क्या कम हो जाएंगी झारखंड की ST सीटें? परिसीमन के खौफ से गरमाई सियासत, पक्ष-विपक्ष दोनों ने जताई चिंता

Published by : Sameer Oraon Updated At : 29 Mar 2026 9:07 PM

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लेफ्ट हैंड साइड में बाबूलाल मरांडी, बीच में मंत्री चमरा लिंडा और राइट हैंड साइड में रामेश्वर उरांव

Delimitation In Jharkhand: झारखंड में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर सियासी गलियारों में गूंज रहा है. जनसंख्या के आधार पर सीटों के बंटवारे की संवैधानिक प्रक्रिया ने आदिवासी समाज और उनके नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं. क्या सच में कम हो जाएंगी आरक्षित सीटें? पढ़ें रामेश्वर उरांव और बाबूलाल मरांडी जैसे दिग्गजों ने इस मुद्दे पर क्या कहा है?

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Delimitation In Jharkhand, रांची (अभिषेक आनंद की रिपोर्ट): झारखंड में परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा, इन दिनों चर्चा के केंद्र में बना हुआ है. राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, सभी इस पर अपनी गंभीर चिंता जाहिर कर रहे हैं. खासतौर पर आदिवासी (ST) आरक्षित सीटों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर माहौल काफी गरम है. पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेता, आदिवासी सीटों के संरक्षण की बात कर रहे हैं.

क्या है परिसीमन और क्यों है जरूरी

परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं जनसंख्या के आधार पर तय की जाती हैं. इसका मुख्य मकसद, हर क्षेत्र को उसकी आबादी के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व देना होता है. इसी प्रक्रिया के दौरान यह भी तय होता है कि कौन-सी सीटें सामान्य वर्ग के लिए होंगी और कौन-सी अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित रहेंगी.

आदिवासी सीटों पर असर की आशंका से बढ़ी चिंता

झारखंड में परिसीमन विवाद की सबसे बड़ी वजह, आदिवासी आरक्षित सीटों पर पड़ने वाला संभावित असर है. कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने आशंका जताई है कि, यदि पूरी तरह जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ, तो ST सीटों की संख्या कम हो सकती है. वर्तमान में राज्य में लोकसभा की 5 और विधानसभा की 28 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं. ऐसे में किसी भी बदलाव का सीधा असर आदिवासी राजनीति पर पड़ सकता है.

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सभी दलों की राय लगभग एक जैसी

इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता भी एकमत नजर आ रहे हैं. कांग्रेस के रामेश्वर उरांव का कहना है कि केवल जनसंख्या के आधार पर आदिवासी सीटों को कम करना सही नहीं होगा. वहीं, भाजपा नेता सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी आदिवासी सीटों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया है और इस मुद्दे पर राज्य सरकार को समर्थन देने की बात कही है.

अभी कोई अंतिम फैसला नहीं, प्रक्रिया जारी

फिलहाल झारखंड के लिए परिसीमन को लेकर कोई आधिकारिक अंतिम नक्शा जारी नहीं हुआ है. वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र 2026 के बाद होने वाली अगली जनगणना तक लागू रहेंगे. इसके बाद ही परिसीमन आयोग के गठन और संसद के नए कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. हालांकि, यह विषय सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है, जिस पर आने वाले समय में बहस और तेज होने की संभावना है.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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