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रघुवर सरकार की स्थानीय नीति को बदलेगी हेमंत सोरेन की सरकार, लागू होगा 32 का खतियान

Updated at : 07 Mar 2020 10:41 AM (IST)
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रघुवर सरकार की स्थानीय नीति को बदलेगी हेमंत सोरेन की सरकार, लागू होगा 32 का खतियान

Hemant Soren Government to Amend Local Policy of Jharkhand, says Education Minister Jagarnath Mahto. हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की सरकार रघुवर दास (Raghubar Das) सरकार के कार्यकाल में बनी स्थानीय नीति (Domicile Policy) में बदलाव करने जा रही है. शिक्षा मंत्री (Education Minister) जगरनाथ महतो (Jagarnath Mahto) ने शुक्रवार को विधानसभा (Jharkhand Vidhan Sabha) में कहा कि नयी सरकार झारखंड की स्थानीय नीति (Local Policy of Jharkhand) में बदलाव करेगी. इसमें 1932 के खतियान को आधार बनाया जायेगा.

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रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने स्थानीय नीति में बदलाव की बात कही है. शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने शुक्रवार को कहा कि नयी सरकार झारखंड की स्थानीय नीति में बदलाव करेगी. इसमें 1932 के खतियान को आधार बनाया जायेगा. उन्होंने कहा कि विभाग क्या कहता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. स्थानीय नीति में बदलाव होगा और 1932 का खतियान लागू किया जायेगा. उन्होंने यह भी कहा कि जिंदल को देवघर में आवंटित जमीन वापस ली जायेगी.

उल्लेखनीय है कि जनवरी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सुप्रीमो शिबू सोरेन ने कहा था कि हेमंत सोरेन की सरकार मौजूदा स्थानीय नीति में संशोधन करेगी. पार्टी ने जनता से इसका किया है. सूबे में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनायी जायेगी. उन्होंने कहा था कि मौजूदा नीति में काफी कमियां हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु ने कहा था कि हेमंत सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाने के बाद इस पर फैसला लिया जायेगा. इसके बाद से ही स्थानीय नीति पर राजनीति गरमा गयी. इस पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि शिबू सोरेन के इस तरह के बयान से झारखंड में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल पैदा हो सकता है.

उल्लेखनीय है कि रघुवर दास की सरकार ने झारखंड अगल राज्य बनने से 15 साल पहले से यहां रहने वालों को स्थानीय माना और इसी आधार पर स्थानीय नीति बनायी थी. हेमंत सोरेन की सरकार के बड़े मंत्री ने अब इस नीति को बदलने की घोषणा से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ सकता है.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच पहले से ही नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर ठनी हुई है. बजट सत्र के 5 दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं. शुक्रवार को भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने की मांग पर सदन के अंदर और बाहर प्रदर्शन किया. भाजपा विधायकों ने मुंह पर पट्टी बांधकर विधानसभा के बाहर मौन प्रदर्शन किया.

इससे पहले सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी थी. विधायकों ने अपने गले में पोस्टर टांग रखे थे. हाथ में भी तख्तियां ले रखी थी. इस पर ‘नेता प्रतिपक्ष पर क्यों करते देरी, नहीं चलेगी हेराफेरी’, ‘नेता प्रतिपक्ष को करे इन्कार, क्यों डरी हुई है बाबूलाल जी से हेमंत सरकार?’, ‘माननीय अध्यक्ष जी न्याय करो, न्याय करो’ और ‘नेता प्रतिपक्ष को शीघ्र मान्यता दें’ समेत कई नारे लिखे थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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