झारखंड सरकार के एक हजार करोड़ रुपये एडवांस पैसे का नहीं मिल रहा हिसाब, डीडीओ पर कार्रवाई की अनुशंसा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Jul 2023 7:15 AM
महालेखाकार बार-बार इस पैसे का हिसाब मांग रहा है. इस कारण कमेटी में उपमहालेखाकार सहित राज्य के राजस्व पर्षद के सदस्य सचिव, वित्त सचिव, कृषि सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को भी रखा गया है
रांची: झारखंड सरकार के कई विभाग एडवांस लेकर पैसे का हिसाब नहीं दे रहे हैं. हिसाब नहीं देनेवाले निकासी व व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) पर राज्य सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी ने कार्रवाई की अनुशंसा की है. राज्य में करीब एक हजार करोड़ रुपये एडवांस दिये गये पैसे का हिसाब नहीं मिल रहा है. बार-बार पूछने के बाद भी विभाग इन पैसों का डीसी (डिटेल कंटीजेंट) बिल जमा नहीं कर रहा है.
महालेखाकार बार-बार इस पैसे का हिसाब मांग रहा है. इस कारण कमेटी में उपमहालेखाकार सहित राज्य के राजस्व पर्षद के सदस्य सचिव, वित्त सचिव, कृषि सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को भी रखा गया है. कमेटी ने वर्ष 2021-22 से पूर्व निकाले गये एसी (एडवांस कंटीजेंट) बिल को जमा करने की अनुशंसा कमेटी ने की है.
कहा है कि इससे तत्काल समुचित मद में जमा करने का निर्देश विभागों को दिया जाये. जो खर्च हो चुके हैं, उसका डीसी बिल का समायोजन किया जाये. कमेटी ने अनुशंसा की है कि वित्त विभाग इसकी साप्ताहिक समीक्षा करें. जुलाई तक इसे हर हाल में पूरा करा लें. जो विभाग या अधिकारी इसमें लापरवाही बरत रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाये.
कृषि विभाग में यांत्रिकरण, तालाब खुदाई सहित कई स्कीम का पैसा वर्षों से पीएल में पड़ा हुआ है. कई बार तो राज्यादेश में ही स्कीम का पैसा पीएल में डालने का प्रावधान किया गया है. इसके लिए कृषि विभाग की एजेंसी जेएमटीटीसी और जैसमिन में पैसा रखा जाता है. कमेटी ने अनुशंसा की है कि पीएल या एडवांस के रूप में जमा ऐसी राशि तत्काल वापस करायी जाये, जिसके विरुद्ध अद्यतन योजना स्वीकृत नहीं है. ऐसी योजना जो चालू नहीं हुई है, वह राशि भी वापस करा ली जाये. पीएल खातों के प्रचलित व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास हो.
कमेटी ने एक साल से ज्यादा डीसी बिल लंबित रखनेवाले अधिकारियों के वार्षिक चारित्रिक रिपोर्ट में 15 अगस्त 2023 के बाद निगेटिव रिपोर्ट देने की अनुशंसा की है. कहा है किि यह अनुशंसा वित्त विभाग के पोर्टल पर डालें. कार्यालय प्रधान, नियुक्त पदाधिकारी, कैडर कंट्रोलिंग पदाधिकारी पर कार्रवाई करें.
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