ranchi news : बांग्ला सांस्कृतिक मेला में कला और संस्कृति का संगम, संगीत और हास्य नाटकों से सुहानी हो गयी शाम

Updated at : 11 May 2025 1:16 AM (IST)
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ranchi news : बांग्ला सांस्कृतिक मेला में कला और संस्कृति का संगम, संगीत और हास्य नाटकों से सुहानी हो गयी शाम

बिरसा मुंडा स्मृति पार्क बांग्ला के प्रख्यात कलाकार, स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार, चित्रकार, फिल्मकार और अभिनेताओं के पोस्टर से सजा दिखा.

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रांची़ बिरसा मुंडा स्मृति पार्क बांग्ला के प्रख्यात कलाकार, स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार, चित्रकार, फिल्मकार और अभिनेताओं के पोस्टर से सजा दिखा. शनिवार को दिन भर लोग आते-जाते रहे. शाम में बारिश के बावजूद भीड़ दिखी. यहां बंगाली युवा मंच चैरिटेबल ट्रस्ट ने बांग्ला सांस्कृतिक मेला लगाया गया है. मेला के दूसरे दिन कई सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए. इसकी शुुरुआत ब्लड डोनेशन कैंप से हुई, जिसमें 18 यूनिट रक्त इकट्ठा हुआ. इस दौरान रांची के विशिष्ट चित्रकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. शाम में साहित्य सभा हुई. इसमें बंगाल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार समरेश बसु की 100वीं जयंती के अवसर पर डॉ राम रंजन सेन ने अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि समरेश बसु को विभिन्न पुरस्कारों से नवाजा गया. साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ. कई उपन्यास और साहित्य पर काम किए. एक साल में उनकी किताब प्रजापति की 48000 प्रतियां बिक गयीं. बांग्ला मेला का आयोजन सुप्रियो भट्टाचार्य की देखरेख में हो रहा है. बांग्ला मेला में कई स्टाॅल भी लगाये गये हैं, जिसमें बंगला साहित्य, हस्तशिल्प, कपड़े, ज्वेलरी आदि उपलब्ध हैं. इन स्टॉल पर कला और संस्कृत की झलक देखी जा सकती है.

संगीत से सजी शाम

कोलकाता के मल्हार कर्मकार बैंड ने संगीत की प्रस्तुति दी. उन्होंने बेहाग ज्याेदी ना होए राजी…,आमी चेये चेये देखी सारा दिन…आदि गीत प्रस्तुत किये, जिसका लोगों ने खूब आनंद लिया.

नाटक यम ऐप ने खूब हंसाया

हास्य व्यंग्य नाटक यम ऐप की प्रस्तुति हुई. इसमें दिखाया गया कि यमराज के पास मोबाइल ऐप होता, तो वे अपना काम कैसे करते. इसमें लोग हंस हंस कर लोटपोट हाे उठे. नाटक में यह संदेश दिया गया कि हम जितने भी अपने जीवन में ऊपर की ओर उड़ने का कोशिश करें, लेकिन पैर जमीन पर ही होना चाहिए.

नाटक टापुर टूपुर नाटक का हुआ मंचन

इस दौरान मनोज मित्र द्वारा रचित नाटक टापुर टूपुर नाटक का मंचन हुआ. इसमें दिखाया गया कि गांव के लोग शहर आते हैं, जिनका बातचीत, व्यवहार, रहन-सहन का मजाक उड़ाया जाता है. लेकिन नाटक के अंत में यह देखा जाता है कि जीवन का असल मूल्य वही जानते हैं. जीवन को बेहतर ढंग से जीते हैं, मानवता के लिए लोगों की मदद करते हैं. इसे कोलकाता से आयी टीम ने प्रस्तुत किया.

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