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सफाई में मिले गर्डर पर बीडीओ व ठेकेदार ने किये अपने-अपने दावे

Updated at : 05 Dec 2024 9:44 PM (IST)
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सफाई में मिले गर्डर पर बीडीओ व ठेकेदार ने किये अपने-अपने दावे

सफाई के दौरान ही परिसर में लोहे का गर्डर मिला है. इसकी जानकारी मिलने पर प्रखंड कार्यालय भवन का निर्माण करनेवाले संवेदक केएनपी सिंह गुरुवार को खलारी आये और गर्डर पर अपना दावा किया.

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प्रतिनिधि, खलारी : खलारी प्रखंड परिसर की सफाई के दौरान मिला लोहे की कीमती गर्डर विवादों में आ गया है. लंबे समय के बाद प्रखंड परिसर की सफाई करायी जा रही है. सफाई के दौरान ही परिसर में लोहे का गर्डर मिला है. इसकी जानकारी मिलने पर प्रखंड कार्यालय भवन का निर्माण करनेवाले संवेदक केएनपी सिंह गुरुवार को खलारी आये और गर्डर पर अपना दावा किया. बताया कि वर्ष 2014 में उनके फर्म ने ही खलारी प्रखंड भवन, चहारदीवारी, मुख्य द्वार तथा वर्ष 2016 में प्रखंडकर्मियों का आवास बनवाया था. चूंकि यह क्षेत्र तब उग्रवाद प्रभावित था, इसलिए तत्कालीन थाना प्रभारी व प्रखंड अधिकारी के सुझाव पर प्रखंड कार्यालय भवन निर्माण में काम आयी मशीनों व अन्य उपकरणों को प्रखंड परिसर में ही रखा गया था. बताया कि निर्माण का कार्य समाप्त होने के पश्चात उन्होंने तत्कालीन प्रखंड के अधिकारी से आग्रह किया था कि चूरी में सपही नदी पर उनका पुल निर्माण कार्य चल रहा है, वह भी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है तथा वहां भी उग्रवादी घटना को अंजाम दिया गया है. अतः कुछ निर्माण सामग्री को प्रखंड परिसर में ही रहने दें. तत्कालीन प्रखंड अधिकारी से इसकी मौखिक स्वीकृति मिलने पर लोहे का गर्डर व सरिया प्रखंड परिसर में रख दिया गया. पुल निर्माण समाप्त होने के पश्चात काफी सामान का उठाव कर लिया गया, किंतु कुछ सामान गायब हो गये. प्रखंड परिसर से मिले गर्डर पर दावा करते हुए कहा कि उसे गैस कटर से काट दिया गया है. श्री सिंह ने बताया कि करीब पांच-छह लाख रुपये कीमत का गर्डर काटकर बर्बाद कर दिया गया.

चोरी का सामान होने का संदेह : बीडीओ

इधर बीडीओ संतोष कुमार ने कहा कि उपायुक्त के निर्देश पर प्रखंड परिसर की सफाई करायी जा रही है. इसी दौरान जमीन के नीचे से गर्डर मिला है. उन्हें संदेह है कि यह चोरी का सामान है, जिसे छिपा कर रखा गया था. संवेदक के दावे पर बीडीओ ने कहा कि दस साल पहले प्रखंड परिसर में किस प्रावधान के तहत, किसकी अनुमति से गर्डर रखा गया था. इसकी अनुमति पत्र लायें. क्या रखा गया सामान पाने के लिए कभी पत्राचार किया गया. संबंधित सभी पत्र की प्रतिलिपि लायें. यदि संवेदक ने लिखित अनुमति से सामान रखा था, तब भी प्रखंड परिसर में रखने के लिए दस साल का किराया जमा करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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