भाटिया वाइंस ने घटिया शराब की आपूर्ति की, रिश्वत में प्रति पेटी 300-600 रुपये दिये

राज्य में भाटिया वाइंस के संचालक भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ने घटिया रोमिया ब्रांड की शराब की आपूर्ति की, जिससे सरकार को 136 करोड़ के राजस्व का नुकसान पहुंचा है.
अमन तिवारी, रांची. राज्य में भाटिया वाइंस के संचालक भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ने घटिया रोमिया ब्रांड की शराब की आपूर्ति की, जिससे सरकार को 136 करोड़ के राजस्व का नुकसान पहुंचा है. भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी हैं. इसका खुलासा एसीबी की जांच में हुआ है. जांच में आये तथ्यों के अनुसार, भूपेद्रपाल की कंपनी का पूरा नाम मेसर्स भाटिया वाइंस मर्चेंट प्राइवेट लिमिटेड है.
देसी शराब की होलसेल सप्लाई के लिए काम मिला था
कंपनी को राज्य में देसी शराब होलसेल सप्लाई के लिए काम मिला था. लेकिन यह काम टेंडर के नियमों की अनदेखी कर दी गयी. कंपनी देसी शराब रोमिया ब्रांड के नाम से ओम साइ बेवरेज को सप्लाई करने का काम करती थी. लेकिन एफएसल की रिपोर्ट के आधार पर एसीबी ने जांच में पाया है कि कंपनी द्वारा राज्य में रोमिया ब्रांड की घटिया शराब की आपूर्ति की गयी. जिसका मानव के स्वास्थ्य पर खराब या बुरा असर हो सकता था. एसीबी ने सिद्धार्थ सिंघानिया के बयान के आधार पर अपनी केस डायरी में लिखा है कि भाटिया वाइंस का नाम सिद्धार्थ सिंघानिया से पूछताछ में सामने आया था.
प्रति पेटी 300-600 रुपये की वसूली की जाती थी
पूछताछ में यह भी बात सामने आ चुकी है कि देसी शराब की आपूर्ति करनेवाली कंपनी से प्रति पेटी 300-600 रुपये की वसूली की जाती थी. पैसा वसूली का यह काम ओम साई बेवरेज और दीशिता वेंचर के जरिये विनय चौबे और अरुणपति त्रिपाठी करते थे. इन्हीं तथ्यों के आधार पर भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया को केस में दोषी पाते हुए अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया है. ज्ञात हो कि भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया को कुछ दिन पूर्व एसीबी की टीम गिरफ्तारी करने के लिए छत्तीसगढ़ भी गयी थी. लेकिन भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया एसीबी की टीम से बचकर भागने में सफल रहे. इसी कारण एसीबी द्वारा छापेमारी में शामिल सबइंस्पेक्टर सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया जा चुका है.नोटिस भेजने के बाद भी नहीं आये भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया
एसीबी द्वारा तैयार केस रिकॉर्ड के अनुसार, केस के अनुसंधानक ने भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया को केस में पूछताछ के लिए चार बार नोटिस भेजा था. पहली बार नोटिस 29 जुलाई को, दूसरी बार 11 अगस्त को, तीसरी बार 25 अगस्त को और चौथी बार 10 सितंबर को भेजा गया था. लेकिन भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया कभी भी पूछताछ के लिए एसीबी मुख्यालय नहीं पहुंचे.
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