एक साथ चुनाव होने पर केंद्र में रहनेवाली पार्टी को फायदा

रांची: नेशनल इलेक्शन वाच के झारखंड चैप्टर (मंथन युवा संस्थान) एवं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(एडीआर)नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाने की संभावनाएं और चुनौतियां पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. होटल ट्राइडेंट इन में आयोजित उक्त संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए एडीआर के राष्ट्रीय समन्वयक […]
रांची: नेशनल इलेक्शन वाच के झारखंड चैप्टर (मंथन युवा संस्थान) एवं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(एडीआर)नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाने की संभावनाएं और चुनौतियां पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. होटल ट्राइडेंट इन में आयोजित उक्त संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए एडीआर के राष्ट्रीय समन्वयक अनिल वर्मा ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव को एक साथ कराये जाने पर व्यापक मंथन की जरूरत है.
कुछ लोगों का मानना है कि इससे चुनाव खर्च कम आयेगा और विकास कार्यों में तेजी आयेगी, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि यह भारत के संघीय ढांचा के खिलाफ है और इससे केंद्र सरकार को ही लाभ मिलने की संभावना अधिक है. उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि 1999 से 2014 के बीच जिन राज्यों में संसद और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए हैं, वहां केंद्र में रहनेवाली पार्टी को फायदा पहुंचा है. उन्होंने कहा कि एडीआर देश के अलग–अलग राज्यों में परिचर्चा का आयोजन कर रहा है, ताकि इस मुद्दे पर सघन चर्चा हो सके और इसका नफा–नुकसान नागरिक कर सके.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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