निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक कंगाल

Updated at : 10 Apr 2025 5:14 PM (IST)
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निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक कंगाल

खलारी के कई निजी स्कूलों में फीस बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं, जहां पर स्कूल नये सेशन के लिए विद्यार्थी के अभिभावक से बहुत ज्यादा फीस चार्ज कर रहे हैं.

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सरकारी गाइडलाइन का नहीं कर रहे पालन, पदाधिकारी दे रहे हैं आश्वासन

कमीशन के चक्कर में किताब, कॉपी और पोशाक भी बेच रहे निजी विद्यालय

प्रतिनिधि, डकरा

खलारी के कई निजी स्कूलों में फीस बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं, जहां पर स्कूल नये सेशन के लिए विद्यार्थी के अभिभावक से बहुत ज्यादा फीस चार्ज कर रहे हैं. ऐसे में माता-पिता ने स्कूलों के इस मनमाने व्यवहार पर कई तरह से सवाल खड़े किये हैं, जिनकी वजह से उनके बच्चों को पढ़ाने का खर्च बहुत तेजी से बढ़ गया है. स्कूलों के मनमाने व्यवहार के चलते फीस हर साल बढ़ती चली जा रही है और इस बारे में फीस रेगुलेशन करने के लिए नियम-कानूनों की कमी भी इस समस्या की एक बड़ी वजह बन रही है. निजी विद्यालयों को लेकर जारी गाइडलाइन का कोई असर प्रखंड के विद्यालयों पर नहीं पड़ रहा है. विद्यालय परिसर में खुलेआम किताबें, पोशाक, काॅपी, मोजे आदि चौगुने दाम पर बेचे जा रहे हैं. इस मामले को लेकर बीडीओ ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन को हर हाल में सरकारी गाइडलाइन का पालन करना होगा और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के साथ विद्यालयों का दौरा किया जायेगा. अभिभावकों का कहना है कि सभी विद्यालयों में खुलेआम शिक्षा के नाम पर व्यापार किया जा रहा है. लेकिन, इस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.

30 की काॅपी 80 रुपये में बेच रहे निजी स्कूल

निजी विद्यालय में 30 रुपये की काॅपी 80 रुपये में बेचे जा रहे हैं. अभिभावक बाहर से कॉपी, किताब नहीं खरीद सकते हैं. इसके लिए पहले ही बच्चों को नोटिस दिया जाता है कि बाहर से खरीदा गया स्कूल में नहीं चलेगा. यही हाल किताबों के अलग-अलग प्रकाशन के नाम पर, पोशाक और मोजे चौगुने दाम पर बेचे जा रहे हैं. 30 रुपये के मोजे 110, टाई 150, डायरी 250 रुपये तक में बेची जाती है. एक जानकार ने बताया कि इस तरह की सामग्री बेचकर विद्यालय में सलाना कमाई का लक्ष्य 40-50 लाख रुपये होता है.

किताब-कॉपी पर खर्च 3500 रुपये

कक्षा एक से तीन के बीच किताब-कॉपी पर 3200-3500 रुपये अभिभावकों से वसूला जा रहा है. प्रखंड में जो विद्यालय एनसीआरटी की किताबें चला रहे हैं, वहां यही खर्च मात्र 1200-1500 के बीच होता है. इस मामले में अभिभावकों का कहना है कि जो प्रकाशक विद्यालय को 60-70% कमीशन देता है उसी प्रकाशन की किताबें चलायी जाती है.

बीइओ ने समय नहीं दिया : बीडीओ

बीडीओ संतोष कुमार सिंह ने कहा कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने समय नहीं दिया है, जिसके कारण निजी विद्यालयों का दौरा नहीं कर पाये हैं. समय मिलते ही दौरा कर सभी शिकायतों का निवारण किया जायेगा.

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