Jharkhand High Court: कोयला या अन्य खनिजों की ट्रांसपोर्टिंग से नहीं हो प्रदूषण, बरतें सख्ती, हाईकोर्ट ने दिया आदेश
Published by : Guru Swarup Mishra Updated At : 11 Aug 2025 7:41 PM
Jharkhand High Court
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि राज्य के सभी जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) यह सुनिश्चित करें कि माइनिंग तथा कोयले या खनिजों की ट्रांसपोर्टिंग से किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं हो. कोयला या खनिज ढोनेवाले ट्रकों को तिरपाल से ढंकना अनिवार्य किया गया है, ताकि धूल नहीं फैले. इसे सुनिश्चित कराएं. डीजीपी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब दायर करने का निर्देश दिया गया है.
Jharkhand High Court: रांची, राणा प्रताप-झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के बसंतपुर कोल वाशरी से हो रहे प्रदूषण को रोकने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पक्ष सुना. पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने पर्यावरण प्रदूषण, सड़क की खराब स्थिति और ध्वनि प्रदूषण के मामलों पर दो सप्ताह का समय देते हुए राज्य सरकार, डीजीपी और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब दायर करने का निर्देश दिया.
निर्देशों का सख्ती का कराएं पालन-खंडपीठ
झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि इस दौरान राज्य के सभी जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) यह सुनिश्चित करें कि माइनिंग तथा कोयले या खनिजों की ट्रांसपोर्टिंग से किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं हो. कोयला या खनिज ढोनेवाले ट्रकों को तिरपाल से ढंकना अनिवार्य किया गया है, ताकि धूल ना फैले, इसे सुनिश्चित किया जाये. राज्य के डीजीपी व झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निर्देशों का सख्ती से पालन कराएं. ट्रकों में प्रेशर हॉर्न, मल्टी टोन हॉर्न, अनधिकृत लाइट्स (विशेषकर लाल व नीली बत्ती), झंडे लगा कर चलनेवाले वाहनों या अन्य किसी भी प्रकार के शोर करनेवाले उपकरणों आदि पर कार्रवाई सुनिश्चित करें.
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वाहनों पर राजनीतिक या धार्मिक झंडों का प्रदर्शन है प्रतिबंधित
झारखंड में किसी भी वाहन पर बिना अनुमति के राजनीतिक या धार्मिक झंडों का प्रदर्शन प्रतिबंधित है. इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली-1989 के अध्याय-पांच का पूर्ण अनुपालन कराया जाना सुनिश्चित किया जाए. प्रतिवादियों द्वारा दायर किये जानेवाले जवाब में की गयी कार्रवाई की भी जानकारी देने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने एक सितंबर की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण ने पैरवी की. वहीं प्रतिवादियों की ओर से जवाब दायर करने के लिए समय देने का आग्रह किया गया.
इन्होंने दायर की है जनहित याचिका
खुशीलाल महतो व अन्य की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है. याचिका में कहा गया है कि कोयला लाने-ले जाने का काम होता है. इस दौरान कोयला का डस्ट भी उड़ता है. कोयला से प्रदूषण हो रहा है. आसपास में बड़ी आबादी रहती है. लोग प्रदूषण की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं. पेयजल भी प्रदूषित हो रहा है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने रामगड़ डालसा सचिव को विभिन्न बिंदुओं पर स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. डालसा सचिव ने रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि कोल वाशरी से लगभग 400 मीटर पहले की सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है, जिससे ग्रामीणों को धूल और भारी वाहनों के शोर से परेशानी हो रही है. इस पर पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सीसीएल को निर्देश दिया था कि वह गांव तक सड़क की मरम्मत कराए और मानसून के बाद सड़क का कालीकरण करें.
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By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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