Agriculture bill 2020, krishi Bill 2020 : कृषि बिल के खिलाफ मुखर हुए सीएम हेमंत, कहा- सड़क पर होगा उलगुलान

Updated at : 26 Sep 2020 5:53 AM (IST)
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Agriculture bill 2020, krishi Bill 2020 : कृषि बिल के खिलाफ मुखर हुए सीएम हेमंत, कहा- सड़क पर  होगा उलगुलान

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि केंद्र सरकार ने कृषि बिल के जरिये संघीय ढांचे पर कुठाराघात किया है. इस बिल के खिलाफ सड़क पर उतर कर उलगुलान होगा. श्री सोरेन शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में कृषि बिल पर प्रेस को संबोधित कर रहे थे.

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रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि केंद्र सरकार ने कृषि बिल के जरिये संघीय ढांचे पर कुठाराघात किया है. इस बिल के खिलाफ सड़क पर उतर कर उलगुलान होगा. श्री सोरेन शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में कृषि बिल पर प्रेस को संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों की उपेक्षा कर रही है. कृषि, केंद्र के साथ राज्यों का भी विषय है, लेकिन इस पर न तो राज्य सरकार से राय ली गयी और न ही किसानों से. बस इस बिल को येन-केन-प्रकारेण पारित कर देश के किसानों पर थोप दिया गया है.

केंद्र को पता था कि इस बिल का विरोध होगा. इसलिए जान-बूझकर कोरोना काल को चुना और पांच जून को पहले अध्यादेश जारी कर बिल जबरन पारित करा लिया. श्री सोरेन ने कहा है कि कृषि बिल के खिलाफ देश के सभी किसान संघों ने शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान किया. चारों तरफ विरोध शुरू हो गया है. केंद्र सरकार ने संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का जिस प्रकार दुरुपयोग किया है, वह आजाद भारत के बाद पहली बार देखने को मिला है. यह गुंडागर्दी और तानाशाही है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ राज्य सरकारों और आमलोगों की कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. समझ नहीं आ रहा है कि पीएम मोदी देश को किस दिशा में ले जाना चाह रहे हैं. अभी देश में जीएसटी भी ठीक से लागू नहीं हो सका है. जीएसटी में करोड़ों के घोटाले की खबरें देश भर से आ रही हैं.

बोले मुख्यमंत्री

  • इस बिल को येन-केन-प्रकारेण देश के किसानों पर थोप दिया गया है

  • केंद्र को पता था कि इसका विरोध होगा, इसलिए कोरोना काल को चुना

  • इस बिल पर न तो राज्य सरकार से राय ली गयी और न ही किसानों से

कांट्रैक्ट फार्मिंग से बढ़ेगी किसानों की आत्महत्या : कांट्रैक्ट फार्मिंग के मुद्देे पर सीएम ने कहा कि यह अनुबंध की खेती है. राज्य में अनुबंध कर्मियों की दुर्दशा देखी जा सकती है. इससे किसानों का हित नहीं होगा. व्यापारी किसानों को बीज, पैसे देकर प्रोत्साहित करेगा और उसकी उपज खरीद लेगा. अगर कांट्रैक्ट टूट गया, तो किसानों को न्याय कहां मिलेगा? यदि, अडानी-अंबानी ने मंगरा-मुंडा से करार किया और शर्तें पूरी नहीं की, तो आदिवासी कोर्ट के चक्कर काटते रह जायेंगे. किसानों के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा.

सीएम बोले-कृषि राज्य का विषय है : सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनमाने ढंग से कृषि बिल देश पर थोप दिया. तीन परिस्थितियों में ही ऐसा किया जा सकता है. पहला, जब देश में आपात स्थिति हो. दूसरा, राज्य सरकारों की ओर से कृषि नीति में बदलाव का अनुरोध किया गया हो तथा तीसरा, जब दो तिहाई सांसद बोले कि देश हित में कृषि नीति में बदलाव किया जाये. पर ऐसा कहीं कुछ नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री ने चाणक्य नीति के हवाला देते हुए कहा कि जिस देश का राजा व्यापारी होता है, उस देश की प्रजा भिखारी होगी.

पूरे देश में थोप दिया गया बिल : सीएम ने कृषि बिल को झारखंड में लागू करने के संबंध में पूछे जाने पर कहा : लागू करने की बात कहां? यह तो पूरे देश में थोप दिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नाबार्ड के साथ मिल कर ग्राम स्तर पर बाजार की व्यवस्था कर रही है. ताकि बिचौलिये की जरूरत न पड़े. इसके लिए 250 करोड़ रुपये की योजना बनायी गयी है.

Post by : Pritish Sahay

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