झारखंड में आपदा में अवसर ढूंढ रहे दलाल, दवा से राशन तक की कालाबाजारी, सप्ताह भर में इतना महंगा हुआ राशन
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Apr 2021 8:09 AM
गोदाम भरा रहने पर भी खुदरा दुकानदारों को सप्लाई नहीं : वर्तमान स्थिति यह है कि गोदाम में चावल रहते हुए भी खुदरा दुकानदारों को अपर बाजार और पंडरा बाजार के थोक दुकानदार माल नहीं दे रहे हैं. माल देने को यदि राजी भी हुए, तो पांच दिन पहले की तुलना में अब प्रति बोरा अधिक कीमत मांग रहे हैं.
Coronavirus Update In Jharkhand, रांची : पिछले एक सप्ताह के अंदर खाद्य पदार्थों के भाव में खासी तेजी आ गयी है. पांच दिन पहले थोक मंडी पंडरा बाजार में मसूर दाल 70 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, अब इसकी कीमत बढ़ा कर 77-78 रुपये प्रति किलो कर दी गयी है. जबकि मूंग दाल 90 से बढ़ कर 92-93 रुपये, अरहर दाल 100 से बढ़ कर 102-103 रुपये, चीनी 38.50 से बढ़ कर 39 रुपये, चना दाल 65 से बढ़ कर 69 रुपये, चना 58 से बढ़ कर 60 रुपये, काबली चना 80 से बढ़ कर 82 रुपये प्रति किलो कर दिया है. इसी प्रकार हर प्रकार के चावल में प्रति क्विंटल 50-60 रुपये कीमतें बढ़ा दी गयी हैं.
गोदाम भरा रहने पर भी खुदरा दुकानदारों को सप्लाई नहीं : वर्तमान स्थिति यह है कि गोदाम में चावल रहते हुए भी खुदरा दुकानदारों को अपर बाजार और पंडरा बाजार के थोक दुकानदार माल नहीं दे रहे हैं. माल देने को यदि राजी भी हुए, तो पांच दिन पहले की तुलना में अब प्रति बोरा अधिक कीमत मांग रहे हैं.
जब खुदरा दुकानदारों को अधिक कीमत पर सामान मिलेगा, तो जाहिर है आम लोगों को इसका खामियाजा अधिक कीमत देकर चुकानी होगी. वहीं, खाद्य सामग्री के ही कई विक्रेता दबी आवाज में स्थानीय प्रशासन से जमाखोरों पर छापेमारी का आग्रह भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि गोदामों से बाहर निकले बिना सामान की कीमत कम नहीं होगी. थोक बाजार में कीमत बढ़ने के कारण खुदरा बाजार में भी कीमत बढ़ गयी है.
कोरोना काल में ऑक्सीजन की अत्यधिक खपत होने के कारण मांग बढ़ गयी है. वहीं बाजार में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी है. इस कारण आम दिनों की तुलना में ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत तीन गुना बढ़ गयी है. 7500 रुपये के ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए 18000 वसूला जा रहा है.
पांच हजार की रेमडेसिविर के 25 हजार तक वसूल रहे हैं माफिया
31,800 रुपये की दवा 2.10 लाख में बेच रहे हैं दलाल
कोरोना काल में आम लोगों की जान आफत में है. कालाबाजारियों ने आपदा को अवसर मान लिया है. कोविड-19 संक्रमितों के लिए उपयोगी दवाओं को दलाल मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं. पांच हजार रुपये की रेमडेसिविर के लिए जरूरतमंदों से 25 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं. वहीं, अल्जूमैब एल नाम की जीवनरक्षक दवा माफिया 2.10 लाख रुपये में बेच रहे हैं. बाजार में दवा की अनुपलब्धता के कारण मरता क्या न करता की तर्ज पर जरूरतमंद सब कुछ जानते हुए भी कई गुना अधिक कीमत पर दवाएं खरीदने पर मजबूर हैं.
कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा लिखी गयी दवाइयां मेडिकल स्टोर में नहीं मिल रही है. सेफ्टम 500 एमजी, डेक्सामेथसोन 4एमजी, पैन-डी, ए टू जेड, डोलो 650 एमजी, जेडेक्स एसएफ-2 जैसे आम दवाएं भी बाजार से गायब हो गयी हैं. जनता को शहर भर की दुकान घूमने के बावजूद दवा नहीं मिल रही है. लेकिन, दवाओं के सीएनएफ और होलसेलर राज्य सरकार को सभी दवाओं की समुचित उपलब्धता के लिए आश्वस्त कर रहे हैं. गुरुवार को ही दवा वितरकों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह के साथ हुई वीसी में सभी दवाओं की आसानी के साथ उपलब्ध होने का दावा किया.
दवाओं के वितरकों ने किसी भी दवा की कमी होने की बात नहीं की है. रेमडेसिविर समेत जिन दवाओं की कालाबाजारी की सूचना आ रही है, उसके पूरे स्टॉक की जांच करायी जायेगी. कालाबाजारी करनेवाले दवा माफिया या उसे गठजोड़ करने वाले सरकारी अफसर को पकड़ कर जेल में डाला जायेगा.
– अरुण कुमार सिंह, विकास आयुक्त, झारखंड
Posted By : Sameer Oraon
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