Gandhi Jayanti: मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें गांधीजी या बापू कहा जाता है, का जीवन एक खुला विश्वविद्यालय है. उनकी जीवनी पढ़कर, विद्यार्थी यह समझते हैं कि चरित्र कोई ऐसा विषय नहीं है, जो कक्षाओं में पढ़ायी जाये. यह हर दिन, हर निर्णय में ‘सत्य के छोटे-छोटे प्रयोगों’ से बनता है. युवाओं के मन में यह बीज बोना होगा कि एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए, सबसे पहले हमें खुद को बेहतर बनाना होगा. बापू का जीवन इसी स्व-परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण है. गांधी का जीवन अटल मार्गदर्शक स्तंभ की तरह महात्मा गांधी की 1925 में झारखंड (तत्कालीन बिहार-उड़ीसा) की यात्रा, जिसमें गिरिडीह और मधुपुर जैसे शहर शामिल थे, आज 100 साल बाद भी हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है. आज के डिजिटल युग में, जहां नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है और चरित्र निर्माण की नींव कमजोर पड़ रही है, वहां विद्यार्थियों के लिए गांधीजी का जीवन और दर्शन एक अटल मार्गदर्शक स्तंभ की तरह है. चरित्र निर्माण की गांधीवादी आधारशिला गांधीजी के संपूर्ण जीवन का सार उनके विचारों में निहित हैं. उनका कहना था कि ‘व्यक्ति का चरित्र ही राष्ट्र का चरित्र’ होता है. उनके लिए शिक्षा का उद्देश्य एक ऐसे नागरिक का निर्माण करना था, जो नैतिक रूप से मजबूत हो, निडर हो और समाज के प्रति जिम्मेदार हो. उनकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ (My Experiments with Truth) विद्यार्थियों के लिए ‘नैतिक प्रयोगशाला’ है. यह दर्शाता है कि एक साधारण व्यक्ति किस प्रकार लगातार आत्म-निरीक्षण और गलतियों से सीखकर महात्मा बन सकता है. झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का पाठ गांधीजी का जीवन ‘सत्य’ पर आधारित था. ‘सत्य के प्रयोग’ में वह अपनी छोटी से छोटी गलतियों, जैसे बचपन में चोरी करना या धूम्रपान की लत, को स्वीकार करने में भी संकोच नहीं करते. विद्यार्थियों के लिए यह जीवनी उन्हें सिखाती है कि ‘ईमानदारी’ किसी भी बड़े चरित्र की पहली सीढ़ी है. परीक्षा में नकल न करना, प्रोजेक्ट खुद से बनाना और अपने माता-पिता या शिक्षकों से सच बोलना, ये सभी सत्यनिष्ठा के छोटे-छोटे प्रयोग हैं, जो भविष्य में उन्हें भ्रष्टाचार मुक्त और ईमानदार नागरिक बनाते हैं. यह उन्हें असफलता को स्वीकार करने और उसे सीखने के अवसर के रूप में देखने की शक्ति देती है. आत्म-नियंत्रण (ब्रह्मचर्य) और समर्पण गांधीजी ने ब्रह्मचर्य को केवल शारीरिक नियंत्रण के रूप में नहीं, बल्कि विचार, शब्द और कर्म में पूर्ण अनुशासन के साथ परिभाषित किया. उनके जीवन में हर कार्य के प्रति एक गहरा समर्पण और दृढ़ संकल्प था. आज के विचलित करने वाले माहौल में, आत्म-नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है. गांधीजी का जीवन बताता है कि सफलता के लिए ‘साधनों की पवित्रता’ और ‘लक्ष्य पर एकाग्रता’ जरूरी है. यह उन्हें अनावश्यक विलासिता और क्षणिक सुखों से दूर रहकर, अपने अध्ययन और लक्ष्य के प्रति पूर्णतः समर्पित होने की प्रेरणा देता है. श्रम का महत्व (शारीरिक श्रम और ‘ब्रेड लेबर’) महात्मा गांधी ने हमेशा ‘शारीरिक श्रम’ (Bread Labour) को महत्व दिया. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जीवन यापन के लिए कुछ शारीरिक श्रम अवश्य करना चाहिए. बापू आश्रमों में खुद झाड़ू लगाते थे, चरखा चलाते थे और शौचालयों की सफाई करते थे. उनकी ये बातें विद्यार्थियों को सीख देती है कि ‘श्रम की गरिमा’ सर्वोपरि है. कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. यह अवधारणा विद्यार्थियों के ‘अहंकार’ को दूर करती है और उन्हें दूसरों के श्रम का सम्मान करना सिखाती है. यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है. निडरता और अन्याय का प्रतिरोध दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम तक, महात्मा गांधी ने हमेशा ‘अन्याय’ के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाया, भले ही विरोधी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो. उन्होंने निडरता को चरित्र का एक अनिवार्य अंग माना. आज के समय में बापू के ये गुण छात्रों को बुलीइंग (Bullying), रैगिंग या किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाता है. गांधीजी का अहिंसा का सिद्धांत उन्हें सिखाता है कि प्रतिरोध का मतलब हिंसा नहीं होता. ‘सत्य और नैतिक बल’ के साथ खड़ा होना होता है. यह उन्हें अन्याय का मुखर विरोध करने वाला और कमजोरों का साथ देने वाला नागरिक बनाता है. सर्वधर्म समभाव और समावेशी दृष्टिकोण गांधीजी सभी धर्मों का सम्मान करते थे. उन्होंने अपने आश्रम में सभी धर्मों की प्रार्थना को शामिल किया. उनका चरित्र समावेशी था, जो विभिन्न संस्कृतियों और विचारों को एक साथ जोड़ता था. यह आज के ध्रुवीकृत समाज में सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है. यह छात्रों को सिखाता है कि भारत की विविधता ही उसकी शक्ति है. उन्हें हर सहपाठी का, उसकी जाति, धर्म या पृष्ठभूमि की परवाह किये बिना, सम्मान करना चाहिए. यह उन्हें ‘सह-अस्तित्व’ और ‘वैश्विक नागरिकता’ के मूल्यों से परिचित कराता है. इसे भी पढ़ें बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र, झारखंड में 3 दिन होगी बारिश, कई जगहों पर भारी वर्षा की चेतावनी Mahatma Gandhi Jayanti: झारखंड और आदिवासियों से बहुत प्रभावित थे महात्मा गांधी सारंडा के जंगल में एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान कोबरा 209 बटालियन के जवान को सांप ने काटा, मौत रिटायर्ड मुख्य सचिव अलका तिवारी झारखंड की राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त, अधिसूचना जारी