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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में अनुबंध पर चपरासी, अफसर से वीसी तक प्रभार में, शिक्षकों के 692 में 582 पद रिक्त

शिक्षकों, कर्मियों व अधिकारियों और अन्य आधारभूत संरचना की कमियों के कारण विवि अंतर्गत पांच नये कॉलेजों को अब तक आइसीएआर ने मान्यता नहीं दी गयी है. ये सभी कॉलेज और इसके छात्र आइसीएआर से मिलनेवाली विभिन्न सुविधाओं और लाभों से वंचित हैं.

रांची, संजीव सिंह : झारखंड राज्य के एकमात्र बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में चपरासी अनुबंध पर हैं, तो अधिकारी से लेकर वीसी तक के पद प्रभार में हैं. शिक्षकों के 692 स्वीकृत पदों में 582 से अधिक खाली हैं. विवि मुख्यालय सहित 11 कॉलेजों में अनुबंध पर नियुक्त शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है. मुख्यालय में अधिकारी के सभी पद प्रभार में हैं. कुलपति का पद तीन माह से खाली पड़ा है. राज्य के कृषि सचिव को कुलपति का प्रभार दिया गया है. वह भी सिर्फ रूटीन कार्य के लिए. विश्वविद्यालय में स्थिति यह है कि प्रोफेसर के पद पर अब लगभग छह ही शिक्षक हैं. यानी 75 स्वीकृत पद में 69 खाली हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर के 422 पद में से 326 से अधिक खाली हैं. वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर के 195 में से 186 पद खाली हैं. एसोसिएट प्रोफेसर के नहीं रहने पर पीजी सहित पीएचडी कोर्स प्रभावित हो रहे हैं. वेटनरी कॉलेज में शिक्षक के नहीं रहने पर दो पीजी कोर्स बंद करने पड़े. हर वर्ष 500 से अधिक विद्यार्थी एग्रीकल्चर, वेटनरी, फॉरेस्ट्री, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग और हॉर्टिकल्चर आदि विभागों में नामांकन लेते हैं, लेकिन इन्हें अनुबंध पर नियुक्त शिक्षक पढ़ा रहे हैं. कर्मचारियों के आधे से अधिक पद खाली हैं. अनुबंध पर कर्मचारियों को रखकर काम चलाया जा रहा है.

विवि में अधिकारियों के ये पद प्रभार में हैं

कुलपति, वीसी के सचिव, एग्रीकल्चर, वेटनरी व फॉरेस्ट्री सहित सभी कॉलेज में डीन के पद, रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार के दो पद, असिस्टेंट रजिस्ट्रार के तीन पद, निदेशक प्रशासन, उपनिदेशक प्रशासन, सहायक निदेशक प्रशासन के दो पद, नियंत्रक, सहायक नियंत्रक, निदेशक (पीआइएम), निदेशक अनुसंधान, अपर निदेशक अनुसंधान, उपनिदेशक अनुसंधान (मुख्यालय), उपनिदेशक अनुसंधान (वेटनरी), निदेशक प्रसार शिक्षा, सहायक निदेशक प्रसार शिक्षा, डीन पीजी, डीएसडब्ल्यू, उप निदेशक (वर्क्स एंड प्लांट), निदेशक सीड एंड फॉर्म आदि पद प्रभार में चल रहे हैं.

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पांच कॉलेजों को आइसीएआर से मान्यता नहीं

शिक्षकों, कर्मियों व अधिकारियों और अन्य आधारभूत संरचना की कमियों के कारण विवि अंतर्गत पांच नये कॉलेजों को अब तक आइसीएआर ने मान्यता नहीं दी गयी है. ये सभी कॉलेज और इसके छात्र आइसीएआर से मिलनेवाली विभिन्न सुविधाओं और लाभों से वंचित हैं. छह वर्ष पहले विवि के अधीन सात नये कॉलेज स्थापित किये गये. गोड्डा, देवघर, खूंटपानी, गुमला, हंसडीहा, गढ़वा और कांके में स्थित कॉलेजों में एसोसिएट डीन का पद भी प्रभार में है, जबकि शिक्षक एवं कर्मचारी सभी स्वीकृत पदों पर छह-छह माह के अनुबंध पर कार्यरत हैं. राज्य के एकमात्र वेटनरी कॉलेज की मान्यता भी दशकों से खतरे में है. दर्जनों बार वीसीआइ संस्थान से मान्यता नहीं दिये जाने का नोटिस तक आ चुका है. दूसरी तरफ राज्य सरकार ने वेटनरी यूनिवर्सिटी की स्थापना करने की घोषणा की है.

विवि को नियुक्ति का अधिकार नहीं

तत्कालीन प्रभारी कृषि सचिव अरुण कुमार सिंह के कार्यकाल में विवि से नियुक्ति का अधिकार छीन लिया गया है. प्रोफेसर के पदों के लिए जेपीएससी को नियुक्ति का अधिन्यकार दिया गया है. इसी तरह तृतीय श्रेणी के पदों के लिए जेएसएससी को यह अधिकार दिया गया है, जबकि देश के अ कृषि विश्वविद्यालयों में नियुक्ति का अधिकार विवि को ही है.

Prabhat Khabar News Desk
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