Table of Contentsबांग्लादेश में हिंदुओं पर क्यों हो रहे हैं हमले?बांग्लादेश में हिंदुओं को लेकर क्या सोचते हैं वहां के लोग?बांग्लादेश में हिंदुओं की कैसी है स्थिति और जनसंख्या? Save Bangladeshi Hindus : सेव बांग्लादेशी हिंदू यह कीवर्ड सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है और इस हैशटैग पर कई वीडियो, फोटो और कमेंट आ रहे हैं, जो बांग्लादेशी हिंदुओं को बचाने की मांग कर रहे हैं. बांग्लादेश में वहां के युवा नेता उस्मान हादी की मौत के बाद जो हिंसा भड़की उसकी आंच में वहां के हिंदू अल्पसंख्यक जल रहे हैं. वायरल वीडियो –फोटो में उनकी पीड़ा साफ झलक रही है, बावजूद इसके उनकी रक्षा के लिए कोई वैश्विक पहल नहीं हो रही है. बांग्लादेश में हिंदुओं पर क्यों हो रहे हैं हमले? बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की सबसे बड़ी वजह है कट्टरपंथ. वहां अभी राजनीतिक अस्थिरता है, अंतरिम सरकार बहुत ही कमजोर है, जिसकी वजह से प्रशासन मुस्तैद नहीं है. इसका प्रभाव सीधे तौर पर अल्पसंख्यकों पर पड़ रह है और इस्लामिक कट्टरपंथी लोग हिंदुओं पर आक्रमण कर रहे हैं. उनकी यह सोच है कि हिंदू, भारत समर्थक विचारधारा के हैं, जो उनकी राष्ट्रवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के विपरीत है. कट्टरपंथी इस्लामिक सोच की राजनीतिक पार्टी जमात ए इस्लामी बांग्लादेश को एक इस्लामिक कंट्री के रूप में देखती है और यहां के हिंदुओं को बाहरी मानती है. उनका यह मानना है कि देश में जो हिंदू हैं, वो भारत के समर्थक हैं. इसी सोच के लोगों ने बांग्लादेशी हिंदुओं का जीना हराम कर रखा है. बांग्लादेश में हिंदुओं को लेकर क्या सोचते हैं वहां के लोग? बांग्लादेश में हिंदुओं को लेकर वहां के लोग दो खेमों में बंटे हैं. एक सोच के समर्थक हिंदुओं को अपने देश का मानते हैं और यह भी मानते हैं कि संविधान ने सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार दिया है, जबकि दूसरी सोच इसके विपरीत है. विपरीत सोच वाले लोग हिंदुओं पर हमले करते हैं, उन्हें देश से निकालना चाहते हैं. बांग्लादेशी हिंदुओं पर अत्याचार बांग्लादेश में एक हिंदू दीपू चंद्र दास भालुका की माॅब लिंचिंग पर बांग्लादेश की प्रतिष्ठित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक्स पर आज एक पोस्ट लिखा है और बताया है कि किस प्रकार दीपू चंद्र दास की लिंचिंग में जेहादियों की अहम भूमिका है. तस्लीमा नसरीन ने लिखा है कि पैगंबर की निंदा के नाम पर जिहादियों ने एक बेकसूर की जान ली है. वो सवाल पूछ रही हैं कि अब दीपू चंद्र का परिवार क्या करेगा, क्योंकि दीपू अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ व्यक्ति था? क्या सरकार उनके लिए कुछ करेगी. 2024 में 13 अगस्त को तस्लीमा नसरीन ने प्रभात खबर से बात की थी और बताया था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की घटना कोई नई नहीं है. उन्होंने बताया था कि 1947 में बांग्लादेश में 30% आबादी हिंदुओं की थी, जो अब 8% हो गई है. राजनीति के नाम पर हिंदुओं पर अटैक होते हैं. मैंने अपनी किताब लज्जा में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए हमलों का जिक्र किया है. चूंकि बांग्लादेश में बहुसंख्यक आबादी मुसलमानों की है, इसलिए राजनीतिक पार्टियां उन्हें संतुष्ट करने के लिए भी हिंदुओं पर हो रहे हमले को इग्नोर करती है. तस्लीमा नसरीन बताती हैं कि शुरुआत में बांग्लादेश की स्थिति ऐसी नहीं थी, लेकिन धीरे–धीरे कट्टरपंथ बढ़ा और जिहादियों का असली चेहरा सबके सामने है. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें बांग्लादेश में हिंदुओं की कैसी है स्थिति और जनसंख्या? बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक है, उनकी स्थिति पर बात करते हुए तस्लीमा नसरीन ने बताया था कि बांग्लादेश शुरुआत में एक सेक्यूल र देश था, लेकिन 80 के दशक में इस्लाम को देश का धर्म बना दिया गया. इसके साथ ही ‘बिस्मिल्लाह उर रहमान उर रहीम’ शब्द को संविधान में जोड़ दिया गया. यह सबकुछ हुआ जिया उर रहमान और जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद के समय में. ये दोनों और इनके बाद भी जो लोग सत्ता में आए उन्होंने जीवनपर्यंत सत्ता में बने रहने के लिए इस्लाम के मानने वालों को यह दिखाया कि वे उनके हितैषी हैं इसलिए हिंदुओं या अन्य धर्म को मानने वालों के खिलाफ नफरत फैलाई गई. मस्जिद बनाए गए मदरसे बनाए गए, लेकिन इन शासकों ने कभी भी देश में शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के कार्यों पर ध्यान नहीं दिया. जब मदरसों में मुल्ला-मौलवियों ने बच्चों का ब्रेन वाॅश किया, उन्हें कट्टपपंथी बनाने का काम किया, तो बांग्लादेश की किसी भी सरकार ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की, क्योंकि मुसलमानों का हितैषी बनने से उनकी सरकार ज्यादा दिनों तक सत्ता में रह सकती है. बांग्लादेश एक ऐसा देश है, जहां की बहुसंख्यक आबादी मुसलमान है. हिंदू आज की स्थिति में बमुश्किल 7–8 प्रतिशत ही बचे हैं, जिन्हें हमेशा डर बना रहता है. ये भी पढ़ें : बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले के पीछे राजनीति, मदरसा और मौलवी : तसलीमा नसरीन Osman Hadi : उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा, भारत के खिलाफ माहौल, हिंदुओं पर अत्याचार