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बीरेंद्र राम पर कार्रवाई के लिए एसीबी ने मांगे निगरानी मंत्रिमंडल के मंतव्य

एसीबी ने निगरानी विभाग को भेजी रिपोर्ट

रांची. टेंडर कमीशन घोटाले में निलंबित चीफ इंजीनियर बीरेंद्र राम के बारे में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने निगरानी मंत्रिमंडल विभाग को उनसे जुड़े मामले में रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई के लिए दो बिंदुओं पर मंतव्य मांगा है. पहला बिंदु यह है कि बीरेंद्र राम के खिलाफ केस रिओपेन नहीं करने से संबंधित आदेश को चुनौती देने के लिए हाइकोर्ट में याचिका दायर करने की अनुमति दी जाये. वहीं दूसरे बिंदु में बीरेंद्र राम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की गयी है. उल्लेखनीय है कि एसीबी ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते जमशेदपुर से कनीय अभियंता सुरेश वर्मा को वर्ष 2019 में गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद जब सुरेश वर्मा के घर की तलाशी ली गयी, तब 63,870 रुपये नकद, जेवरात और बैंक खाता जब्त किये गये थे. इनके घर की ऊपरी मंजिल को बीरेंद्र राम के रिश्तेदार आलोक रंजन ने किराये पर ले रखा था. यहां एक कमरे में आलमारी से 2.67 करोड़ रुपये मिले थे. इस पूरे मामले में अनुसंधान के बाद एसीबी ने सुरेश वर्मा और आलोक रंजन के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट कर दिया था. अनुसंधान के दौरान एसीबी को जानकारी मिली थी कि पैसे बीरेंद्र राम के हैं. इसके बाद उनके खिलाफ पीई दर्ज करने की अनुमति मांगी गयी थी. लेकिन यह अनुमति एसीबी को नहीं मिली. बाद में जब सरकार ने एसीबी को बीरेंद्र राम के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति दी, तब तक सुरेश वर्मा से जुड़े केस का अनुसंधान बंद हो चुका था. इसलिए इस मामले में जमशेदपुर कोर्ट में एसीबी ने याचिका दायर कर बीरेंद्र राम की भूमिका पर जांच करने के लिए केस को रिओपेन करने की अनुमति मांगी थी. लेकिन यह अनुमति एसीबी को नहीं मिली. इस कारण बीरेंद्र राम की भूमिका पर एसीबी की जांच शुरू नहीं हो सकी थी.

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