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झारखंड विधानसभा चुनाव में हाई प्रोफाइल सीटों पर रहेंगी सबकी निगाहें, कई दिग्गजों की साख दांव पर

Updated at : 16 Oct 2024 7:44 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा चुनाव में हाई प्रोफाइल सीटों पर रहेंगी सबकी निगाहें, कई दिग्गजों की साख दांव पर

चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी है. झारखंड में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे. झारखंड में 13 नवंबर और 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव होंगे.

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झारखंड में विधानसभा चुनाव का आगाज हो चुका है. विधानसभा की 81 सीटों पर चुनाव होने हैं. इनमें कई सीटें हाई प्रोफाइल हैं. बड़े नेताओं, मंत्रियों और पुराने विधायकों की साख इन सीटों से जुड़ी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बाबूलाल मरांडी, सुदेश कुमार महतो, चंपाई सोरेन, कल्पना सोरेन, अमर कुमार बाउरी सहित कई मंत्रियों की सीटों को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है.

दुमका : पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुनाव जीते थे. इसके बाद उन्होंने सीट छोड़ दी थी. उप चुनाव में हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन चुनाव जीत कर विधायक बने हैं. भाजपा इस सीट से किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतार सकती है. इसमें पूर्व मंत्री लुईस मरांडी का नाम सामने आ रहा है.

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लोबिन हेम्ब्रम.

बोरियो : इस सीट पर राजनीतिक समीकरण बदल चुका है. पिछले चुनाव में झामुमो के टिकट से चुनाव जीतने वाले लोबिन हेंब्रम ने पार्टी छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया है. हालांकि, वर्ष 2000 से अब तक लोबिन हेंब्रम इस सीट से झामुमो से तीन बार विधायक रहे हैं. ऐसे में भाजपा से इनकी प्रबल दावेदारी बन रही है.

पाकुड़ : इस सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आलमगीर आलम चुनाव जीते थे. इसके बाद उन्हें ग्रामीण विकास मंत्री के साथ-साथ कांग्रेस विधायक दल के नेता की जिम्मेवारी सौंपी गयी. हालांकि, टेंडर व कमीशन के मामले में आलमगीर आलम फिलहाल जेल में हैं. राजनीतिक गलियारे में इसको लेकर चर्चा है कि क्या कांग्रेस इन्हें फिर से चुनाव में उतारेगी या नया उम्मीदवार देगी.

सीता सोरेन

जामा : झामुमो की पकड़ वाली इस सीट पर फिलहाल राजनीतिक समीकरण बदल गया है. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की बहू व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन इस सीट से चुनाव जीती थीं. लेकिन, लोकसभा चुनाव से पहले वह झामुमो छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गयी हैं. चूंकि सीता सोरेन के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. ऐसे में इस सीट से उनकी बेटी जयश्री सोरेन के चुनाव लड़ने की चर्चा है.

नाला : यह सीट विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो की सिटिंग सीट है. वह राज्य गठन के बाद से इस सीट से तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. वर्ष 2014 से लगातार दो बार चुनाव जीते हैं. लोगों की नजर है कि क्या महतो इस सीट पर जीत की हैट्रिक बनायेंगे.

पोड़ैयाहाट : विधायक प्रदीप यादव इस सीट से लगातार पांच टर्म से चुनाव जीत रहे हैं. फिलहाल यादव कांग्रेस विधायक दल के उप नेता हैं. इस सीट से वह भाजपा व झाविमो के टिकट से चुनाव जीत चुके हैं. इस बार वे कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ेंगे. अगर प्रदीप यादव इस बार चुनाव जीतने में सफल होते हैं, तो वे जीत का छक्का लगायेंगे.

महगामा : वर्तमान कृषि व पशुपालन मंत्री दीपिका पांडेय की यह सिटिंग सीट है. पिछले विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ कर विधानसभा पहुंचीं. मंत्रिमंडल में फेरबदल होने पर उन्हें मंत्री बनने का मौका मिला. इस बार वह बतौर मंत्री रहते चुनाव मैदान में उतरेंगी. ऐसे में इस सीट पर खास नजर रहेगी.

मांडू : फिलहाल इस विधानसभा का राजनीतिक समीकरण बदल गया है. पिछला चुनाव भाजपा के टिकट से जीतने वाले जयप्रकाश भाई पटेल ने पाला बदल कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. एनडीए खेमा में यह सीट आजसू के खाते में जा सकती है. ऐसे में इस सीट पर दिलचस्प मुकाबला हो सकता है.

चतरा : श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता की यह सीटिंग सीट है. यह एससी के लिए आरक्षित सीट है. भोक्ता जाति के एसटी में शामिल होने की वजह से भोक्ता का इस सीट से चुनाव लड़ने में कानूनी बाधा उत्पन्न हो सकती है. ऐसे में चर्चा चल रही है कि इस सीट से राजद किसे अपना उम्मीदवार बनायेगा.

babulal marandi
बाबूलाल मरांडी

धनवार : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की यह सीटिंग सीट है. इससे पहले मरांडी झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़ कर जीते थे. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है. इन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी है. बाबूलाल मरांडी एक बार फिर से इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसे में यह भाजपा की प्रतिष्ठा की सीट बन गयी है.

गांडेय : उप चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन इस सीट से चुनाव जीत कर विधायक बनी हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट से सरफराज अहमद जीते थे, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी. इसके बाद उप चुनाव में कल्पना सोरेन जीत दर्ज कर विधायक बनी हैं.

डुमरी : यह सीट झामुमो की सेफ सीटों में एक है. इस सीट से पहले जगन्नाथ महतो चुनाव जीतते रहे. उनके निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी उप चुनाव में जीत दर्ज कर मंत्री हैं. इस सीट से जेएलकेएम के जयराम महतो ने भी चुनाव लड़ने की घोषणा की है. ऐसे में मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी
नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी

चंदनकियारी : यह सीट भाजपा के नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी की सिटिंग सीट है. पिछले दो चुनाव से बाउरी इस सीट पर चुनाव जीत रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष के चुनाव लड़ने की वजह से यह भाजपा की प्रतिष्ठा की सीट बन गयी है.

घाटशिला : यह सीट मंत्री रामदास सोरेन की सिटिंग सीट है. लेकिन, चंपाई सोरेन के झामुमो छोड़ कर भाजपा जाने के बाद समीकरण बदल गया है. इस सीट पर सोरेन को चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन से चुनौती मिल सकती है.

जमशेदपुर पूर्वी : यह भाजपा की सेफ सीटों में से एक है. पिछले चुनाव में निर्दलीय विधायक सरयू राय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को पराजित किया था. फिलहाल राजनीतिक परिस्थिति बदल गयी है. रघुवर दास ओडिशा के राज्यपाल बन गये हैं. वहीं, सरयू राय ने जदयू का दामन थाम लिया है. जदयू एनडीए की सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ रहा है. ऐसे में इस सीट से चुनाव कौन लड़ेगा, इसको लेकर सस्पेंस बना हुआ है.

जमशेदपुर पश्चिमी : स्वास्थ्य व खाद्य आपूर्ति मंत्री बन्ना गुप्ता की यह सीटिंग सीट है. श्री गुप्ता पिछले दो बार से लगातार इस सीट से चुनाव जीत रहे हैं. इस बार जीत की हैट्रिक बनाने को लेकर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं. वहीं, दूसरी तरफ जदयू का दामन थामने वाले सरयू राय ने कहा कि अगर उन्हें इस सीट से टिकट दिया जायेगा, तो वे चुनाव लड़ने को तैयार हैं. ऐसे में इस सीट पर दिलचस्प मुकाबला हो सकता है.

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चंपाई सोरेन

सरायकेला : झामुमो नेता व पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के भाजपा में शामिल होने के बाद इस सीट पर लोगों की खास नजर है. चंपाई सोरेन अब तक इस सीट से झामुमो के टिकट पर चुनाव जीतते रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने के कारण इस सीट पर लोगों की खास नजर है.

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सिल्ली : आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की यह सीटिंग सीट है. इस सीट से वे कई बार विधायक रह चुके हैं. ऐसे में इस सीट पर पार्टी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है.

रांची : इस सीट पर पिछले 28 वर्षों से भाजपा का कब्जा है. भाजपा के सीपी सिंह वर्ष 1996 से लगातार इस सीट से चुनाव जीत रहे हैं. पिछले चुनाव में उन्हें झामुमो की ओर से कड़ी चुनौती मिली थी. ऐसे में इस सीट पर लोगों की खास नजर बनी है.

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लोहरदगा : वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव की यह सीटिंग सीट है. उरांव फिलहाल कांग्रेस विधायक दल के नेता का दायित्व भी संभाल रहे हैं. ऐसे में इस सीट पर पार्टी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है.

गढ़वा : पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर की यह सीटिंग सीट है. पिछले चुनाव में श्री ठाकुर झामुमो के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने. इसके बाद उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. ऐसे में लोगों की इस सीट पर भी नजर रहेगी.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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