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PHOTO: बूढ़ा पहाड़ पर दिखने लगी विकास की किरणें, दूधिया रोशनी में नहाये जंगल, पहाड़ और गांव

Updated at : 06 Feb 2023 3:36 PM (IST)
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PHOTO: बूढ़ा पहाड़ पर दिखने लगी विकास की किरणें, दूधिया रोशनी में नहाये जंगल, पहाड़ और गांव

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 27 जनवरी 2023 को बूढ़ा पहाड़ पर पहुंचे, तो उन्होंने 100 करोड़ रुपये के बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्लान (बीपीडीपी) का ऐलान किया. बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हुआ. गांवों में बिजली पहुंची. जंगल, पहाड़ और गांव रोशन हो गये.

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झारखंड के लातेहार और गढ़वा जिला से लेकर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला तक फैला बूढ़ा पहाड़ हाल के दिनों तक नक्सलियों का गढ़ था. इस पहाड़ पर जाना सुरक्षाकर्मियों के लिए मौत को दावत देने के समान था. अब स्थिति बदल गयी है. केंद्रीय बलों की मदद से इस बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त करा लिया गया. बूढ़ा पहाड़ और उसके आसपास स्थित गांवों में विकास की किरणें पहुंचने लगी हैं.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 27 जनवरी 2023 को बूढ़ा पहाड़ पर पहुंचे, तो उन्होंने 100 करोड़ रुपये के बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्लान (बीपीडीपी) का ऐलान किया. बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हुआ. गांवों में बिजली पहुंची. जंगल, पहाड़ और गांव रोशन हो गये. आजादी के 75 साल बाद जब गांवों में रोशनी पहुंची, तो लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था.

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झारखंड पुलिस और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के प्रयास से गांवों में बिजली पहुंची है. 4 फरवरी को पहली बार बूढ़ा पहाड़ के हेसातू कैंप के पास लगे नये ट्रांसफॉर्मर को चार्ज करके उससे गांवों में बिजली की सप्लाई की गयी. ग्रामीणों के घर में बल्ब जले, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा.

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जंगल में स्थित गांवों की रातें रोशन हुईं, तो लोगों में बिजली का कनेक्शन लेने की इच्छा भी जगी है. उत्साहित ग्रामीणों ने अब बिजली का कनेक्शन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ज्ञात हो कि आजादी के बाद कोई सरकारी पदाधिकारी या नेता इस क्षेत्र में कभी नहीं पहुंचा था. केंद्रीय बलों की मदद से बूढ़ा पहाड़ पर ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ चलाया गया.

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नक्सलियों को बूढ़ा पहाड़ से खदेड़ने के लिए चलाये गये ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ के दौरान कई बार वामपंथी उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई. इसमें कई जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी. काफी संख्या में नक्सलियों की भी मौतें हुईं. सुरक्षा बलों के ऑपरेशन से डरकर कई नक्सलियों ने हथियार के साथ पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया.

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आखिरकार बूढ़ा पहाड़ नक्सलियों से मुक्त हुआ. मुख्यमंत्री सूबे के बड़े अधिकारियों और देश के पत्रकारों के साथ वहां पहुंचे. ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया. उनके दुख-दर्द सुने और बूढ़ा पहाड़ के विकास की रूपरेखा तय की. इसके साथ ही यहां के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना भी शुरू हो गया.

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नक्सलियों से मुक्त हो चुके बूढ़ा पहाड़ पर फिर से वामपंथी उग्रवाद न पनप सके, लोगों की जान-माल की सुरक्षा हो सके, इसके लिए जगह-जगह सुरक्षा कैंप बनाये गये हैं. जवानों को भी सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सरकार कर रही है. कैंप में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के साथ-साथ जेनरेटर और सोलर लाइट के भी प्रबंध किये जा रहे हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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