झारखंड हाईकोर्ट का चला 'हंटर': मुख्य सचिव को होना पड़ा पेश, अब एक महीने में शुरू होगा सूचना आयोग का काम!
Published by : Sameer Oraon Updated At : 29 Jan 2026 10:10 PM
झारखंड हाइकोर्ट फाइल फोटो
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के लंबे समय से निष्क्रिय रहने पर सख्त रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव को कोर्ट में पेश होना पड़ा. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एक महीने के भीतर सूचना आयोग को कार्यशील कर दिया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी.
Jharkhand High Court, रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने एक अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयोग के लंबे समय से गैर-कार्यशील रहने के मामले में सुनवाई की. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव व कार्मिक सचिव सशरीर उपस्थित हुए. खंडपीठ ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि राज्य सूचना आयोग को कब तक कार्यशील किया जायेगा, ताकि वहां मामलों की सुनवाई शुरू हो सके. इस पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि राज्य सूचना आयोग को राज्य सरकार चार सप्ताह (एक माह) में कार्यशील बनायेगी. उन्होंने खंडपीठ से समय देने का आग्रह किया, जिसे खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया.
27 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 27 फरवरी की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी बीरेंद्र सिंह ने अपील याचिका दायर की है. पिछली सुनवाई के दाैरान कोर्ट ने मुख्य सचिव व कार्मिक सचिव को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि सूचना का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है. यह भी कहा कि आयोग के निष्क्रिय रहने के कारण नागरिकों को वैधानिक मंच नहीं मिल पा रहा है और इससे हाइकोर्ट पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है.
Also Read: रेडियंट झारखंड 2.0 का शुभारंभ, एक ही मंच पर शिक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक की झलक
क्या है मामला
प्रार्थी बिरेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत जानकारी मांगी थी. निर्धारित 30 दिनों की अवधि में सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की, लेकिन इसके बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी. दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष दायर की गयी, लेकिन आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्तों की नियुक्ति न होने के कारण वह लंबे समय से निष्क्रिय है. इस कारण प्रार्थी ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट दी थी, जिसके खिलाफ यह अपील दायर की गयी.
Also Read: बाबा ग्रुप से जुड़े 45 ठिकानों पर IT रेड, करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जब्त
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










