H3N2 इन्फ्लूएंजा की रोकथाम के लिए टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट रणनीति, मासूम का कृत्रिम ऑक्सीजन थैरेपी से इलाज शुरू

स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमित आधार पर आंकड़ों को आइडीएसपी-आइएचआइपी पोर्टल में अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों को मास्क पहनने, हाथों की स्वच्छता बनाये रखने और कोविड-19 के व्यवहारों को अमल में लाने के लिए जागरूक करने को कहा गया है.
स्वास्थ्य विभाग ने मौसमी इन्फ्लूएंजा नमूनों के परीक्षण के लिए कोरोना महामारी के दौरान अमल में लाये गये उपायों को ही अपनाने के निर्देश दिये हैं. रिम्स में एच-3 एन-2 के सीमित संसाधनों की मौजूदगी को देखते हुए सिविल सर्जन ने सभी प्रखंडों को निर्देश जारी किये हैं. निचले क्रम में स्थित अस्पतालों को टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट की पांच गुना रणनीति का इस्तेमाल करने को कहा गया है.
साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमित आधार पर आंकड़ों को आइडीएसपी-आइएचआइपी पोर्टल में अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों को मास्क पहनने, हाथों की स्वच्छता बनाये रखने और कोविड-19 के व्यवहारों को अमल में लाने के लिए जागरूक करने को कहा गया है.
गंभीर मरीजों के ही टेस्ट सैंपल रिम्स भेजे जायेंगे
स्वास्थ्य विभाग ने जिला और उप-जिला स्तरों पर इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 की स्थिति की जांच करने और प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक उपायों के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है. जारी निर्देश में इस बात का जिक्र है कि श्वसन रोग वाले और गर्भवती महिलाएं इन वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, इसके लिए विशेष ट्रैकिंग की जायेगी.
रांची के सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार ने कहा कि संक्रमण के प्रसार को स्थायी आधार पर रोकने के लिए टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट की रणनीति को जारी रखना आवश्यक है. गंभीर मरीजों के लिए विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिये गये हैं. विशेष तौर पर यह सुनिश्चित किया जायेगा कि टेस्टिंग रेट सटीक हो.
रानी अस्पताल में भर्ती एच3एन2 इन्फ्लूएंजा से पीड़ित मासूम को कृत्रिम ऑक्सीजन दिया जा रहा है. निमाेनिया के कारण मासूम का ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हो गया है, जिसको सामान्य स्तर पर लाने का प्रयास किया जा रहा है. इलाज कर रहे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि निमोनिया के कारण मासूम का फेफड़ा संक्रमित है. इसके लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही है. ऑक्सीजन थैरेपी भी चल रहा है.
इधर, रिम्स के सेंट्रल इमरजेंसी में गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को भर्ती के बाद विशेष निगरानी में रखा जा रहा है. फेफड़ा और सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों को सर्विलांस टीम एच3एन2 इन्फ्लूएंजा मानकर मॉनिटरिंग कर रही है. वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कोई एच3एन2 इन्फ्लूएंजा का संदिग्ध लगे, तो उसकी तत्काल जांच करायी जाये. रिम्स ने जीनोम सिक्वेंसिंग विभाग को भी अलर्ट रहने को कहा है. हालांकि रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को अभी तक एच3एन2 इन्फ्लूएंजा की जांच का सैंपल नहीं भेजा जा रहा है, जिससे जांच की जा सके.
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