रांची के पहाड़ी मंदिर पर भी अतिक्रमण शुरू, जानिए इसके पीछे का कारण
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Dec 2022 9:04 AM
धार्मिक स्थलों में रांची की पहचान पहाड़ी मंदिर से है. दस्तावेजों के अनुसार, आजादी के पहले यह पहाड़ी अंग्रेजों के कब्जे में थी, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी. इस स्थान को फांसी टुंगरी कहा जाता था. लेकिन अब दोबारा अतिक्रमण शुरू हो गया है.
Ranchi News: राजधानी की पहचान रांची पहाड़ी (26 एकड़, 13 कड़ी ) पर दोबारा अतिक्रमण शुरू हो गया है. यहां भगवान शिव के मुख्य मंदिर को छोड़ कर अगल-बगल के निचले हिस्से का अतिक्रमण कर लिया गया है. झुग्गी-झोपड़ी बना दी गयी है. सबसे ज्यादा अतिक्रमण पिछले हिस्से में किया गया है. अतिक्रमण की रफ्तार इतनी तेज है कि अगर इसे रोका नहीं गया, तो धीरे-धीरे यह शिखर तक पहुंच जायेगा. पहाड़ी के पीछे का आधा से अधिक हिस्सा झुग्गी झोपड़ी बना कर अतिक्रमित कर लिया गया है. अब तो कुछ पक्की दीवारें भी खड़ी हो गयी हैं.
पहाड़ी मंदिर के आसपास रहनेवाले बुजुर्गों ने बताया कि पहाड़ी का क्षेत्र 26 एकड़, 13 कड़ी के गोलाकार हिस्सा में फैला हुआ है. जिला प्रशासन को जब शिकायत की जाती है, तो अभियान चला कर अतिक्रमण हटाया जाता है. पर दोबारा लोग अतिक्रमण कर लेते हैं. कुछ वर्ष पहले पहाड़ी मंदिर क्षेत्र की घेराबंदी की गयी, लेकिन निचले हिस्से को छोड़ दिया गया. इससे अतिक्रमण करनेवाले लोगों को खुली जगह मिल गयी.
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धार्मिक स्थलों में रांची की पहचान पहाड़ी मंदिर से है. दस्तावेजों के अनुसार, आजादी के पहले यह पहाड़ी अंग्रेजों के कब्जे में थी, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी. इस स्थान को फांसी टुंगरी कहा जाता था. पहाड़ी मंदिर जमीन से 350 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुंचने में 468 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. मंदिर में भगवान शिव की पूजा होती है. इसकी देखरेख जिला प्रशासन करता है.
पहाड़ काटकर किये जा रहे निर्माण कार्य की जांच के लिए सोमवार को जिला प्रशासन की टीम टैगोर हिल पहुंची. यहां पहुंच कर प्रशासन की टीम ने भवन निर्माता से जमीन के कागजात की मांग की. प्रशासन की टीम ने यहां पहाड़ के हिस्से में किये गये निर्माण कार्य को बारीकी से देखा. संबंधित जगह की मापी की गयी. इसके बाद प्रशासन की टीम ने भवन निर्माता से कहा कि तत्काल निर्माण कार्य को रोका जाये. जब तक मामले का निष्पादन नहीं हो जाता है, किसी प्रकार का निर्माण कार्य होने पर कार्रवाई की जायेगी. बड़गाईं सीओ ने बताया कि उक्त प्लॉट को विक्रमजय किशोर, पिता रामरतन राम ने राम कुमार साहू व जगनारायण साहू से खरीदा था. जिसका रजिस्ट्री डीड भी है.
साहू ने उक्त जमीन के टुकड़े को पूर्णिमा टैगोर, पति स्व सुविरेंद्र नाथ टैगोर से 1963 में खरीदने का दावा किया. जिसका डीड भी प्रस्तुत किया गया. लेकिन राम कुमार साहू व पूर्णिमा टैगोर के नाम से कोई जमाबंदी कायम नहीं है. उक्त जमीन का दाखिल खारिज के लिए दिये गये आवेदन को जांच के बाद छह महीने पूर्व ही रद्द किया जा चुका है. टैगोर हिल में हो रहे अतिक्रमण का खुलासा प्रभात खबर ने तीन दिसंबर को किया था.
रिपोर्ट : राजीव पांडेय, रांची
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