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राज्य सरकार को भूमि सर्वे के काम में तेजी लाने का दिया निर्देश

Updated at : 17 Jun 2025 8:29 PM (IST)
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राज्य सरकार को भूमि सर्वे के काम में तेजी लाने का दिया निर्देश

मामला झारखंड में 1974-75 से चल रहे भूमि सर्वे को पूरा करने का.

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हाइकोर्ट को बताया : बिहार व अन्य राज्यों से भूमि सर्वे की नयी तकनीक सीख रही है झारखंड सरकार

-मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी.

-मामला झारखंड में 1974-75 से चल रहे भूमि सर्वे को पूरा करने का.

रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में वर्ष 1974-75 में शुरू किये गये भूमि सर्वे को पूरा करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष सुना. खंडपीठ ने राज्य सरकार को बिहार सहित तीन राज्यों से भूमि सर्वे की तकनीक के आदान-प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा सर्वे के काम को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया. साथ ही मामले में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को कहा गया. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 16 सितंबर की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व सरकार के सचिव की ओर से शपथ पत्र दायर किया गया. शपथ पत्र में बताया गया कि भूमि सर्वे में तेजी लाने को लेकर तीन टीम बिहार, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक से तकनीक सीख रही है. कर्नाटक में एक टीम गयी थी, जिसने आंध्र प्रदेश में कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर टेक्नोलॉजी कैसे अपडेट किया जाये, इसकी जानकारी ली. इसके अलावा दो अन्य टीम बिहार तथा कर्नाटक से भूमि सर्वे की नयी तकनीक सीखेगी. इससे भूमि सर्वे की तकनीक को झारखंड में भी अपग्रेड कर सर्वे के काम में तेजी लायी जायेगी. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रत्युष शौनिक्य ने पैरवी की. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के शपथ पत्र को देखने के बाद कहा था कि जो भी कमियां हैं, उन्हें पूरा कर सर्वे में तेजी लायी जाये. 1974-75 से चल रहा यह सर्वे कब तक पूरा हो जायेगा इसकी भी जानकारी देने को कहा गया था. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी गोकुल चंद ने जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने भूमि सर्वे के कार्य को पूरा करने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1932 में भूमि का सर्वे हुआ था. इसके बाद 1974-75 से भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी. भूमि सर्वे के कार्य के लिए समय सीमा तय करने का आग्रह किया, ताकि भूमि की प्रकृति व मालिकाना हक में हेराफेरी नहीं हो सके. सर्वे होने से झारखंड में भूमि का रिकॉर्ड अप-टू-डेट होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPESH KUMAR

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