रांची (वरीय संवाददाता). राष्ट्रीय शिक्षा नीति छात्रों एवं समाज में समग्र विकास की कल्पना करती है. लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति में भारतीयों को केवल क्लर्क बनाने के दृष्टि से शिक्षित किया जाता था. आज भारत को पुनः विश्व गुरू बनाने के लिए भारत केंद्रित शिक्षा नीति की आवश्यकता है. उक्त बातें मुख्य अतिथि प्रो डॉ गोपाल पाठक (महानिदेशक सरला बिल्ला विवि) ने रांची सहोदया के वार्षिक कॉन्क्लेव में कही. उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लायी गयी. इसमें समाज के समग्र विकास की कल्पना की गयी है. एनइपी-2020 तथा एनसीएफ-2023 को लागू करने के लिए सहोदया स्कूल सभी विद्यालयों में सामंजस्य स्थापित कर अपनी भूमिका का निर्वहन करें.
सीबीएसइ पटना के रिजनल अधिकारी अनिल कपूर ने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए. पढाई में स्किल की आवश्यकता है. शिक्षक को प्रोत्साहित करके शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाये. साथ ही उन्होंने परीक्षा की बारीकियों पर भी प्रकाश डाला. वहीं एनआइओएस के पूर्व अध्यक्ष प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने कहा कि 18वीं शताब्दी तक भारतीय सभी क्षेत्रों में स्किल के साथ कम करते थे, इसलिए विश्व के जीडीपी में भारत की भागीदारी 45 प्रतिशत की थी. एनइपी-2020 में मल्टीडिस्प्लीनरी एजुकेशन पर बल दिया गया है. विद्यालयों में एनइपी-2020 लागू हो रहा है, इस शिक्षा नीति के माध्यम से पढ़े हुए छात्र 2047 तक तकनीकी युक्त योग्यता के साथ जब समाज में आयेंगे, निश्चित ही भारत विकसित होगा.रांची सहोदया कॉम्प्लेक्स की इ-पत्रिका का लोकार्पण
इस अवसर पर रांची सहोदया कॉम्प्लेक्स की इ-पत्रिका उन्नयन का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ परमजीत कौर, राजेश पिल्लई, डॉ प्रियंका श्रीवास्तव, जसमीत कौर, शालिनी विजय, डॉ सुभाष कुमार, डॉ एमके सिन्हा, श्रीधर बी डांडिन, डॉ मनीष कुमार पांडेय, शिव सूर्यनारायण चिंतापल्ली, पारोमिता साहा, समिता सिन्हा, गोपिका आनंद, सौम्या भट्टाचार्य, तनुश्री सरकार, डॉ अलीशा अरोड़ा उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

