1. home Home
  2. state
  3. jharkhand
  4. ranchi
  5. jharkhand high court question to the government omicron go away with an outcry then the genome sequencing machine to be come srn

ओमिक्रॉन हाहाकार मचा कर चला जायेगा तब जिनोम मशीन आयेगी क्या? झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को लगायी फटकार

झारख‍ंड हाईकोर्ट ने रिम्स में इलाज की लचर व्यवस्था पर सवाल पूछा है. उन्होंने कहा है कि ओमिक्रोन से बचाव के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं. उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि राज्य में जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन क्या तब आयेगी, जब ओमिक्रोन हाहाकार मचा कर चला जायेगा?

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा ओमिक्रोन से बचाव की रणनीति
झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा ओमिक्रोन से बचाव की रणनीति
prabhat khabar

रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने रिम्स में इलाज की लचर व्यवस्था व कोरोना संक्रमण को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की. चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार से जानना चाहा कि अोमिक्रोन से बचाव के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं. बचाव की क्या रणनीति है. तैयारियों को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर खंडपीठ ने पूछा कि झारखंड में जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन क्या तब आयेगी, जब अोमिक्रोन हाहाकार मचा कर चला जायेगा?

कोर्ट ने कहा, कोरोना संक्रमित का सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए हेलीकॉप्टर से भुवनेश्वर भेजा जाता है. ऐसे में जांच रिपोर्ट आने में विलंब होती है. कोर्ट ने सरकार को पूर्व में भी जिनोम सीक्वेंसिंग रिम्स में लगाने का निर्देश दिया था. उसका क्या हुआ. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने पक्ष रखा. वहीं याचिका पर सुनवाई के दौरान रिम्स निदेशक के वर्चुअल उपस्थित नहीं रहने पर खंडपीठ ने नाराजगी जतायी.

खंडपीठ ने निदेशक को कड़ी हिदायत दी तथा 13 दिसंबर को दिन के 10.30 बजे सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया. इससे पूर्व शपथ पत्र दायर कर माफी मांगी गयी. उल्लेखनीय है कि रिम्स में इलाज की दयनीय स्थिति को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.

दो जीनोम मशीन खरीदने की चल रही है प्रक्रिया

कोरोना वायरस के नये वेरिएंट की पहचान के लिए राज्य में इस समय मशीन नहीं है. मशीन की खरीदारी की प्रक्रिया चल रही है. प्रक्रिया में लगभग एक महीने का समय लग सकता है. स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जीनाेम सीक्वेंसिंग मशीन काफी महंगी है और सीमित कंपनियां इसे बनाती हैं. दो जीनोम मशीन की खरीदारी की प्रक्रिया चल रही है. हमारा प्रयास है कि एक महीने के अंदर इस मशीन को मंगा लिया जाये. एक मशीन रिम्स के लिए और दूसरी मशीन एमजीएम जमशेदपुर मेडिकल कॉलेज के लिए आनी है.

Posted By : Sameer Oraon

Share Via :
Published Date

संबंधित खबरें

अन्य खबरें