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गंगासागर मेले के लिए बंगाल सरकार की खास तैयारी, डूबते को बचायेगा लाइफबॉय वाटर ड्रोन

Updated at : 07 Jan 2026 7:37 AM (IST)
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Lifebuoy water drone

Lifebuoy water drone

Makar Sankranti: अधिकारियों का मानना है कि अब तक लाइफगार्ड, बोट और डाइविंग टीम पर निर्भर रहे रेस्क्यू सिस्टम में इस लाइफबॉय वाटर ड्रोन के जुड़ने से बचाव का काम और तेज और असरदार होगा.

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Makar Sankranti: कोलकाता. गंगासागर मेला आठ जनवरी से शुरू होने जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मेला से पहले सोमवार को गंगासागर जाकर स्थिति का जायजा ले चुकी हैं. मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान के मौके पर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे. इतनी बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर साल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. हालांकि, इस साल उस चुनौती से निबटने के लिए एक नयी तकनीकी की मदद ली जायेगी. पहली बार, गंगासागर में प्रयोग के तौर पर ‘वॉटर रेस्क्यू ड्रोन’ तैनात किये गये हैं, जो डूबते हुए तीर्थयात्रियों को बचाने में अहम भूमिका निभायेगा. जिला प्रशासन का दावा है कि यह ड्रोन तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा कवच है, इसलिए इसे ””लाइफबॉय वाटर ड्रोन”” के नाम से जाना जाता है.

खास बिंदू

  • इस बार के मेला में जिला प्रशासन की विशेष पहल
  • सागरद्वीप में जिले के डीएम अरविंद कुमार मीणा ने दी जानकारी

ऐसे काम करेगा ड्रोन

यह खास ड्रोन पानी में डूब रहे शख्स की तुरंत पहचान सकता है और पल भर में उसके पास पहुंच सकता है. ड्रोन में इस्तेमाल अत्याधुनिक तकनीक की मदद से डूब रहे शख्स को पानी से बाहर निकालने की भी सुविधा है. अधिकारियों का मानना है कि अब तक लाइफगार्ड, बोट और डाइविंग टीम पर निर्भर रहे रेस्क्यू सिस्टम में इस लाइफबॉय वाटर ड्रोन के जुड़ने से बचाव का काम और तेज और असरदार होगा.

क्या कहना है जिलाधिकारी का

जिला प्रशासन का दावा है कि इस नयी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की पहल पर किया जा रहा है. दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी अरविंद मीणा ने कहा कि ड्रोन अभी ट्रायल रन स्टेज में है. एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर यह गंगासागर में दौरान तीर्थयात्रियों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा बन जायेगा. यह मॉडर्न टेक्नोलॉजी तेज लहरों और भीड़ के बीच भी डूब रहे शख्स की जान बचा सकेगा.

तीर्थयात्रियों के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

इसके साथ ही गंगासागर मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस वर्ष कड़े सुरक्षा इंतजाम और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. नदी और सड़क मार्ग से किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव तथा सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्नत जीपीएस प्रणाली लागू की गयी है. इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद ली जा रही है. इसके साथ ही घने कोहरे के दौरान भी बार्ज व ट्रॉलर का संचालन जारी रखने के लिए भी कई कदम उठाये गये है, ताकि किसी भी तरह से बार्ज या पोत दिशाभ्रमित न हों. इसके लिए गंगासागर के मेगा कंट्रोल रूम से पूरी निगरानी रखी जा रही है.

डीएम ने संभाली कंट्रोल रूम की कमान

जानकारी के अनुसार, जिले के जिलाधिकारी अरविंद कुमार मीणा स्वयं कंट्रोल रूम में मौजूद रहकर पूरी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं. बताया गया है कि इस बार लॉट नंबर आठ और नामखाना को मिलाकर कुल 21 जेटी तैयार की गयी हैं. श्रद्धालुओं की नदी आर-पार कराने के लिए 13 बार्ज, 45 पोत और 100 नावें चलायी जा रही हैं. लॉट नंबर आठ से मेला परिसर तक लगभग 1,200 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं. हवाई निगरानी के लिए 20 ड्रोन तैनात किये गये हैं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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