Ranchi News : सुप्रीम कोर्ट ने गैंगवार के मुजरिम को दूसरे जेल में शिफ्ट करने का दिया आदेश
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Jan 2025 12:41 AM
सरकार को जेल मैनुअल बनाने और मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 के बिंदुओं को शामिल करने का निर्देश
रांची. सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग कोर्ट परिसर में हुए गैंगवार के मुजरिम विकास तिवारी को दूसरे जेल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है. साथ ही सरकार को जेल मैनुअल बनाने और उसमें मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016 के बिंदुओं को शामिल करने काे कहा है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश आर महादेवन की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया. न्यायालय ने सुनवाई पूरी करने के बाद दिसंबर 2024 में फैसला सुरक्षित रख लिया था. दो जून 2015 को हजारीबाग कोर्ट परिसर में हुए गैंगवार के दौरान सुशील श्रीवास्तव सहित तीन की हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में सत्र न्यायालय ने सुनवाई के बाद विकास तिवारी सहित पांच अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. न्यायालय के फैसले के बाद से सभी अभियुक्त हजारीबाग सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं. कारा महानिरीक्षक ने 17 मई 2023 को एक आदेश जारी कर विकास तिवारी को हजारीबाग सेंट्रल जेल से दुमका जेल स्थानांतरित करने का आदेश दिया. इसके लिए यह तर्क पेश किया गया कि उसके हजारीबाग जेल में रहने से गैंगवार होने का खतरा है. विकास तिवारी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को हजारीबाग से दुमका जेल स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी. इसके लिए यह तर्क दिया कि उसके खिलाफ रामगढ़, रांची में भी अन्य मामले दर्ज हैं. उसे दुमका जेल में स्थानांतरित करने से पहले सक्षम न्यायालयों की अनुमति आवश्यक है. लेकिन जेल प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं ली. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विकास तिवारी की याचिका को स्वीकार कर लिया. सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अगस्त 2023 में विकास तिवारी को दुमका जेल में स्थानांतरित करने के आदेश को रद्द कर दिया. हाइकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की. सरकार द्वारा दायर अपील की सुनवाई न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश आर महादेवन की पीठ में हुई. न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद दिसंबर 2024 में फैसला सुरक्षित रख लिया. न्यायालय ने 17 जनवरी 2025 को अपना फैसला सुनाते हुए विकास तिवारी को दूसरे जेल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी. साथ ही राज्य सरकार को 2016 के न्यू प्रिजन मॉडल के आधार पर जेल मैनुअल बनाने का आदेश दिया.
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