विष्णु अग्रवाल के व्यावसायिक भवन की चौथी मंजिल के ऊपर निर्माण पर रोक

Updated at : 20 Jun 2024 1:41 AM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने रांची के दीपाटोली स्थित सेना की छावनी के पास बन रहे विष्णु अग्रवाल के व्यावसायिक भवन की चौथी मंजिल के बाद निर्माण पर रोक लगा दी है. हालांकि, चौथी मंजिल तक पूरा हो चुके निर्माण कार्य में फिनिशिंग का काम करने की अनुमति दी है.

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विशेष संवाददाता, (रांची).

सुप्रीम कोर्ट ने रांची के दीपाटोली स्थित सेना की छावनी के पास बन रहे विष्णु अग्रवाल के व्यावसायिक भवन की चौथी मंजिल के बाद निर्माण पर रोक लगा दी है. हालांकि, चौथी मंजिल तक पूरा हो चुके निर्माण कार्य में फिनिशिंग का काम करने की अनुमति दी है. कोर्ट ने निर्माण कार्य का सेफ्टी ऑडिट करने का भी निर्देश दिया है. विष्णु अग्रवाल की कंपनी ने सेना की याचिका पर हाइकोर्ट द्वारा दिये गये फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. न्यायाधीश पीएस नरसिम्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार की पीठ में याचिका पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने पहले चरण की सुनवाई के दौरान विष्णु अग्रवाल की कंपनी की बहुमंजिली इमारत के निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. साथ ही सेना को अपना शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया था. सेना द्वारा शपथ पत्र दायर किये जाने के बाद याचिका पर फिर सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेना की छावनी के पास बन रही बहुमंजिली इमारत में चौथी मंजिल तक पूरा हो चुके निर्माण कार्य के बाद आगे के निर्माण कार्य पर पाबंदी जारी रखी. हालांकि, चौथी मंजिल तक पूरा हो चुके निर्माण कार्य के फिनिशिंग का काम करने की अनुमति दी. कोर्ट ने इस बहुमंजिली इमारत का सेफ्टी ऑडिट करने का निर्देश दिया है. विष्णु अग्रवाल की ओर से इसका विरोध किया गया, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया. साथ ही याचिकाकर्ता को सेफ्टी ऑडिट में सहयोग करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान के सभी फैसले कोर्ट के अंतिम फैसले से प्रभावित होंगे.

13 मंजिला भवन बना रही विष्णु अग्रवाल की कंपनी :

विष्णु अग्रवाल कंपनी सेना की छावनी के पास 13 मंजिला भवन का निर्माण करा रही है. फिलहाल चौथी मंजिल तक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. इस बहुमंजिली इमारत की लागत 168 करोड़ रुपये आंकी गयी है. निर्माण की खातिर धन जुटाने के लिए बैंकों से कर्ज और बड़ी कंपनियों से अग्रिम का सहारा लिया गया है. विष्णु अग्रवाल की इस कंपनी द्वारा किये गये निर्माण कार्य को सेना ने अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए हाइकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की एकल पीठ से सुनवाई के बाद सेना की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद सेना की ओर से हाइकोर्ट में एलपीए दायर किया गया था. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की अदालत ने सेना के एलपीए पर सुनवाई के बाद एकल पीठ के फैसला को रद्द कर दिया. हाइकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विष्णु अग्रवाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. इस याचिका पर फिर अगस्त के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होगी.

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