केंद्र और राज्य की खींचतान में फंसे झारखंड के 2.5 लाख आदिवासी विद्यार्थी, साल भर से छात्रवृत्ति बंद
प्रतीकात्मक फोटो.
ST Scholarship: झारखंड में केंद्र पर 364 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि बकाया होने से करीब ढाई लाख आदिवासी विद्यार्थियों की प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रभावित है. राज्य सरकार ने केंद्र से लंबित राशि जल्द जारी करने की मांग की है. केंद्र और राज्य के दावों के बीच विद्यार्थी परेशान हैं.
रांची से सुनील कुमार झा की रिपोर्ट
ST Scholarship: झारखंड में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का लगभग 364 करोड़ रुपये केंद्र पर बकाया है. इस कारण विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की पूरी राशि नहीं मिल पायी है. इसमें प्री और पोस्ट दोनों छात्रवृत्ति की राशि शामिल है. यह राशि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले की है. वर्ष 2025-26 की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का 28 करोड़ व पोस्ट मैट्रिक का लगभग 336 करोड़ रुपये बकाया है. इस बकाये राशि की मांग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने केंद्र से राशि की मांग की है.
विभागीय मंत्री ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से मांगी रािश
विभागीय मंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव से मिलकर राशि की मांग की है. पिछले वर्ष के बकाया के साथ-साथ चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी केंद्रांश की राशि देने की मांग राज्य ने की है. केंद्र और राज्य सरकार की इस खींचतान में राज्य के ढाई लाख आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति बंद है.
राज्य ने अपने हिस्से की छात्रवृत्ति बांटी
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रांश की राशि नहीं मिलने पर अपने हिस्से की छात्रवृत्ति राशि का वितरण किया था. कल्याण विभाग ने राज्यांश से 40 फीसदी राशि की निकासी कर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी थी.
राज्य का छात्रवृत्ति को लेकर दावा
- प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: झारखंड सरकार ने कल्याण विभाग के अनुसार, वर्ष 2025-26 की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्रांश के रूप में पूर्व के वर्षों का एरियर मिलाकर लगभग 66 करोड़ रुपये की मांग 14 जुलाई 2025 को की थी. इसके बाद केंद्र सरकार के दिसंबर 2025 के पत्र के आलोक में संशोधित राशि 28 करोड़ रुपये की मांग की गयी.
- पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति: कल्याण विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रांश के रूप में लगभग 336 करोड़ रुपये की मांग 14 जुलाई 2025 को केंद्र सरकार से की गयी थी. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राशि नहीं दी गयी. फिर राज्य द्वारा 20 मई 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 138 करोड़ रुपये की मांग केंद्र से की गयी है.
छात्रवृत्ति योजना में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी
- एसटी: 25% राज्य और 75% केंद्र
- एससी: 40% राज्य और 60% केंद्र
- बीसी: 40% राज्य और 60 % केंद्र
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का गणित
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में कक्षा एक से आठ तक की शत-प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती है.
- कक्षा एक से पांच: 1500 रुपये
- कक्षा छह से आठ: 2500 रुपये
- कक्षा नौ से 10: 4500 रुपये
नोट : राशि एक साल में दी जाती है
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का गणित
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति वैसे विद्यार्थी को मिलती है, जिसके परिवार की वार्षिक आय ढाई लाख तक है. इसमें छात्रवृत्ति को लेकर चार ग्रुप बनाये गये हैं. इसमें ग्रुप एक में तीन वर्ग हैं. इसमें छात्रावास में रहने वाले डे और स्कॉलर के लिए अलग-अलग राशि तय की गई है.
ग्रुप एक में किसे कितनी राशि
- ग्रुप एक ए में डे को 1,00000 रुपये और स्कॉलर को 90000 रुपये
- ग्रुप एक बी में डे को 90000 रुपये और स्कॉलर को 85000 रुपये
- ग्रुप एक सी में डे को 85000 रुपये और स्कॉलर को 75000 रुपये
ग्रुप दो, तीन और चार में किसे कितनी राशि
- ग्रुप दो ए में छात्रावास में रहने वाले को 75000 रुपये और डे स्कॉलर 70000 रुपये
- ग्रुप दो बी में छात्रावास में रहने वाले को 70000 और डे स्कॉलर को 65000 रुपये
- ग्रुप दो सी में छात्रावास में रहने वाले को 65000 और डे स्कॉलर को 60000 रुपये
- ग्रुप तीन में छात्रावास में रहने वाले को 45000 रुपये और डे स्कॉलर को 40000 रुपये
- गुप चार में छात्रावास में रहने वाले को 35000 रुपये और डे स्कॉलर को 30000 रुपये
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से सीधी बात
- सवाल: राज्य के विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति क्यों नहीं मिलती?
- जवाब: छात्रवृत्ति योजना केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संचालित होती है. दोनों राशि मिलने के बाद छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है, इस कारण विलंब होता है.
- सवाल: कहा जा रहा है कि राज्य सरकार समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देता, इसलिए केंद्र से राशि नहीं मिलती.
- जवाब: नहीं ऐसा नहीं है. राज्य की ओर से केंद्र को सभी आवश्यक कगाजात व जानकारी दी जाती है. पिछले वित्तीय वर्ष की पूरी राशि अब तक नहीं मिली है.
- सवाल: केंद्रीय मंत्री की ओर से राशि आवंटन को लेकर क्या कहा गया?
- जवाब: केंद्रीय मंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, उन्होंने विभाग के सचिव को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द राशि देने को कहा है.
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आदिवासी मामलों के पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा से सवाल
- सवाल: राज्य का कहना है कि केंद्र राशि रोक रही है. ऐसा क्यों हो रहा है?
- अर्जुन मुंडा: राज्य सरकार की ओर से कुछ परेशानी होगी. छात्रों के खाते में पैसा ऑनलाइन जाता है. सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है. राज्य सरकार छात्रों का आंकड़ा भेजती है, तो वह आंकड़े मैच किये जाते हैं. इसके बाद पैसा छात्रों को मिलता है. मेरे कार्यकाल में पैसा नियमित मिल रहा था. मुझे नहीं लगता है कि मामला कहीं केंद्रीय स्तर पर फंस रहा है. राज्य सरकार को अपने स्तर पर प्रक्रियाओं और डाटा को देखना चाहिए.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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