पेसा कानून से पंचायत सशक्त, होगी न्याय और शांति व्यवस्था

Published by : DINESH PANDEY Updated At : 09 Jan 2026 8:01 PM

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खलारी प्रखंड के 14 पंचायतों में पेसा कानून लागू होने की चर्चा जोरों पर है

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प्रतिनिधि, खलारी.

खलारी प्रखंड के 14 पंचायतों में पेसा कानून लागू होने की चर्चा जोरों पर है. मुखिया और ग्राम प्रधानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही है. उनका कहना है, चार साल से रुकी विकास की पहिया अब दौड़ने को तैयार है. बता दें कि पेसा कानून की उद्देश्य ग्रामसभाओं को मजबूत बनाना और आदिवासी समुदायों को जल, जंगल, जमीन पर अधिकार दिलाना है. इस कानून से ग्रामसभा सशक्त होगी, जिससे विकास योजनाओं, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र की निगरानी होगी. भूमि, जल, जंगल पर अधिकार से खनन, शराब बिक्री पर रोक होगी. जहां ग्रामसभा की अनुमति जरूरी होगी. न्याय व्यवस्था में भूमि विवाद, छोटे अपराध निबटारा और 2000 रुपये तक जुर्माना का प्रावधान होगा. पुलिस को एफआइआर की जानकारी सात दिनों में देनी होगी. वहीं बाल श्रम प्रतिबंध, प्रवासी मजदूरों की जानकारी ग्राम प्रधान को देनी होगी.

क्या कह रहे हैं मुखिया, प्रधान और विस्थापित नेता

तुमांग पंचायत के मुखिया संतोष कुमार महली ने कहा कि सरकार का एक ऐतिहासिक कदम है. पेसा कानून से पंचायतों को नई ताकत मिलेगी. पंचायत का विकास रुका नहीं, बढ़ेगा. जल, जंगल, जमीन पर अब हमारा हक सुरक्षित होगा.

विश्रामपुर पंचायत के मुखिया दीपमाला कुमारी ने कहा कि ग्रामसभा अब फैसले लेगी, भ्रष्टाचार रुकेगा. उन्होंने कहा कि इस कानून से विकास परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों के अनुरूप होंगी, जिससे समुदाय को उनका पूरा लाभ मिलेगा और असंतोष घटेगा.

लपरा पंचायत के मुखिया पुतुल देवी ने कहा कि महिलाओं, आदिवासियों को अधिकार मिलेगा और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि पेसा कानून से पंचायत में विवाद कम होंगे और समुदाय अपनी समस्याओं का समाधान खुद कर पायेगा, जिससे शांति स्थापित होगी.

चुरी दक्षिणी पंचायत के मुखिया मलका मुंडा ने कहा कि गांव की समस्याएं अब गांव में ही सुलझेंगी. उन्होंने कहा कि इससे पंचायती राज व्यवस्था बनेगी. पेसा कानून आदिवासियों के हित के लिए बेहतर है. ग्रामसभा सर्वोपरि होगी. ग्राम प्रधान के निर्णय को प्राथमिकता और कानूनी हक मिलेगा.

खलारी पंचायत के ग्राम प्रधान छोटू पाहन बताते हैं कि पेसा कानून से आदिवासी समाज को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार मिलेगा. अब हमारा गांव खुद फैसले लेगा, विकास की रफ्तार तेज होगी. जल, जंगल, जमीन पर हमारा हक सुरक्षित होगा, बिचौलियों का खेल खत्म होगा.

इस पूरे मामलों को लेकर विस्थापित नेता विनय खलखो ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है. यह कानून हमें अपने जल, जंगल, जमीन पर अधिकार दिलायेगा और हमें आत्मनिर्भर बनायेगा. सरकार को इसे सही तरीके से लागू करना चाहिए, ताकि आदिवासियों का विकास हो सके. हम इसका समर्थन करते हैं और इसके लिए संघर्ष करेंगे.

पेसा कानून से मुखिया और ग्राम प्रधानों में खुशी

09 खलारी01:-मुखिया संतोष कुमार महली.

09खलारी02:- मुखिया दीपमाला कुमारी.

09खलारी03:- मुखिया पुतुल देवी.

09खलारी04:- मुखिया मलका मुंडा.

09खलारी05:- ग्राम प्रधान छोटू पाहन.

09खलारी06:- विस्थापित नेता बिनय खलखो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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