभा चुनाव हारने वाली महुआ माजी को राज्यसभा में भेजने की बात किसी के दिमाग में नहीं आयी होगी. खुद मुझे ही मंत्री बनाये जाने का गुमान भी नहीं था. पता था कि हाजी साहब के बड़े कद का फायदा मुझे मिलेगा, लेकिन चुनाव के पहले मंत्री बनने का सोचा भी नहीं था.

संताल में भाजपा लगातार जनाधार बनाने में जुटी है आप इस चुनौती को किस रूप में देखते हैं?

संताल में भाजपा की काफी कम सीटें रही हैं. पिछले कुछ चुनावों में उनकी सीटें बढ़ी है. संताल झामुमो और कांग्रेस का गढ़ रहा है. अभी हमारी टक्कर भाजपा से है. लेकिन, भाजपा नेतृत्वकर्ता तय नहीं कर पा रही है. बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास के चक्कर में फंसी भाजपा का फायदा हमें मिल रहा है. हालांकि, भाजपा इडी और सीबीआइ के सहारे हमें धमकाने में लगी हुई है. लेकिन, हमारा जनाधार पूरे राज्य में बढ़ा है. अब तो भाजपा वाले भी कह रहे हैं कि सरकार किसी की भी रहे, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही रहे.

खिलाड़ियों का बीमा उनकी तुरंत मदद सहित अन्य सुविधाओं पर तुरंत एक्शन नहीं होता, इस पर आपका क्या कहना है?

यह एक प्रोसेस है. हम भी यह मान रहे हैं कि प्रोसेस में लेट होता है. इसे हम जल्दी करने की व्यवस्था कर रहे हैं. अगर किसी खिलाड़ी का चयन राष्ट्रीय टीम में होता है और उसे इंग्लैंड जाना है. उस खिलाड़ी का खर्च का डिटेल हमलोगों के पास आता है. इस पूरी प्रक्रिया में 10-15 दिन लगता है. हम लोगों ने बैठक कर इस प्रक्रिया को 2-4 दिन में पूरा करने की कोशिश की है. हाल ही में खिलाड़ियों को हमने अलग से व्यवस्था कर दौरे पर भेजा है. सरकारी काम में थोड़ा समय तो लगता है, लेकिन हम इस पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने में जुटे हैं.

राज्य में 100 से अधिक छोटे-बड़े स्टेडियम है, लेकिन उनका रखरखाव बेहतर तरीके से नहीं हो पाता है. क्या कारण है?

राज्य में प्रखंड लेवल और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर स्टेडियम बने हैं. डिस्ट्रिक्ट लेवल पर बने स्टेडियमों का रखरखाव हो जाता है, लेकिन प्रखंड लेवल वाले स्टेडियम सुनसान जगहों पर बने हैं. वहां के खिड़की-दरवाजे, पानी के पाइप, नल आदि की चोरी हो जा रही है. इन जगहों पर नाइट गार्ड रखने का भी प्रावधान नहीं है. ब्लॉक लेवल पर ही इन्हें हैंडल किया जाता है. मेरे अपने ब्लॉक में 85 लाख रुपये खर्च कर स्टेडियम बनवाया गया है और वहां के बीडीओ को इसकी देखभाल के लिए गार्ड लगाने को कहा है. पहली बार सभी जिलों में डीएसओ की नियुक्ति हुई है और उनको भी दो महीने की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया है. उनके पास भी साधन नहीं है. उन्हें गाड़ियां मुहैया करानी है. ब्लॉक में चौकीदार रखने की बात भी कही है.

झारखंड में कई अच्छे पर्यटन स्थल हैं, लेकिन वे विकसित नहीं हो पाये हैं. साथ ही इतने टूरिस्ट नहीं आये, जितने आने चाहिए थे. इसको किस रूप में देखते हैं ?

राज्य में जहां भी पर्यटन स्थल हैं, वहां वन हैं. यह बहुत बड़ा मसला है. यहां विभाग का ऑब्जेक्शन है. राजस्थान, बंगाल या बिहार को लीजिए, वहां के पर्यटन स्थलों पर वन विभाग की ओर से कोई रोक नहीं है. लेकिन झारखंड में कई पर्यटन स्थलों को वन विभाग क्लीयरेंस नहीं दे रहा है. सेंट्रल से भी आदेश आया है कि दो एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं देना है. आप नेतरहाट जाइए, वहां वन है, पतरातू, पारसनाथ, डिमना लेक, चांडिल लेक जाइए, वहां वन हैं. हमारे पूर्व राज्यपाल रमेश बैस को भी पर्यटन में बहुत रुचि थी. वह ज्यादातर सड़क मार्ग से ही यात्रा करते थे. झारखंड को ही लीजिए, यहां तो 80 फीसदी वन ही है. इसलिए इसमें हमलोग थोड़ा पीछे रह जाते हैं. इसके बावजूद पर्यटन क्षेत्र में हमलोग काम कर रहे हैं. नेतरहाट में 10-15 करोड़ का काम चल रहा है. जी-20 समिट भी हमने पतरातू में किया. पतरातू शानदार पर्यटन स्थल है. वहां काफी सुविधाएं भी हैं. पर्यटकों के लिए अब बस सेवा चालू करने की योजना है. कोई भी पर्यटक, जो बाहर से आयेंगे, वे इसे बुक कर इसकी सेवा ले सकेंगे. जिनकी बुकिंग होगी, उन्हें हम रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट से रिसीव करेंगे और बिरसा विहार ले जायेंगे और फिर उनको जहां जाना है, वहां ले जायेंगे. फॉल घूमना चाहेंगे, तो वहां ले जायेंगे. नेतरहाट में सनसेट और सनराइज देखना चाहें, तो वहां घुमाएंगे.

झारखंड की कला और संस्कृति आज भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं बना पायी ? ऐसा क्यों?

हमलोग लगे हुए हैं. अब यहां कई फिल्में भी बन रही है. यहां के वैसे लोग, जो कला क्षेत्र में हैं, वे इसमें इतना इंटरेस्टेड नहीं हैं. मेरे पास भी आते हैं, फिर सो जाते हैं. वहीं बाहरी कलाकार पैसा लेकर जाते हैं.

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