रेलवे टीई-टीसी कर्मियों की वरिष्ठता पर हाइकोर्ट का फैसला, कैट का आदेश रद्द

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झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.

झारखंड हाइकोर्ट ने रेलवे के टिकट परीक्षक (टीई-टीसी) कर्मियों की वरिष्ठता से जुड़े मामले में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने मामले को दोबारा विचार के लिए कैट के पास भेज दिया है, जिससे कर्मचारियों की वरिष्ठता पर नया मोड़ आ गया है.

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Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने रेलवे के टिकट परीक्षक (टीई-टीसी) कर्मियों की वरिष्ठता से जुड़े मामले में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने मामले को दोबारा विचार के लिए कैट के पास भेज दिया. कोर्ट ने कहा कि रेलवे के महाप्रबंधक, हाजीपुर की ओर से आठ फरवरी 2023 को जारी स्पष्टीकरण में स्पष्ट किया गया था कि 22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से दूसरे डिवीजन में स्थानांतरित होकर आनेवाले कर्मचारियों की वरिष्ठता यूनिफाइड या मर्ज्ड कैडर में निर्धारित की जायेगी.

कर्मचारी अपनी इच्छा से लिये थे इंटर डिवीजन ट्रांसफर

अदालत ने पाया कि संबंधित कर्मचारी 22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से इंटर डिवीजन ट्रांसफर लेकर धनबाद डिवीजन में आये थे. ऐसे में उन्हें संयुक्त कैडर की वरिष्ठता सूची में शामिल करना रेलवे के आठ फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण के अनुरूप था. इसलिए धनबाद डिवीजन की ओर से नौ फरवरी 2023 को जारी संयुक्त वरिष्ठता सूची को रद्द करने का कैट का फैसला उचित नहीं था.

कैट के 17 दिसंबर 2025 के आदेश को दी गयी थी चुनौती

रेलवे की ओर से दायर याचिका में कैट की रांची सर्किट बेंच के 17 दिसंबर 2025 को पारित आदेश को चुनौती दी गयी थी. कैट ने अपने आदेश में धनबाद डिवीजन की नौ फरवरी 2023 को जारी संयुक्त वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया था. कैट ने संबंधित कर्मचारियों के लिए अलग वरिष्ठता सूची जारी करने का निर्देश दिया था. इसके खिलाफ रेलवे ने हाइकोर्ट का रुख किया. मामले की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट ने कैट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया. अदालत ने रेलवे के स्पष्टीकरण और संबंधित कर्मचारियों के ट्रांसफर की परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना. कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संयुक्त कैडर में उनकी वरिष्ठता निर्धारित करना रेलवे के नियमों के अनुरूप था.

2018 में तीन श्रेणियों को किया गया था एकीकृत

मामले की पृष्ठभूमि रेलवे बोर्ड के 22 फरवरी 2018 के निर्णय से जुड़ी है. रेलवे बोर्ड ने वाणिज्यिक विभाग की तीन श्रेणियों कॉमर्शियल क्लर्क, टिकट चेकिंग तथा कॉमर्शियल और टिकटिंग स्टाफ को चरणबद्ध तरीके से एकीकृत करने का निर्णय लिया था. इस प्रक्रिया के तहत कॉमर्शियल और टिकटिंग स्टाफ का संयुक्त कैडर तैयार किया जाना था. इसके बाद पांच अप्रैल 2019 को रेलवे की ओर से इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया गया. स्पष्टीकरण में कहा गया था कि 22 फरवरी 2018 तक कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता अलग-अलग रखी जायेगी. वहीं, भविष्य में सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त होनेवाले कर्मचारियों के लिए संयुक्त वरिष्ठता लागू होगी.

2022 में स्वेच्छा से धनबाद आये थे कर्मचारी

मामले में शामिल कर्मचारी 22 फरवरी 2018 से पहले रेलवे के अलग-अलग डिवीजनों में टिकट परीक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे. बाद में वर्ष 2022 में उन्होंने अपनी इच्छा से इंटर डिवीजन ट्रांसफर लेकर धनबाद डिवीजन में योगदान दिया. रेलवे ने इन कर्मचारियों को सीधी भर्ती कोटे की रिक्तियों के विरुद्ध स्थानांतरित माना. इसी आधार पर उन्हें कॉमर्शियल और टिकटिंग स्टाफ के संयुक्त कैडर की वरिष्ठता सूची में शामिल किया गया. धनबाद डिवीजन की ओर से नौ फरवरी 2023 को संयुक्त वरिष्ठता सूची जारी की गयी. इस सूची में संबंधित कर्मचारियों की वरिष्ठता संयुक्त कैडर में निर्धारित की गयी थी. इससे असंतुष्ट कर्मचारियों ने कैट में याचिका दायर कर दी.

कैट ने वरिष्ठता सूची कर दी थी रद्द

मामले की सुनवाई के बाद कैट की रांची सर्किट बेंच ने 17 दिसंबर 2025 को धनबाद डिवीजन की वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया था. ट्रिब्यूनल ने संबंधित कर्मचारियों के लिए अलग वरिष्ठता सूची तैयार करने का निर्देश दिया था. कैट के इस आदेश का आधार यह था कि संबंधित कर्मचारी 22 फरवरी 2018 से पहले रेलवे में नियुक्त हुए थे और उनकी मूल नियुक्ति टिकट परीक्षक के रूप में हुई थी. इसलिए उनकी वरिष्ठता को अलग रखने का निर्देश दिया गया था. रेलवे ने कैट के आदेश को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की. रेलवे का तर्क था कि कर्मचारियों ने बाद में अपनी इच्छा से इंटर डिवीजन ट्रांसफर लिया था और उन्हें सीधी भर्ती कोटे की रिक्तियों के विरुद्ध धनबाद भेजा गया था.

आठ फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण को माना अहम

हाइकोर्ट ने मामले में रेलवे के महाप्रबंधक, हाजीपुर की ओर से आठ फरवरी 2023 को जारी स्पष्टीकरण को महत्वपूर्ण माना. इस स्पष्टीकरण में 22 फरवरी 2018 के बाद अपनी इच्छा से दूसरे डिवीजन में स्थानांतरित होकर आनेवाले कर्मचारियों की वरिष्ठता संयुक्त कैडर में निर्धारित करने की बात स्पष्ट की गयी थी. चूंकि संबंधित कर्मचारी वर्ष 2022 में स्वेच्छा से धनबाद डिवीजन में स्थानांतरित होकर आये थे, इसलिए अदालत ने माना कि उन्हें संयुक्त कैडर में रखना रेलवे के स्पष्टीकरण के अनुरूप था.

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कैट को नए सिरे से मामले पर विचार करना होगा

हाइकोर्ट ने कैट के पूर्व आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है. साथ ही रेलवे की ओर से दायर याचिका का निष्पादन कर दिया गया. इस फैसले से फिलहाल संबंधित टीई/टीसी कर्मियों की वरिष्ठता को लेकर कैट के पुराने आदेश पर रोक लग गयी है. अब मामले में कैट को हाइकोर्ट के फैसले और रेलवे के आठ फरवरी 2023 के स्पष्टीकरण के आलोक में दोबारा विचार करना होगा. रेलवे कर्मचारियों की वरिष्ठता जैसी चीज, जो कागज पर कुछ पंक्तियों की लगती है, नौकरी में पदोन्नति और सेवा लाभ तक पहुंचते-पहुंचते काफी बड़ी लड़ाई बन जाती है. यहां भी मामला आखिरकार नियमों की तारीखों और ट्रांसफर की प्रकृति पर आकर टिक गया है.

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