झारखंड में रेंजर की भारी कमी, एक-एक पदाधिकारियों को मिला तीन-चार रेंज का अतिरिक्त प्रभार

झारखंड के वन विभाग में पदाधिकारियों की भारी कमी है, जिस वजह से जंगलों में कार्य प्रभावित हो रहा है. आलम ये है कि एक एक रेंजर पर 3-4 रेंज का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है
रांची: वन, पर्यावरण व क्लाइमेट चेंज विभाग में वन क्षेत्र पदाधिकारियों (रेंजर) की भारी कमी हो गयी है. पदाधिकारियों की कमी के कारण ग्रास रूट स्तर पर झारखंड के जंगलों में कार्य प्रभावित हो रहा है. वहीं, एक-एक पदाधिकारी को अपने कार्यों के अतिरिक्त तीन-चार रेंज का अतिरिक्त प्रभार देकर किसी प्रकार विभाग में काम चलाया जा रहा है.
उधर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) ने सरकार के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख कर विभाग में सेवानिवृत्त होनेवाले रेंजरों को तीन वर्षों का अवधि विस्तार देने का आग्रह किया है, ताकि विभागीय कार्यों का संचालन होता रहे.
पीसीसीएफ के पत्र के मुताबिक, विभाग में रेंजर का कुल 383 पद स्वीकृत हैं. इसके विरुद्ध वर्तमान में सिर्फ 85 (22.19%) अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 298 पद खाली हैं. इतना ही नहीं दिसंबर 2022 तक 23 रेंजर, वर्ष 2023 में 23, वर्ष 2024 में 17 व वर्ष 2025 में 19 रेंजर सेवानिवृत्त हो जायेंगे.
एक जनवरी 2026 को विभाग में सिर्फ 17 रेंजर बच जायेंगे. पीसीसीएफ ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होनेवाले वन क्षेत्र पदाधिकारी, जो सेवा अवधि विस्तार के इच्छुक हों, को सेवा स्वच्छता के आलोक में उनकी सेवा अवधि को एक से तीन वर्षों तक विस्तार करने पर विचार किया जा सकता है.
वन भूमि में अवैध पातन, खनन, अतिक्रमण, परिवहन आदि की रोकथाम करना, वन संरक्षण अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम के आलोक में ससमय आवश्यक विधिक कार्रवाई करना, मानव-वन्य प्राणी द्वंद्व को कम करने के लिए कार्रवाई करना, विकास कार्यों को संपादित व क्षेत्र के बेरोजागारों को रोजगार के अवसर पैदा करना जैसे महत्वपूर्ण काम रेंजरों को करना होता है. क्षेत्र के विकास के लिए स्वीकृत योजनाओं के तहत रेंजर बड़ी राशि खर्च करते हैं.
वन क्षेत्र पदाधिकारियों की नियुक्ति नियमावली वर्ष 2018 में अधिसूचित है, लेकिन सीधी भर्ती नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पायी है. पीसीसीएफ का कहना है कि यदि नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ होती है, तो इसमें एक वर्ष का समय लगेगा. दो वर्ष प्रशिक्षण में लगेंगे. अर्थात तीन वर्ष के बाद ही विभाग में नियमित पदाधिकारी उपलब्ध हो पायेंगे.
Posted By: Sameer Oraon
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By Prabhat Khabar News Desk
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