Ranchi News : घरों में ही मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं 71% बच्चे

Published by :MUNNA KUMAR SINGH
Published at :16 Jun 2025 1:27 AM (IST)
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Ranchi News : घरों में ही मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं 71% बच्चे

बेंगलुरु से आये फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जगदीश एन ने कहा कि कच्ची उम्र में ही बच्चे प्रताड़ित होने लगते हैं. कुछ वर्षों पहले हुए शोध में पता चला है कि 71 फीसदी बच्चे घरों में ही यौन प्रताड़ना के शिकार होते हैं.

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बच्चों को यौन प्रताड़ना से बचाने को लेकर हुई कार्यशाला, विशेष ने रखे शोध के आंकड़े

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की झारखंड शाखा ने पहली बार की पहल

विशेषज्ञ बोले- प्रताड़ना के शिकार बच्चों की सही वक्त पर काउंसेलिंग जरूरी

रांची. बेंगलुरु से आये फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जगदीश एन ने कहा कि कच्ची उम्र में ही बच्चे प्रताड़ित होने लगते हैं. कुछ वर्षों पहले हुए शोध में पता चला है कि 71 फीसदी बच्चे घरों में ही यौन प्रताड़ना के शिकार होते हैं. चिंता इस बात की है कि बच्चों को यौन प्रताड़ना देनेवाले अधिकांश लोग नजदीकी परिवार के सदस्य ही होते हैं. बच्चे अपनों से प्रताड़ित होने की वजह से बोल भी नहीं पाते हैं. अगर कोई बाेलता भी है, तो उनकी सुनी नहीं जाती है. डॉ जगदीश रविवार को होटल रॉयल रिट्रीट में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स(आइएपी) की झारखंड शाख द्वारा आयोजित कार्यशाल को संबोधित कर रहे थे. कार्यशाला का विषय था- बच्चों में होनेवाली हिंसा की रोकथाम.

डॉ जगदीश ने बताया कि वर्ष 2007 में एक शोध हुआ था, जिसमें 50 बच्चे किसी न किसी रूप में प्रताड़ित होते थे. बच्चे मानसिक और भावनात्मक रूप से इतना टूट जाते हैं कि उनका पूरा जीवन सदमे में गुजरता है. ऐसे बच्चों को बचाने के लिए सही वक्त पर काउंसेलिंग की जरूरत है. इसके लिए सिर्फ डॉक्टर, पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के लोगों को भी आगे आना होगा. वह बच्चों को खराब और अच्छे स्पर्श की जानकारी दें. स्कूल के शिक्षक भी बच्चों को यौन प्रताड़ना से बचाने के लिए सजग रहें. कार्यशाला में डॉ राजीव सेठ ने डॉक्टरों, एनजीओ के सदस्यों को यौन व शारीरिक प्रताड़ना किट के माध्यम से प्रशिक्षित किया. बच्चों को यौन प्रताड़ना से बचाने की जानकारी भी दी. रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार ने बच्चों को प्रताड़ित होने से बचाने के सामाजिक प्रयास से अवगत कराया. सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने भी इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया. कार्यक्रम में डॉ राजीव मिश्रा, डॉ राजेश कुमार (बालपन), डॉ पीके चौधरी, डॉ राजेश कुमार, डॉ एसएस सिडाना, डॉ अनंत जगणानी, डॉ शैलेश चंद्रा और डॉ प्रेम रंजन, डॉ अनिताभ कुमार, डॉ पवन कुमार वर्णवाल, डॉ अमित मोहन सहित कई डॉक्टर मौजूद थे.

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