जोन्हा में गूंजा 'सियाराम' का जयघोष, धूमधाम से संपन्न हुआ राम-सीता विवाह का प्रसंग

Updated at : 26 Mar 2026 7:54 AM (IST)
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Jonha Ram Katha

राम-सीता के वेश में बालक-बालिकाएं और इनके पीछे स्टेज पर कथावाचक आचार्य धर्मराज शास्त्री. फोटो: प्रभात खबर

Jonha Ram Katha: झारखंड के रांची जिले के जोन्हा में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन राम-सीता विवाह प्रसंग श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. कथा में पुष्प वाटिका, शिव धनुष भंग और विवाह झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा और माहौल भक्तिमय बना रहा. राम कथा से संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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अनगड़ा से जितेन्द्र कुमार की रिपोर्ट

Jonha Ram Katha: झारखंड में रांची जिले के जोन्हा के श्रीराम मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन का माहौल बेहद खास और भक्तिमय रहा. इस दिन भगवान राम और माता सीता के विवाह प्रसंग का आयोजन पूरे विधि-विधान और उल्लास के साथ किया गया. कथास्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी और पूरा परिसर भक्ति रस में डूबा नजर आया. राम कथा के सातवें दिन जय सियाराम के उद्घोष के साथ ही सीता-रामजी का विवाह का प्रसंग संपन्न हो गया.

पुष्प वाटिका प्रसंग ने बांधा समा

कथा वाचन के दौरान व्यास आचार्य धर्मराज शास्त्री ने जनकपुर की पुष्प वाटिका का बेहद सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने बताया कि कैसे माता सीता अपनी सखियों के साथ गौरी पूजन के लिए बगीचे में पहुंचीं और उसी समय गुरु की आज्ञा से भगवान राम पुष्प लेने वहां आए. यही वह क्षण था जब दोनों की पहली भेंट हुई. इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और कथा स्थल पर एक अलग ही आध्यात्मिक वातावरण बन गया.

शिव धनुष भंग और विवाह प्रसंग पर गूंजे जयघोष

जैसे ही कथा में भगवान राम द्वारा शिव धनुष भंग करने और उसके बाद विवाह का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने तालियों और नारों के साथ इस पावन क्षण का स्वागत किया. इस दौरान राम-सीता विवाह की झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसमें सजे-धजे स्वरूपों ने सभी का मन मोह लिया.

मंगल गीतों पर झूमे श्रद्धालु

कार्यक्रम के दौरान महिलाएं और भक्तगण मंगल गीतों पर झूमते नजर आए. पारंपरिक वेशभूषा और भक्ति गीतों ने माहौल को और भी आनंदमय बना दिया. पूरा जोन्हा क्षेत्र ‘राममय’ हो गया और हर ओर भक्ति और उल्लास का वातावरण देखने को मिला.

धर्म और शक्ति के मिलन का प्रतीक राम विवाह

आचार्य धर्मराज शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि राम-सीता का विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म और शक्ति के संतुलन का प्रतीक है. यह विवाह हमें आदर्श जीवन, मर्यादा और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है.

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रामकथा के आयोजन में सबका सहयोग

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष बलराम साहू, संयोजक संतोष साहू, सीताराम साहू, डॉ अमर कुमार चौधरी सहित कई स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा. सभी के सामूहिक प्रयास से यह धार्मिक आयोजन यादगार बन गया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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