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जय गंगा मैया! जय श्मशान!! सर्द रात में चिता की आग से खुद को गरम कर रहे गंगासागर मेला पहुंचे श्रद्धालु

Updated at : 15 Jan 2026 7:13 AM (IST)
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जय गंगा मैया! जय श्मशान!! सर्द रात में चिता की आग से खुद को गरम कर रहे गंगासागर मेला पहुंचे श्रद्धालु
श्मशान में ठहरने के लिए मजबूर हैं गंगासागर आये श्रद्धालु. फोटो : अर्को

Gangasagar Mela: जय गंगा मैया! जय श्मशान!! गंगासागर की सर्द रात में चिता की आग से खुद को गरम कर रहे श्रद्धालु. यह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है. शर्मनाक स्थिति है दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन के लिए. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की हर सुविधा का ख्याल रखने का दावा किया था, लेकिन ये वो दृश्य हैं, जो प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे हैं.

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Gangasagar Mela| गंगासागर से शिव कुमार राउत : मकर संक्रांति पर गंगासागर में पुण्य स्नान के लिए देश के कोने-कोने से तीर्थयात्रियों का जत्था सागरद्वीप पहुंचा है. इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों से आये श्रद्धालुओं की है. उन्हें यह तक पता नहीं चल रहा कि मेले में ठहरने की व्यवस्था कहां है. नतीजतन श्मशान, सड़क और सागर के किनारा ही उन्होंने डेरा डाल लिया है.

खुले आसमान के नीचे श्मशान में सो रहे श्रद्धालु

हैरत की बात है कि एक ओर चिता की आग धधक रही है और उसी के बगल में जमीन पर तीर्थयात्रियों का समूह ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है. इनमें महिलाएं और बच्चे सभी हैं. सनातन हिंदू धर्म में श्मशान में महिलाओं का जाना वर्जित है, लेकिन विडंबना कि तीर्थस्थल पर महिलाएं श्मशान में रात गुजारने को विवश हैं. वह भी मोक्ष की नगरी में.

Gangasagar Mela: ठहरने की जगह तलाशते हुए पहुंच गये श्मशान

उत्तर बंगाल के रायगंज से पत्नी के साथ आये बुजुर्ग श्यामापद मंडल बताते हैं कि वे शाम को मेले में पहुंचे. काफी खोजबीन की, लेकिन ठहरने के लिए कोई जगह नहीं मिली. रास्ते में आग जलती दिखी, तो वहां चले आये. बाद में पता चला कि यह श्मशान है. यहां और लोगों को देखा, तो हिम्मत बांधकर वहीं रुक गये.

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रास्ता भटककर यहां आ गये सलीमपुर के बृजमोहन

राजस्थान के बीकानेर से आयीं आनंदी अम्मा कहती हैं कि सोने के लिए कहां जाना है, कोई कुछ बताने वाला नहीं है. जहां भीड़ दिखी, वहीं आ गये. एक और श्रद्धालु हैं, जो पटना से आये हैं. पटना के सलीमपुर से आये बृजमोहन ने कहा कि टेंट कहां लगे हैं, यह पूछते-पूछते रास्ता भटक गये. यहां पर लोगों को देखा, तो वह भी चादर बिछाकर लेट गये. मन में डर है. बस भोर होने का इंतजार है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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