मोदी का झारखंड दौरा : प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र

Updated at : 02 Oct 2015 7:12 AM (IST)
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मोदी का झारखंड दौरा : प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र

आदरनीय प्रधानमंत्री जी, बहुत-बहुत बधाई. बधाई इसलिए कि ‘इंडिया’ के अट्टहासों से डरी सहमी भारतमाता अब सर उठाये खड़ी दिखाई देने लगी है. गंगा मइया, नवरात्रि, वाराणसी, खेत-खलिहान, किसान, भगत सिंह और गांधीजी जैसे लब्ज हवा में लहराते कानों में दस्तक दे रहे हैं. सालों के बाद लगता है भारत की छवि किसी मोटी कालिख […]

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आदरनीय प्रधानमंत्री जी,
बहुत-बहुत बधाई.

बधाई इसलिए कि ‘इंडिया’ के अट्टहासों से डरी सहमी भारतमाता अब सर उठाये खड़ी दिखाई देने लगी है. गंगा मइया, नवरात्रि, वाराणसी, खेत-खलिहान, किसान, भगत सिंह और गांधीजी जैसे लब्ज हवा में लहराते कानों में दस्तक दे रहे हैं. सालों के बाद लगता है भारत की छवि किसी मोटी कालिख की परतों से बाहर आ रही है. श्रेय आपको है मोदी जी. सचमुच बधाई के पात्र हैं आप.दो अक्तूबर को गांधी जयंती की पावन तिथि है. पहले दो अक्तूबर सिर्फ राजघाट पर पुष्पगुच्छों में सिमट कर मुरझा जाता था. अब बापू के विचार दर्शन लाइब्रेरी की किताबों से बाहर जनमानस पटल पर अंकित होते दिख रहे हैं. आपको साधुवाद. यूएनओ के मंच पर हिंदी में आपका संबोधन कुछ ऐसा ही था, मानो वर्षों से उपेक्षित किसी बूढ़ी मां को घर के अंधेरे कोने से निकाल कर संभ्रांत लोगों के बीच खड़ा कर दिया हो. सरहदों के पार शान से सर उठाये हिंदी की चमक ने हतप्रभ कर दिया था. करिश्मा आपका है मोदीजी.

आप बापू के चरणों में स्वच्छ भारत समर्पित करने की कामना करते हैं. मुल्क के सौंदर्य की रक्षा का भाव ही बड़ा सुंदर है. माथे पर मैला ढोकर हरिजनों का साथी बन गये थे बापू. स्वच्छता के आधार को मजबूत बनाने का पहला कदम था बापू का. किसी भी जननेता का ऐसा रूप न किसी ने किसी युग में देखा होगा न सुना होगा. राष्ट्रपिता कहें या युगपिता-बापू तो बस बापू ही थे. उन्हीं से अापका वादा है स्वच्छ भारत का. आपके साथ इस प्रण में पूरा मुल्क आपके साथ है. आपने एक आवाज लगाई अौर सबके हाथों में झाड़ू सज गये. तड़के ही अंबानी सड़क पर झाड़ू थामे नजर आये. हाथों में बल्ले की जगह सचिन झाड़ू लेकर सड़क पर उतर पड़े. चौबीसो घंटे एसी की हवा में सांस लेनेवाले धनकुबेर कूड़े के ढेर के बीच झाड़ू लेकर तैनात. प्रतिष्ठा और राजसी ठाट का चोला लपेटे अधिकारी-मंत्रियों को झाड़ू पकड़ने में रत्तीभर भी हिचक न आयी. औद्योगिक संस्थानों, कॉलेजों, स्कूलों में मानो झाड़ू थामने की होड़ सी लग गयी. एक स्वच्छ निर्मल भारत की तस्वीर का सपना साकार हो. अनेकों शुभकामनाएं हैं आपको.

मगर एक बात जेहन में लगातार कौंधती है. ‘मन मैला और तन को धोए’ भारत के स्वच्छता अभियान में क्या आंतरिक स्वच्छता शामिल नहीं? भारतीय समाज के चरित्र पर कुसंस्कारों, अपसंस्कृति, अश्लीलता के मैल का चट्टानी अंबार जम चुका है. इस कूड़े पर भी झाड़ू फेरने का ऐलान करते, तो बात बनती. सड़कों, गलियों, चौराहों की गंदगी तो फिर भी झेली जा सकती है, मगर भारतीय समाज के चरित्र पर जमे मैल से जो बदबू उठ रही है, उसका क्या?

सबको पता है अौर आपको भी पता ही है कि इस गंदगी की गंगोत्री कहां है? मनोरंजन के नाम पर जो कुछ सिनेमा अौर टीवी सीरियल उड़ेल रहे हैं, क्या वह राष्ट्रीय चरित्र के लिए विष समान नहीं? ऐसी अपसंस्कृति, ऐसी विषैली विचारधाराएं अौर कुवृत्ति का बीज बोया है आधुनिक सिनेमा-सीरियलों ने कि प्रतिक्रिया व्यक्त करने को शब्द नहीं मिलते. अश्लीलता, नंगापन, बेशर्मी जैसे शब्द हल्के लगने लगे हैं. शायद कोई नया शब्द तलाशना होगा अब. क्या सिनेमा, क्या सीरियल, क्या गीत, क्या संगीत सबमें अश्लीलता. सब मूल्यों का मजाक. मानो भारत अौर भारतीयता को मटियामेट करके ही दम लेंगे. सड़क अौर चौराहे चमका कर क्या कर लेंगे मोदीजी, अगर विचार गंदे हों, मन मैला हो. नजरें गंदी हों अौर जुबान गंदी हो. रियलिटी शो में कला के नाम पर सस्ती भाव-भंगिमाअों का खुल कर प्रदर्शन. क्या बच्चे, क्या युवा अौर क्या बूढ़े सब पर घटिया मनोरंजन बुखार. मोदी जी अगर बॉलीवुड और सीरियलों की दुनिया पर झाड़ू न फेरा गया, तो राष्ट्र ही खत्म हो जायेगा. मन की स्वच्छता के बगैर तन की स्वच्छता किस काम की? आपका स्वच्छता अभियान कहीं रंगे सियार वाली बात को चरितार्थ न कर दे.

मोदी जी आपके चमत्कारिक व्यक्तित्व ने सहसा नेहरू-शास्त्री का स्मरण दिलाया है. शास्त्री जी ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया, तो सड़ी बंदूकें भी थाम कर हमारे फौजी जंग में कूद पड़े. बगैर बैलों के भी किसान हल लेकर खेतों में दौड़ पड़े. आज वही नारा चाहिए मोदी जी. सिनेमा-सीरियलों पर झाड़ू फेरने की घोषणा कीजिये. संपूर्ण स्वच्छता तभी हासिल होगी. अन्यथा साफ-सुथरे लिबास में भी भारत माता शर्मिंदा से सर झुकाये नजर आयेगी. चरित्र गंदा करनेवाले उपकरणों पर भी झाड़ू चले यही विनम्र आग्रह है. बॉलीवुड और टीवी सीरियलों पर कब झाड़ू चलेगा?

राजलक्ष्मी सहाय
भारत की पूर्ण स्वच्छता की अभिलाषा लिये
भारत की एक नागरिक
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