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महात्मा गांधी की झारखंड यात्रा के 100 साल, विद्यार्थी के चरित्र निर्माण में आज भी प्रासंगिक ‘सत्य के प्रयोग’

Updated at : 02 Oct 2025 4:42 PM (IST)
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महात्मा गांधी.

Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी का जीवन किसी भी छात्र के लिए प्रेरणादायक है. कई ऐसी बातें हैं, जो महात्मा गांधी से विद्यार्थियों को सीखना चाहिए. अगर उन्होंने गांधी के सबक को अपने जीवन में उतार लिया, तो निश्चित तौर पर विद्यार्थी अपने जीवन में सफल होगा. अपने मकसद में सफल होगा. ऐसी ही कुछ बातें हम यहां बता रहे हैं. आप भी पढ़ें.

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Gandhi Jayanti: मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें गांधीजी या बापू कहा जाता है, का जीवन एक खुला विश्वविद्यालय है. उनकी जीवनी पढ़कर, विद्यार्थी यह समझते हैं कि चरित्र कोई ऐसा विषय नहीं है, जो कक्षाओं में पढ़ायी जाये. यह हर दिन, हर निर्णय में ‘सत्य के छोटे-छोटे प्रयोगों’ से बनता है. युवाओं के मन में यह बीज बोना होगा कि एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए, सबसे पहले हमें खुद को बेहतर बनाना होगा. बापू का जीवन इसी स्व-परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण है.

गांधी का जीवन अटल मार्गदर्शक स्तंभ की तरह

महात्मा गांधी की 1925 में झारखंड (तत्कालीन बिहार-उड़ीसा) की यात्रा, जिसमें गिरिडीह और मधुपुर जैसे शहर शामिल थे, आज 100 साल बाद भी हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है. आज के डिजिटल युग में, जहां नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है और चरित्र निर्माण की नींव कमजोर पड़ रही है, वहां विद्यार्थियों के लिए गांधीजी का जीवन और दर्शन एक अटल मार्गदर्शक स्तंभ की तरह है.

चरित्र निर्माण की गांधीवादी आधारशिला

गांधीजी के संपूर्ण जीवन का सार उनके विचारों में निहित हैं. उनका कहना था कि ‘व्यक्ति का चरित्र ही राष्ट्र का चरित्र’ होता है. उनके लिए शिक्षा का उद्देश्य एक ऐसे नागरिक का निर्माण करना था, जो नैतिक रूप से मजबूत हो, निडर हो और समाज के प्रति जिम्मेदार हो. उनकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ (My Experiments with Truth) विद्यार्थियों के लिए ‘नैतिक प्रयोगशाला’ है. यह दर्शाता है कि एक साधारण व्यक्ति किस प्रकार लगातार आत्म-निरीक्षण और गलतियों से सीखकर महात्मा बन सकता है.

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सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का पाठ

गांधीजी का जीवन ‘सत्य’ पर आधारित था. ‘सत्य के प्रयोग’ में वह अपनी छोटी से छोटी गलतियों, जैसे बचपन में चोरी करना या धूम्रपान की लत, को स्वीकार करने में भी संकोच नहीं करते. विद्यार्थियों के लिए यह जीवनी उन्हें सिखाती है कि ‘ईमानदारी’ किसी भी बड़े चरित्र की पहली सीढ़ी है. परीक्षा में नकल न करना, प्रोजेक्ट खुद से बनाना और अपने माता-पिता या शिक्षकों से सच बोलना, ये सभी सत्यनिष्ठा के छोटे-छोटे प्रयोग हैं, जो भविष्य में उन्हें भ्रष्टाचार मुक्त और ईमानदार नागरिक बनाते हैं. यह उन्हें असफलता को स्वीकार करने और उसे सीखने के अवसर के रूप में देखने की शक्ति देती है.

आत्म-नियंत्रण (ब्रह्मचर्य) और समर्पण

गांधीजी ने ब्रह्मचर्य को केवल शारीरिक नियंत्रण के रूप में नहीं, बल्कि विचार, शब्द और कर्म में पूर्ण अनुशासन के साथ परिभाषित किया. उनके जीवन में हर कार्य के प्रति एक गहरा समर्पण और दृढ़ संकल्प था. आज के विचलित करने वाले माहौल में, आत्म-नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है. गांधीजी का जीवन बताता है कि सफलता के लिए ‘साधनों की पवित्रता’ और ‘लक्ष्य पर एकाग्रता’ जरूरी है. यह उन्हें अनावश्यक विलासिता और क्षणिक सुखों से दूर रहकर, अपने अध्ययन और लक्ष्य के प्रति पूर्णतः समर्पित होने की प्रेरणा देता है.

श्रम का महत्व (शारीरिक श्रम और ‘ब्रेड लेबर’)

महात्मा गांधी ने हमेशा ‘शारीरिक श्रम’ (Bread Labour) को महत्व दिया. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जीवन यापन के लिए कुछ शारीरिक श्रम अवश्य करना चाहिए. बापू आश्रमों में खुद झाड़ू लगाते थे, चरखा चलाते थे और शौचालयों की सफाई करते थे. उनकी ये बातें विद्यार्थियों को सीख देती है कि ‘श्रम की गरिमा’ सर्वोपरि है. कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. यह अवधारणा विद्यार्थियों के ‘अहंकार’ को दूर करती है और उन्हें दूसरों के श्रम का सम्मान करना सिखाती है. यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है.

निडरता और अन्याय का प्रतिरोध

दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम तक, महात्मा गांधी ने हमेशा ‘अन्याय’ के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाया, भले ही विरोधी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो. उन्होंने निडरता को चरित्र का एक अनिवार्य अंग माना. आज के समय में बापू के ये गुण छात्रों को बुलीइंग (Bullying), रैगिंग या किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाता है. गांधीजी का अहिंसा का सिद्धांत उन्हें सिखाता है कि प्रतिरोध का मतलब हिंसा नहीं होता. ‘सत्य और नैतिक बल’ के साथ खड़ा होना होता है. यह उन्हें अन्याय का मुखर विरोध करने वाला और कमजोरों का साथ देने वाला नागरिक बनाता है.

सर्वधर्म समभाव और समावेशी दृष्टिकोण

गांधीजी सभी धर्मों का सम्मान करते थे. उन्होंने अपने आश्रम में सभी धर्मों की प्रार्थना को शामिल किया. उनका चरित्र समावेशी था, जो विभिन्न संस्कृतियों और विचारों को एक साथ जोड़ता था. यह आज के ध्रुवीकृत समाज में सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है. यह छात्रों को सिखाता है कि भारत की विविधता ही उसकी शक्ति है. उन्हें हर सहपाठी का, उसकी जाति, धर्म या पृष्ठभूमि की परवाह किये बिना, सम्मान करना चाहिए. यह उन्हें ‘सह-अस्तित्व’ और ‘वैश्विक नागरिकता’ के मूल्यों से परिचित कराता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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