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भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय के रूप में विकसित बैरक नंबर 4 है खास, धरती आबा ने ली थी अंतिम सांस

Updated at : 09 Jun 2023 8:11 AM (IST)
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भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय के रूप में विकसित बैरक नंबर 4 है खास, धरती आबा ने ली थी अंतिम सांस

बिरसा मुंडा का शहादत दिवस आज 09 जून को मनाया जा रहा है. इसी दिन वर्ष 1900 में रांची जेल में बिरसा मुंडा ने अंतिम सांस ली थी. दरअसल, भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय में धरती आबा की यादें संजो कर रखी गयी हैं. प्राण त्यागने से पहले धरती आबा के अंतिम दिन वहीं गुजरे थे.

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भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय के रूप में विकसित किये गये पुराना जेल का बैरक नंबर चार खास है. इसी कमरे में भगवान बिरसा मुंडा को अंग्रेजों ने बंदी बना कर रखा था. प्राण त्यागने से पहले धरती आबा के अंतिम दिन वहीं गुजरे थे. उस कमरे को संग्रहालय में बदलकर उनकी यादों को संजोने की कोशिश की गयी है. जेल की बनी संरचना को उसी रूप में संरक्षित किया गया है. बिरसा मुंडा ने जिस कमरे में जीवन का अंतिम समय गुजारा, वहीं उनकी प्रतिमा स्थापित की गयी है. बगल के कमरे में भगवान बिरसा और उनके जीवन से जुड़ी जानकारी से अवगत कराया गया है.

शौर्य गाथा का संग्रहालय

राज्य सरकार ने 30 एकड़ में फैले पुराने जेल परिसर को पार्क और संग्रहालय के रूप में विकसित किया है. परिसर को भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह संग्रहालय का नाम दिया गया है. पुराना जेल परिसर के बाहर भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की गयी है, जिसका निर्माण जानेमाने मूर्तिकार श्री राम सुतार के निर्देशन में हुआ है. परिसर की दीवारों पर धरती बाबा की उक्तियां उकेरी गयी हैं. संग्रहालय में झारखंड के अन्य वीर शहीदों की जीवनी व देश की आजादी के लिए किये गये उनके संघर्ष की गाथा को भी बयां किया गया है. मुख्य भवन के सामने गंगा नारायण सिंह, पोटो हो, भागीरथी मांझी, वीर बुधु भगत, तेलंगा खड़िया, सिदो-कान्हू, नीलांबर-पीतांबर, दिवा-किसुन, गया मुंडा और टाना भगत की नौ-नौ फीट की प्रतिमा स्थापित की गयी है. हर प्रतिमा के सामने संबंधित महान विभूति के संघर्षपूर्ण जीवन को म्यूरल्स द्वारा प्रस्तुत किया गया है.

लेजर शो के जरिये दिखेगी धरती आबा की जीवनी

संग्रहालय परिसर में लेजर और लाइट शो, चित्रपट एवं म्यूजिकल फाउंटेन के माध्यम से जनजातीय क्रांति और राज्य के वीर स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी और संघर्ष बतायी जायेगी. लेजर व लाइट शो व चित्रपट के जरिये भगवान बिरसा की अमर गाथा का प्रदर्शन किया जायेगा. हालांकि, फिलहाल लेजर व लाइट शो एवं फिल्म को प्रदर्शन शुरू नहीं किया गया है. सिर्फ खास दिनों में ही ट्रायल रन चलाया जाता है. जुडको ने संग्रहालय और पार्क के संचालन की जिम्मेदारी कोलकाता की कंपनी सिंघल इंटरप्राइजेज को सौंपी है. जल्द ही लेजर व लाइट शो के अलावा म्यूजिकल फाउंटेन का भी नियमित प्रदर्शन शुरू होगा.

आदिवासी क्रांतिकारियों को रखने के लिए बना था जेल

अंग्रेजों ने छोटानागपुर में आदिवासी क्रांतिकारियों की बढ़ती संख्या की वजह से रांची में जेल बनवाया था. ब्रिटिश शासन काल में कैप्टन विलकिंसन ने रांची जेल का निर्माण कराया था. आदिवासी क्रांतिकारियों की बढ़ती संख्या के कारण ही रांची को अंग्रेजों ने जिला भी घोषित किया था. वर्ष 1900 में बिरसा मुंडा को उनके उलगुलान विद्रोह के लिए गिरफ्तार कर जेल लाया गया था. कहा जाता है कि इसी जेल में उन्होंने अपने अंतिम दिन गुजारे थे. हैजा की वजह से मृत्यु होने तक भगवान बिरसा जेल के बैरक में ही बंद कर रखे गये थे.

जनजातीय संस्कृति की मिलती है झलक

भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय में राज्य की जनजातीय संस्कृति की झलक भी दिखती है. छोटे से गांव और वहां काम करते ग्रामीणों का प्रारूप हर मन को मोह रहा है. आदमकद मूर्तियों के जरिये ग्रामीणों की जीवनशैली को बखूबी दर्शाया गया है. परिसर में एंफी थियेटर भी तैयार किया गया है. संग्रहालय में पुरानी संरचना को उसके उसी रूप में संरक्षित करते हुए पूरे परिसर को फूल-पौधों से खूबसूरत और मनोरम बनाया गया है.

25 एकड़ हिस्से में भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान

भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय और स्मृति पार्क को विकसित करने पर कुल 142.31 करोड़ रुपये खर्च कर किया गया है. इसमें 117.31 करोड़ रुपये झारखंड और 25 करोड़ रुपये भारत सरकार ने दिया है. परिसर के 25 एकड़ हिस्से में भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान है, जबकि, पांच एकड़ भूमि को संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है. वहां बागवानी, म्यूजिकल फाउंटेन, फूड कोर्ट, चिल्ड्रेन पार्क, इंफिनिटी पुल, पार्किंग तथा अन्य सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण भी किया गया है.

वाटर स्क्रीन शो में दिखेगी अमर शहीदों की जीवनी

पार्क परिसर में म्यूजिकल फाउंटेन के अलावा वाटर स्क्रीन शो भी चलाया जायेगा. संग्रहालय में राज्य के अमर शहीदों की जीवनी के अलावा पार्क में प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कराये जायेंगे. वहां देवघर का बाबाधाम मंदिर, चतरा का भद्रकाली इटखोरी मंदिर, रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर और गिरिडीह के सम्मेद शिखर पर आधारित लघु फिल्में दिखायी जायेंगी. अगले कुछ महीनों में इसे शुरू करने की तैयारी की जा रही है.

पार्क में नि:शुल्क प्रवेश बंद

पुराना जेल परिसर स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क एवं संग्रहालय में नि:शुल्क प्रवेश बंद कर दिया गया है. फिलहाल, वयस्कों का प्रवेश शुल्क 30 रुपये निर्धारित है. वहीं, बच्चों के लिए टिकट की कीमत 20 रुपये है. जल्द ही शुल्क में वृद्धि भी होगी. अभी पार्क व संग्रहालय परिसर में लेजर एंड लाइट शो, फिल्मों का प्रदर्शन व म्यूजिकल फाउंटेन का नियमित प्रदर्शन शुरू नहीं हुआ है. इन सभी सुविधाओं के शुरू होने पर इंट्री फीस में बदलाव होगा. मालूम हो कि कोलकाता के सिंघल इंटरप्राइजेज को सालाना एक करोड़ रुपये पर पार्क का संचालन सौंपा गया है. कंपनी राज्य सरकार की सहमति से प्रवेश शुल्क निर्धारित करेगी.

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