'सांसदों और विधायकों को एके रॉय से सीखने की जरूरत', भाकपा माले ने पुण्यतिथि पर 'सियासत के संत' को दी श्रद्धांजलि

पुण्यतिथि पर एके रॉय को श्रद्धांजलि अर्पित करते भाकपा माले के नेता और कार्यकर्ता
AK Roy Death Anniversary: भाकपा माले ने आज सोमवार को पूर्व सांसद एके रॉय को बोकारो के चलकरी में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. भाकपा माले राज्य कमेटी के सदस्य भुवनेश्वर केवट ने कहा कि कॉमरेड एके रॉय की राजनीतिक सादगी और ईमानदारी सियासत में मिसाल है. तीन-तीन बार सांसद और विधायक रहने के बावजूद उन्होंने कभी पेंशन नहीं ली. सांसदों और विधायकों को एके रॉय से सीखने की जरूरत है.
AK Roy Death Anniversary: रांची-राजनीतिक सादगी, ईमानदारी और जन समर्पण के प्रतीक कॉमरेड एके रॉय की पुण्यतिथि पर भाकपा माले ने आज बोकारो के चलकरी में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. सबसे पहले उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर एक मिनट का मौन रखा गया. श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबंधित करते हुए भाकपा माले राज्य कमेटी के सदस्य भुवनेश्वर केवट ने कहा कि आज जन सवालों से ज्यादा अपने वेतन भत्ता और पेंशन बढ़ाने के लिए लच्छेदार भाषण देने वाले सांसदों और विधायकों को एके रॉय से सीखने की जरूरत है. उन्होंने तीन-तीन बार सांसद और विधायक रहने के बावजूद कभी पेंशन नहीं ली. कोयलांचल में मजदूर आंदोलन के नेता होने के बावजूद करप्शन की काली कालिख से बेदाग रहे.
श्रद्धांजलि कार्यक्रम को इन्होंने भी किया संबोधित
भाकपा माले पेटरवार प्रखंड सचिव पंचानन मंडल, युवा नेता राज केवट, खूबलाल नायक, लखी राम मांझी, शनिचर सिंह, कमल सिंह, जय कुमार नायक, शंकर मांझी, लखन प्रसाद नायक, सुगिया देवी समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित किया.
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कौन थे एके रॉय?
सियासत के संत, मार्क्सवादी चिंतक और पूर्व सांसद एके रॉय का जन्म 15 जून 1935 को हुआ. 21 जुलाई 2019 को उनका निधन हुआ. आज उनकी पुण्यतिथि है. उन्होंने तीन बार संसद में धनबाद का प्रतिनिधित्व किया. वे देश के इकलौते सांसद थे, जिन्होंने जीवनभर पेंशन नहीं ली. धनबाद की राजनीति में अमिट छाप छोड़ने और अपनी सादगी से जनता के दिलों पर राज करने वाले एके राय की प्रशंसा विरोधी भी करते थे. ऐसी सादगी और ईमानदारी बहुत कम नेताओं में देखने को मिलती है. उन्हें देखकर यकीन नहीं होता था कि वे तीन-तीन बार विधायक और सांसद रह चुके हैं.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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