झारखंड में मातृ मृत्यु अनुपात गुजरात और कर्नाटक से कम, भारत से पहले हमने हासिल किया एसडीजी लक्ष्य

Updated at : 30 Nov 2022 6:46 PM (IST)
विज्ञापन
झारखंड में मातृ मृत्यु अनुपात गुजरात और कर्नाटक से कम, भारत से पहले हमने हासिल किया एसडीजी लक्ष्य

Maternal Mortality Ratio: भारत इस लक्ष्य के इतने करीब इसलिए पहुंच पाया है, क्योंकि आठ राज्यों में बेहतरीन सुधार हुए हैं. इन 8 राज्यों में झारखंड भी शामिल है. झारखंड में मातृ मृत्यु दर 54 है, जो गुजरात के 57 और कर्नाटक के 69 से कम है.

विज्ञापन

मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio – MMR) के मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से तय किये गये सस्टनेबल डेवलपमेंट गोल (Sustainable Development Goal – SDG) के लक्ष्य को हासिल कर लिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया (Dr Mansukh Mandaviya) ने ट्वीट करके यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि देश लगातार इस लक्ष्य को हासिल करने की ओर बढ़ रहा है.

भारत में 130 से घटकर 97 हुआ मातृ मृत्यु दर

श्री मंडाविया ने कहा है कि वर्ष 2014-16 में मातृ मृत्यु अनुपात 130 था, जो वर्ष 2018-20 में घटकर 97 रह गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि हालांकि इस मामले में भारत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (National Health Policy -NHP) के तहत जो लक्ष्य रखा था, उसे हासिल कर लिया है. इस दौरान 8 राज्यों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है और उन्होंने सतत विकास लक्ष्य (SDG) को भी हासिल कर लिया है.

Also Read: जनजातीय बहुल गांवों में जल्द दिखेगा विकास, केंद्रीय मंत्री बोले- ट्राईफेड के माध्यम से लक्ष्य होगा पूरा
वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 करने का लक्ष्य

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसे देश की बड़ी उपलब्धि बताया है. बता दें कि रजिस्ट्रार जेनरल ऑफ इंडिया (Registrar General of India – RGI) की ओर से एक स्पेशल बुलेटिन जारी की गयी है, जिसमें 6 बिंदुओं पर फोकस किया गया है. बुलेटिन में कहा गया है कि भारत में अब एक लाख बच्चों का जन्म होता है, तो 97 माता की मौत हो जाती है. सरकार ने वर्ष 2030 तक इसे 70 करने का लक्ष्य रखा है.

झारखंड समेत 8 राज्यों ने किया शानदार प्रदर्शन

भारत इस लक्ष्य के इतने करीब इसलिए पहुंच पाया है, क्योंकि आठ राज्यों में बेहतरीन सुधार हुए हैं. इन 8 राज्यों में झारखंड भी शामिल है. झारखंड में मातृ मृत्यु दर 54 है, जो गुजरात के 57 और कर्नाटक के 69 से कम है. केरल में मातृ मृत्यु अनुपात 19 है, जबकि महाराष्ट्र में 33, तेलंगाना में 43, आंध्रप्रदेश में 45 और तमिलनाडु में 54 है. इसके पहले सिर्फ 6 राज्य ऐसे थे, जिन्होंने एसडीजी का लक्ष्य हासिल कर लिया.

Also Read: झारखंड के इन 2 जिलों में चिकन पॉक्स का अंदेशा, कई बच्चे पीड़ित, स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर गठित हुई टीम
सरकार की योजनाओं का हुआ फायदा, मातृ मृत्यु दर में आयी कमी

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission – NHM) के तहत भारत ने माता एवं नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया, ताकि मातृ मृत्यु अनुपात को कम किया जा सके. इसके लिए एनएचएम ने स्वास्थ्य सुविधाओं के आधारभूत ढांचा के निर्माण पर बड़े पैमाने पर निवेश किया. सरकार ने MMR टार्गेट को हासिल करने के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (Janani Shishu Suraksha Karyakram) और जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana) में सुधार किये गये, उन्हें अपग्रेड किया गया. साथ ही सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN) जैसी पहल की.

माता और नवजात की उचित देखभाल हुई सुनिश्चित

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan -PMSMA) के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान की जा रही है और उसके निदान में मदद दी जा रही है. इसकी वजह से मातृ मृत्यु दर को कम करने में काफी मदद मिली है. लक्ष्य (LaQshya) और दाई (Midwifery) जैसे अभियान की शुरुआत की गयी है, जिससे माता एवं शिशु की उचित देखभाल सुनिश्चित हो सकी है.

2030 से पहले हासिल कर लेंगे एसडीजी का लक्ष्य: डॉ मनसुख मंडाविया

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को उम्मीद है कि भारत में जिस तरह से स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार मिल रहा है. गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था और स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचा में विकास की मदद से मातृ मृत्यु दर को 70 तक लाने के लक्ष्य को भारत सरकार वर्ष 2030 से पहले ही हासिल कर लेगी.

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola