Political news : केंद्र से सहायता में भारी गिरावट, झारखंड के राजस्व लक्ष्यों पर संकट गहराया

Published by : RAJIV KUMAR Updated At : 02 Dec 2025 11:00 PM

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सरकार को केंद्रीय सहायता एवं अनुदान मद में वार्षिक लक्ष्य का सिर्फ 11.30 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ

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रांची. चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में झारखंड सरकार को केंद्र से मिलने वाली सहायता और अनुदान राशि में बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है. महालेखाकार (एजी) की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को केंद्रीय सहायता एवं अनुदान मद में वार्षिक लक्ष्य का सिर्फ 11.30 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 23.09 प्रतिशत था. रिपोर्ट बताती है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष कुल 1,43,479.14 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा था, मगर सितंबर 2025 तक राज्य को केवल 46,602.55 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए. यह आंकड़ा वार्षिक लक्ष्य का 32.48 प्रतिशत है, जो राजस्व उपलब्धि की धीमी रफ्तार को दर्शाता है.

राज्य के अपने राजस्व स्रोतों की स्थिति चिंताजनक

राज्य के आंतरिक राजस्व स्रोत भी उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाये हैं. राजस्व एवं निबंधन विभाग को छोड़ कर किसी भी विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में अपने वार्षिक लक्ष्य का 50 प्रतिशत भी हासिल नहीं किया है. राजस्व एवं निबंधन विभाग ने 824.39 करोड़ रुपये की कमाई कर 55.03 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है, जो सभी विभागों में सर्वाधिक है.

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी भी घटी

केंद्र से मिलने वाले करों में राज्य सरकार को कुल 47,041.38 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था. लेकिन, पहले छह महीनों में केवल 18,188.97 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए, जो लक्ष्य का 38.67 प्रतिशत है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह उपलब्धि 44.66 प्रतिशत थी, जिससे स्पष्ट है कि इस वर्ष केंद्रीय करों की प्राप्ति में भी कमी आयी है.

केंद्रीय सहाय्य अनुदान में रिकॉर्ड गिरावट

सबसे गंभीर स्थिति केंद्रीय सहाय्य अनुदान की है. इस मद में सरकार को 17,064.91 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी, जबकि राज्य को अब तक सिर्फ 1,927.66 करोड़ रुपये ही मिले हैं. यह लक्ष्य का सिर्फ 11.30 प्रतिशत है. पिछले वर्ष की तुलना में यह गिरावट चिंताजनक मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र से मिलने वाली सहायता में गिरावट का सीधा असर राज्य की विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर पड़ सकता है. वित्त विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि यदि अगले महीनों में राजस्व प्रवाह में सुधार नहीं हुआ, तो सरकार को अपने व्यय में कटौती करनी पड़ सकती है.

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