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मुसलिम समाज की समस्याएं यथावत

27 Feb, 2017 6:42 am
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मुसलिम समाज की समस्याएं यथावत

रांची : राज्य के मुसलिम हाशिये में हैं. वर्तमान में सरकार उर्दू भाषा को लेकर होने वाली नियुक्ति में भेदभाव कर रही है. उक्त बातें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कही. वे रविवार को कडरू ईदगाह मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय मुसलिम यूथ सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. कार्यक्रम का […]

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रांची : राज्य के मुसलिम हाशिये में हैं. वर्तमान में सरकार उर्दू भाषा को लेकर होने वाली नियुक्ति में भेदभाव कर रही है. उक्त बातें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कही. वे रविवार को कडरू ईदगाह मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय मुसलिम यूथ सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन ऑल मुसलिम यूथ एसोसिएशन (आम्या) के तत्वावधान में किया गया था.
श्री भगत ने कहा कि 14.5 फीसदी आबादी होने के बावजूद इनकी समस्याएं यथावत हैं. इन समस्याओं को दूर करने के लिए हमें एकजुट होने की आवश्यकता है. आम्या के अध्यक्ष एस अली ने लोगों को मुसलमानों की समस्याओं से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि हमारे मुद्दों को प्रमुखता से नहीं उठाया गया. इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियां दोषी हैं.
इस अवसर पर पूर्व सांसद सह केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि इनका सवाल सही और लाजिमी है. शैक्षणिक, आर्थिक एवं सामाजिक विकास की गति काफी धीमी है. मौजूदा सरकार में शमशान और कब्रिस्तान की भी तुलना की जा रही है. यूपीए सरकार में मुसलिम कल्याण के लिए जो योजनाएं चल रही थीं, उसे भी बंद कर दिया गया है. ऐसे में मुसलिमों का विकास कैसे होगा. जेवीएम नेता व पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य अब जवान हो चला है, लेकिन यहां के मुसलमानों की हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है. आदिवासी–मूलवासी को एक-दूसरे से लड़वाया जा रहा है. सम्मेलन में अंजुमन के कार्यकारी अध्यक्ष इबरार अहमद, खालिद खलील,सईद, हुसैन कासिम कच्छी, नाजिया तबस्सुम, डाॅ असलम परवेज, नेहाल अहमद, तौहिद आलम आदि थे.
सम्मेलन में जो प्रस्ताव रखे गये :
उर्दू शिक्षकों की बहाली में आरक्षित एसटी–एससी पद को 10 वर्ष विलोपित कर पिछड़ा वर्ग में समाहित करने, उत्क्रमित राजकीय हिंदी मवि (जहां उर्दू भाषी छात्र अध्ययनरत हैं) में उर्दू शिक्षकों का पद सृजन, आलिम–फाजिल परीक्षा रांची विवि से लेने, उर्दू एकेडमी, अल्पसंख्यक आयोग, वक्फ न्यायाधिकरण, वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम सदस्यों का मनोनयन समेत कई प्रस्ताव शामिल हैं.
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