एचईसी में एलपीजी संकट के बीच पीएनजी कनेक्शन की तैयारी, राहत की उम्मीद बढ़ी

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :14 Apr 2026 11:43 AM (IST)
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LPG Crisis

रांची के एचईसी कॉलोनी में बिछेगी पीएनजी पाइपलाइन.

LPG Crisis: एचईसी रांची में एलपीजी संकट के बीच गेल ने पीएनजी कनेक्शन का प्रस्ताव दिया है. इससे 11 हजार से अधिक क्वार्टरों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी. फाउंड्री फोर्ज प्लांट यूनिट को भी लाभ होगा. पाइपलाइन से स्थायी गैस आपूर्ति की योजना पर काम तेज हुआ है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राजेश झा की रिपोर्ट

LPG Crisis: झारखंड की राजधानी रांची स्थित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) परिसर में जारी एलपीजी संकट के बीच अब राहत की उम्मीद दिखाई देने लगी है. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे एचइसी कॉलोनी के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन की तैयारी शुरू होने से लोगों में राहत की उम्मीद जगी है.

खबर के असर से सक्रिय हुए अधिकारी

एचईसी में गैस संकट को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. “महज एक माह का बचा है गैस” शीर्षक खबर सामने आने के बाद हालात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए जाने लगे. इसके बाद गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के अधिकारी एचइसी परिसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया.

पीएनजी कनेक्शन का प्रस्ताव

गेल के अधिकारियों ने एचईसी आवासीय परिसर में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. इस योजना के तहत पूरे कॉलोनी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने की बात कही गई है. अधिकारियों ने एचइसी प्रबंधन से इसके लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी की मांग की है, ताकि परियोजना पर काम शुरू किया जा सके.

11 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ

एचईसी आवासीय परिसर में 11 हजार से अधिक क्वार्टर हैं, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार रहते हैं. वर्तमान में एलपीजी की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यदि पीएनजी योजना लागू होती है, तो इन सभी परिवारों को नियमित और निर्बाध गैस आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें आसान हो जाएंगी.

औद्योगिक इकाई को भी मिलेगा फायदा

यह योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि एचइसी की औद्योगिक इकाइयों के लिए भी महत्वपूर्ण है. फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) यूनिट में फर्नेस संचालन के लिए एलपीजी का उपयोग किया जाता है. यहां फोर्जिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं. पीएनजी कनेक्शन मिलने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारू और स्थिर हो सकेगी.

प्रबंधन की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया

एचईसी प्रबंधन ने बताया है कि गेल के प्रस्ताव पर जल्द ही एनओसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जैसे ही अनुमति मिलती है, पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जा सकता है. प्रशासन का मानना है कि यह योजना न केवल घरेलू गैस संकट को दूर करेगी, बल्कि औद्योगिक उत्पादन को भी स्थिरता प्रदान करेगी.

लोगों में राहत की उम्मीद

लगातार गैस संकट से जूझ रहे एचईसी के लोगों के लिए यह प्रस्ताव बड़ी राहत लेकर आया है. कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यदि पीएनजी सुविधा शुरू हो जाती है, तो उन्हें एलपीजी सिलेंडर की कमी और महंगाई से छुटकारा मिल जाएगा. इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी.

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भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी कनेक्शन की यह पहल एचईसी के लिए एक स्थायी समाधान साबित हो सकती है. इससे न केवल वर्तमान गैस संकट समाप्त होगा, बल्कि भविष्य में भी ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी. यह कदम एचइसी के विकास और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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