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राज्य की पहली महिला गवर्नर बनी द्रौपदी मुरमू

Updated at : 19 May 2015 5:55 AM (IST)
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राज्य की पहली महिला गवर्नर बनी द्रौपदी मुरमू

रांची : द्रौपदी मुरमू ने झारखंड की नौंवीं व पहली महिला राज्यपाल के रूप में शपथ ली. झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वीरेंदर सिंह ने द्रौपदी मुरमू को राजभवन स्थित बिरसा मंडप में पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी. द्रौपदी मुरमू ने अंगरेजी में शपथ ली. इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास, […]

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रांची : द्रौपदी मुरमू ने झारखंड की नौंवीं व पहली महिला राज्यपाल के रूप में शपथ ली. झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वीरेंदर सिंह ने द्रौपदी मुरमू को राजभवन स्थित बिरसा मंडप में पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी. द्रौपदी मुरमू ने अंगरेजी में शपथ ली.
इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, अजरुन मुंडा, हेमंत सोरेन सहित झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, झारखंड लोक सभा के पूर्व उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा, सांसद पीएन सिंह, मंत्री सरयू राय, रणधीर सिंह व अन्य, विधायक, मेयर आशा लकड़ा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ माजी, खादी बोर्ड के अध्यक्ष जयनंदू, भाजपा अध्यक्ष रवींद्र राय, सभी विवि के कुलपति, मुख्य सचिव राजीव गौबा, राज्यपाल द्रौपदी मुरमू के परिवार के सदस्य, ओड़िशा से आये अतिथि सहित भाजपा के कई कार्यकर्ता, आइएएस व आइपीएस अधिकारी व अन्य लोग उपस्थित थे.
अधिकारियों-कर्मचारियों से मिलीं
शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल द्रौपदी मुरमू राजभवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष गयीं. वहां अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलीं व परिचय प्राप्त किया. इसके बाद आगंतुकों से भी मिलीं. कई लोगों ने उन्हें गुलदस्ता देकर बधाई दी.
मुख्य सचिव ने नियुक्ति आदेश पढ़ा
राज्य के मुख्य सचिव राजीव गौबा ने सबसे पहले राष्ट्रपति द्वारा द्रौपदी मुरमू को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त करने से संबंधित आदेश पढ़ा. इसके बाद मुख्य सचिव ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से द्रौपदी मुरमू को राज्यपाल पद की शपथ दिलाने का आग्रह किया.
2000 में रायरंगपुर की विधायक रहीं
द्रौपदी मुरमू का जन्म 20 जून 1958 को हुआ. वह मूल रूप से ओड़िशा के रायरंगपुर की रहने वाली हैं. स्नातक उत्तीर्ण द्रोपदी मुरमू के पिता का नाम विरंची नारायण टुडू है. इनके पति का नाम स्व श्याम चरण मुरमू है.
द्रौपदी के बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी. द्रौपदी मुरमू ने सबसे पहले ओड़िशा सरकार में सिंचाई व ऊर्जा विभाग में जूनियर अस्सिटेंट के पद पर कार्य किया.
साथ ही श्री अरविंदो एकीकृत शिक्षा शोध संस्थान रायरंगपुर में नि:शुल्क सहायक शिक्षक का कार्य किया. वर्ष 1997 में नगर निगम में वार्ड पार्षद व वाइस चैयरमेन रहीं. ओड़िशा भाजपा एसटी मोरचा की उपाध्यक्ष रहीं. वर्ष 2000 में रायरंगपुर की विधायक रहीं. साथ ही परिवहन व वाणिज्य विभाग में मंत्री रहीं. उन्हें एसटी मोरचा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य भी बनाया गया. दो बार वे विधायक चुनी गयीं.
ओड़िशा विधानसभा में उन्हें बेस्ट विधायक का भी दरजा दिया गया. बाद में वे मयूरभंज भाजपा जिला अध्यक्ष चुनी गयीं. वर्तमान में वे जिला अध्यक्ष व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पद से इस्तीफा दे दी हैं. द्रौपदी मुरमू शाकाहारी हैं.
मां का राज्यपाल बनना महिलाओं का सम्मान
राज्यपाल की बेटी इतिश्री ने प्रभात खबर से कहा
संजीव सिंह
रांची : मेरी मां का झारखंड का राज्यपाल बनना महिलाओं का सम्मान है. यह कहना है कि झारखंड की नवनियुक्त राज्यपाल द्रौपदी मुरमू की पुत्री व बैंक में कार्यरत इतिश्री हेंब्रम का. राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने इतिश्री अपने पति गणोश चंद्र हेंब्रम के साथ रांची आयीं.
इतिश्री ने कहा कि राज्यपाल के रूप में मां को देखकर खुशी हो रही है. वे महिला व उनके अधिकारों पर विशेष ध्यान देंगी. खासकर शिक्षा को बढ़ावा दिलाने व सुरक्षा दिलाने का प्रयास करेंगी, जबकि राज्य के विकास में अपनी पूरी निष्ठा दिखायेंगी.
इतिश्री ने कहा कि राज्य की भाषा के विकास के लिए वे विशेष रूप से ध्यान देंगी. मां आरंभ से राजनीति के क्षेत्र में रही हैं. जब मां को राज्यपाल को बनाया गया, तो उन्हें मालूम नहीं था, वे अपने कार्यालय में थीं. उन्होंने कहा कि उनकी मां काफी मिलनसार हैं, लेकिन अब जब वे संवैधानिक पद पर आ गयी हैं, तो लोगों से मिलना-जुलना कम हो सकेगा.
इतिश्री ने बताया कि उनके पिता बैंक ऑफ इंडिया में अधिकारी थे, लेकिन नौकरी के दौरान ही उनकी मौत हो गयी. जबकि एक भाई था, उसकी दुर्घटना में मौत हो गयी. घर में मां, वह और उसके पति ही है. उसने कहा कि उसकी राजनीति में आने की कोई संभावना नहीं है.
ओड़िशा व मयूरभंज से आये थे 300 लोग
रांची : द्रौपदी मुरमू ने सोमवार को राज्य की नौवीं राज्यपाल के रूप में शपथ लीं. शपथ ग्रहण समारोह में ओड़िशा व मयूरभंज से 300 से ज्यादा लोग आये थे. कई लोग शपथ ग्रहण समारोह के एक दिन पहले रात में ही रांची पहुंच चुके थे.
इन अतिथियों को ठहराने की व्यवस्था 10 जगहों पर की गयी थी. इनके खाने की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की गयी थी. जिला प्रशासन ने लगभग 430 लोगों के खाने की व्यवस्था की थी. अतिथियों के खाने में लगभग 1.03 लाख रुपये खर्च हुए. प्रति प्लेट 100-120 रुपये थी. बताया जाता है कि यह खर्च रात का खाना व सुबह के नाश्ते का है. दोनों दिन मिला कर 240 रुपये के हिसाब से 1.03 लाख रुपये खर्च हुए हैं.
अपनी गाड़ी से आये थे अतिथि
राज्यपाल के अतिथि ओड़िशा से अपनी गाड़ी से रांची पहुंचे थे. जिला प्रशासन की ओर से एक मात्र गाड़ी की व्यवस्था की गयी थी.
दरबार खर्च का है प्रावधान
राजभवन के अतिथियों के लिए बजट में दरबार खर्च का प्रावधान होता है. राजभवन आने वाले अतिथियों पर इसी मद से खर्च किया जाता है. जिला प्रशासन अगर आपात स्थिति में अपने कोष से खर्च करता है, तो इसकी भरपाई राजभवन के इसी मद से की जाती है.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को नहीं मिला निमंत्रण
रांची : राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस पार्टी के नेताओं को नहीं बुलाया गया. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत, पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय सहित बड़े नेताओं को निमंत्रण नहीं दिया गया था.
राजभवन से केवल पार्टी के विधायकों को ही निमंत्रण मिला था. प्रदेश अध्यक्ष सहित आला नेताओं को न्योता नहीं दिये जाने से कांग्रेसी नाराज हैं. पार्टी के मीडिया संयोजक राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह को भाजपा का कार्यक्रम बना दिया गया. भाजपा राजनीतिक परंपरा भी भूल गयी है. राज्यपाल संविधान के संरक्षक हैं.
ऐसे में वह किसी पार्टी विशेष के प्रतिनिधि नहीं हैं. लेकिन भाजपा ने अपना चरित्र दिखा दिया है. श्री प्रसाद ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष तक को निमंत्रण नहीं दिया गया है. राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा का कुंठित चरित्र उजागर हुआ है.
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