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केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने शहद टैस्टिंग लैब का किया शिलान्यास, बोले पीएम का संकल्प शहद क्रांति विकसित करना

Updated at : 15 Mar 2024 5:33 PM (IST)
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केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने शहद टैस्टिंग लैब का किया शिलान्यास, बोले पीएम का संकल्प शहद क्रांति विकसित करना

सांसद संजय सेठ ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में पिछले दस सालों में दिशा एवं दशा बदलीं है. पीएम की सोच एवं संकल्प है कि मिठी क्रांति के सहारे देश के किसान स्वावलंबी बनें.

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कृषि एवं किसानों का देश होने के वाबजूद आज़ादी के बाद कृषि के क्षेत्र में विकास के लक्ष्य को अनदेखा किया गया परंतु दस साल में मोदी सरकार ने कृषि के क्षेत्र बेहतर उत्पादन के साथ में सुविधा एवं गारंटी दी . ऐ बातें केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहीं . वे नामकुम स्थित राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान में शहद परीक्षण प्रयोगशाला एवं मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र एवं बांस संवर्धन परियोजना के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. कहा हरित क्रांति से खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ा परंतु आत्मनिर्भरता नहीं आई. हमें कई दलहन दूसरे देशों से मंगाना पड़ता है. मिट्टी का छरण एवं पानी का स्तर नीचे गया. पीएम के नेतृत्व में मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखते हुए कम पानी में बेहतर उत्पादन के लिए काम किया जा रहा है. औषधिय गुणों से भरा शहद आयुर्वेदिक ताकत के साथ मिलें इसके लिए लैब काम करेगा. पीएम का संकल्प है कि दुनिया में हमारे उत्पाद गुणवत्ता के साथ उपलब्ध हो इसके लिए मिठी क्रांति को विकसित करना होगा. जागरूकता एवं तकनीकी ज्ञान के सहारे कम लागत में ज्यादा उत्पादन करना होंगा. किसानों को आदर्श एवं उन्नत बनाना है. हमें जल जंगल जमीन से जुड़कर आगे बढ़ते हुए झारखंड को देश में उदाहरण के तौर पर पेश करना है. श्री मुंडा ने कहा कि केंद्र की स्थापना से झारखंड के साथ बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा की शहद को अंतराष्ट्रीय पहचान मिलेगी. मधुमक्खी पालन के विकास में रांची, गुमला, सिमडेगा, सरायकेला, पश्चिम सिंहभूम की भूमिका रहेगी. दस सालों में केंद्र सरकार के प्रयास से शहद का उत्पादन दोगुना एवं निर्यात बढ़ा है.

आदिवासी समाज में कठिनाई हैं कि वे व्यवसायिक प्रवृत्ति के नहीं हैं

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि कृषि एवं मधुमक्खी पालन प्राकृतिक पर निर्भर है. आदिवासी समाज में कठिनाईयां शुरु से है वे व्यवसायिक प्रवृत्ति के नहीं हैं. मधुमक्खी पालन बड़ा व्यवसाय है. प्रवृत्ति बदलकर तकनीकी ज्ञान, उपकरण, सुविधा के साथ व्यवसाय के तौर पर करने की जरुरत है. फुल टाइम रोजगार है तो इसमें चैलेंज भी है.

पीएम की सोच मिठी क्रांति के सहारे किसानों को स्वावलंबी बनाना है

सांसद संजय सेठ ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में पिछले दस सालों में दिशा एवं दशा बदलीं है. पीएम की सोच एवं संकल्प है कि मिठी क्रांति के सहारे देश के किसान स्वावलंबी बनें. खादी बोर्ड के द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान की गई. जंगली हाथियों के प्रकोप को रोकने में मधुमक्खी पालन सबसे बड़ा हथियार है. संस्थान के निदेशक डॉ अभिजीत कर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के क्रिया कलापों को बताया. मौके पर बीएयू के कुलपति डॉ एस सी दूबे, कृषि जैवप्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डॉ सुजॉय रक्षित, डॉ देवबंधिया महापात्र, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन, ग्रामीण जिलाध्यक्ष सुरेंद्र महतो, सांसद प्रतिनिधि प्रमोद कुमार सिंह, मंडल अध्यक्ष अशोक मुंडा, जेलैंद्र कुमार,समीर राय, रिंकू सिंह, रितेश उरांव, बिरसा पाहन, गोपाल चौधरी,मनोज चौधरी, पिंटू सिंह आदि उपस्थित थे. इस कार्यक्रम में श्री संजय सेठ (सांसद राँची ), श्री अभिजीत कर (डायरेक्टर, NISA) सहित अन्य गणमान्य नागरिक व पूर्वी भारत के 6 केवीके के वैज्ञानिक, किसान बंधु/ भगिनी उपस्थित रहें.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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