राहुल पुरवार प्रकरण : वंदना डाडेल ने जतायी थी कई बिंदुओं पर गड़बड़ी की आशंका
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Feb 2020 7:24 AM
टाटा प्रोजेक्ट्स के भुगतान में बिना किसी ठोस वजह विलंब को बताया संदिग्ध रांची : टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना (डीडीयूजे) के लिए किये गये कार्यों के एवज में भुगतान में बिना किसी ठोस कारण जान बूझकर विलंब किया गया. यह बात तत्कालीन ऊर्जा सचिव वंदना डाडेल ने अपनी जांच रिपोर्ट […]
टाटा प्रोजेक्ट्स के भुगतान में बिना किसी ठोस वजह विलंब को बताया संदिग्ध
रांची : टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना (डीडीयूजे) के लिए किये गये कार्यों के एवज में भुगतान में बिना किसी ठोस कारण जान बूझकर विलंब किया गया. यह बात तत्कालीन ऊर्जा सचिव वंदना डाडेल ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखी है. झारखंड बिजली वितरण निगम के तत्कालीन एमडी राहुल पुरवार पर भुगतान में विलंब करने और कमीशन मांगने और धमकाने के आरोप की जांच करते हुए उन्होंने कई बिंदुओं पर गड़बड़ी की बात कही है. रिपोर्ट के अनुसार टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बिल के मार्च 2019 से लेकर जुलाई 2019 तक के फाइलों की जांच की गयी. इसमें फाइलों में कुछ न कुछ लिख कर किसी तरह भुगतान लटकाने की बातें सामने आयी है.
इस तरह लौटाते रहे फाइलें : ऊर्जा सचिव ने लिखा है कि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना( डीडीयूजे ) के तहत पलामू में पैकेज -4 का काम टाटा प्रोजेक्ट्स को मिला था. टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने काम की कुल राशि 12 करोड़ छह लाख 41 हजार नौ सौ 51 रुपये में से भुगतान के लिए छह करोड़ 42 लाख 99 हजार तीन सौ 48 रुपये के बिल को भुगतान करने के लिए संचिका 22.2.2019 को बनी. एमडी जेबीवीएनएल को संचिका दिनांक 13.3.2019 को दिया गया. एमडी द्वारा 14.3.2019 को …प्लीज अप्राइज मी व्हाट इज द करेक्ट प्रोग्रेस इनक्लूडिंग मीटर वर्क की टिप्पणी के साथ संचिका वापस कर दी गयी. फिर एमडी के पास दोबारा 9.4.2019 को संचिका भेजी गयी, तो 14.4.2019 को उन्होंने करेंट प्रोग्रेस से अपडेट कराने की टिप्पणी लिख कर संचिका लौटा दी. फिर तीसरी बार 25.4.2019 को संचिका एमडी को भेजी गयी, तो 29.4.2019 को पूअर परफार्मेंस लिखकर संचिका वापस कर दी गयी. फिर चौथी बार 3.7.2019 को एमडी संचिका भेजी गयी. तब 4.7.2019 को उन्होंने मंजूरी दी और 11.7.2019 को छह करोड़ 52 लाख 99 हजार 348 रुपये का भुगतान किया गया. यानी बिल के भुगतान में सात माह का समय लगा. ये तो एक फाइल की मूवमेंट की बानगी है. इसी तरह ऊर्जा सचिव ने टाटा प्रोजेक्ट्स के अन्य सात बिल के भुगतान में भी विलंब की बात लिखी है. जिसमें किसी न किसी वजह से बिल को लटकाने का प्रयास किया गया है.
ऊर्जा सचिव ने लिखा है कि प्रबंध निदेशक राहुल कुमार पुरवार के विरुद्ध बार-बार शिकायतें मिल रही हैं. उन्होंने लिखा है कि श्री पुरवार के लगभग साढ़े चार वर्ष के लंबे कार्यकाल में राजस्व बढ़ोतरी की ओर ध्यान नहीं दिया गया है. जिस कारण निगम की वित्तीय स्थिति अत्यंत चिंताजनक है.
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